India LPG Demand 2026: एलपीजी यानी रसोई गैस भारत में हर घर की जरूरत बन चुकी है। आज देश में करोड़ों परिवार इसी गैस पर खाना बनाते हैं। लेकिन हाल के दिनों में मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान-इजराइल और अमेरिका से जुड़े युद्ध जैसे हालातों ने LPG की सप्लाई पर असर डाला है। Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे गैस की आयात में दिक्कत आ रही है। आइए जानते हैं कि भारत में LPG की कितनी खपत है और सरकार ने अब तक क्या-क्या कदम उठाए हैं।
भारत में कितनी खपत है LPG की सालाना?/India LPG Demand 2026
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक देश है। यहां हर साल लगभग 31 से 31.3 मिलियन टन यानी करीब 3.13 करोड़ टन LPG की खपत होती है। यह आंकड़ा पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ा है क्योंकि ज्यादा से ज्यादा घरों में गैस कनेक्शन पहुंचे हैं।

देश में कुल 33 करोड़ से ज्यादा एक्टिव LPG कनेक्शन हैं। इनमें ज्यादातर घरेलू उपभोक्ता हैं। घरेलू इस्तेमाल में 14 किलो के सिलेंडर की हिस्सेदारी करीब 87 प्रतिशत है, जबकि होटल-रेस्टोरेंट जैसे कमर्शियल सेक्टर में 19 किलो के सिलेंडर ज्यादा चलते हैं, जिनकी हिस्सेदारी 13 प्रतिशत के आसपास है।
खपत का बड़ा हिस्सा घरों में होता है – लगभग 87-90 प्रतिशत। बाकी कमर्शियल, इंडस्ट्री और अन्य कामों में लगता है। इतनी बड़ी खपत को पूरा करने के लिए भारत को काफी आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।
कितना आयात और कितना घरेलू उत्पादन?
भारत अपनी LPG जरूरत का 60-65 प्रतिशत आयात करता है। कुछ रिपोर्ट्स में यह 62 प्रतिशत तक बताया गया है, तो कुछ में 80-85 प्रतिशत तक का अनुमान है क्योंकि घरेलू उत्पादन सीमित है। कुल आयात का 80-90 प्रतिशत हिस्सा मिडिल ईस्ट यानी पश्चिम एशिया से आता है। मुख्य देश हैं – UAE (26%), Qatar (22%), Saudi Arabia (22%) और बाकी अन्य। ये सारी गैस Strait of Hormuz से होकर आती है, जो अब युद्ध जैसे हालात में बंदी या खतरे की वजह से प्रभावित हो रहा है।
घरेलू उत्पादन करीब 40 प्रतिशत है, यानी लगभग 12-12.8 मिलियन टन (1.2-1.28 करोड़ टन)। यह तेल रिफाइनरियों से निकलता है। लेकिन इतना उत्पादन पूरी मांग पूरी नहीं कर पाता, इसलिए आयात जरूरी है।
मिडिल ईस्ट में हो रहे तनाव का कितना असर पड़ रहा है?
ईरान पर हमले और जवाबी कार्रवाई से Strait of Hormuz पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। वैश्विक तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। भारत के लिए यह बहुत बड़ा झटका है क्योंकि LPG का 85-90 प्रतिशत आयात इसी क्षेत्र से होता है।
इस वजह से कमर्शियल LPG की सप्लाई में कमी आई है। मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई जैसे शहरों में होटल-रेस्टोरेंट को गैस सिलेंडर मिलने में दिक्कत हो रही है। कुछ जगहों पर 20 प्रतिशत तक होटल बंद होने की खबरें आई हैं। घरेलू गैस पर भी असर पड़ सकता है अगर हालात और बिगड़ें। सप्लाई में 30 प्रतिशत तक की कमी की बातें कही जा रही हैं।
सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए?
सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए कई जरूरी कदम उठाए हैं:
- Essential Commodities Act लागू किया – इससे LPG को जरूरी वस्तु घोषित कर सप्लाई कंट्रोल और ब्लैक मार्केटिंग रोकने की कोशिश की गई है।
- रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के आदेश – तेल कंपनियों जैसे HPCL, IOCL को ज्यादा LPG बनाने और उसे घरेलू इस्तेमाल के लिए इस्तेमाल करने को कहा गया है। घरेलू उत्पादन 10 प्रतिशत तक बढ़ाने की कोशिश हो रही है।
- घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता – कमर्शियल सेक्टर की सप्लाई सीमित कर घरों को गैस उपलब्ध कराने पर फोकस किया गया है। अस्पताल, स्कूल जैसे जरूरी सेक्टर भी प्राथमिकता में हैं।
- 25 दिन का अंतर बुकिंग में – होर्डिंग और ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए सिलेंडर बुकिंग में 25 दिन का गैप अनिवार्य किया गया है।
- कीमतों में बढ़ोतरी – 7 मार्च को घरेलू 14 किलो सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ाई गई। दिल्ली में अब यह करीब 913 रुपये का हो गया है। Ujjwala योजना के तहत गरीब परिवारों को 300 रुपये सब्सिडी मिलती है, तो उन्हें 613 रुपये में मिलता है। कमर्शियल सिलेंडर में भी बढ़ोतरी हुई है।
- वैकल्पिक स्रोतों से आयात – कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, नॉर्वे जैसे देशों से अतिरिक्त LPG-LNG मंगाने की कोशिश हो रही है। अमेरिका से भी पिछले साल डील हुई थी। रूस और वेस्ट अफ्रीका जैसे क्षेत्रों पर भी नजर है।
निष्कर्ष
अगर तनाव लंबा चला तो कीमतें और बढ़ सकती हैं। सब्सिडी का बोझ सरकार पर बढ़ेगा। Ujjwala योजना के तहत 10.5 करोड़ से ज्यादा लाभार्थी हैं, जिन्हें सस्ती गैस मिलती है। लेकिन आयात महंगा होने से सब्सिडी बढ़ानी पड़ सकती है।










