Indian Economy Shines Amid Global Slowdown : दूसरी तिमाही में 7.2% GDP ग्रोथ का अनुमान, रिपोर्ट में दिखी आर्थिक मजबूती

Indian Economy Shines Amid Global Slowdown : इंडिया रेटिंग्स की रिपोर्ट में खुलासा! निजी खपत और निवेश से मिली रफ्तार

Indian Economy Shines Amid Global Slowdown : वैश्विक अर्थव्यवस्था जहां मंदी और अस्थिरता की मार झेल रही है, वहीं भारत (India) ने एक बार फिर अपनी विकास क्षमता का परिचय दिया है। रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (India Ratings and Research – Ind-Ra) की नई रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ रेट 7.2% रहने का अनुमान है। यह पिछले पाँच तिमाहियों में सबसे तेज़ आर्थिक विस्तार माना जा रहा है। एजेंसी का कहना है कि इस ग्रोथ के पीछे मुख्य कारक हैं बढ़ती निजी खपत, निवेश में उछाल और सेवा क्षेत्र का दमदार प्रदर्शन। जबकि वैश्विक टैरिफ तनाव और बाजार की अस्थिरता के बावजूद भारत ने अपनी आर्थिक गति बनाए रखी है। तो चलिए जानते हैं पूरा आर्थिक परिदृश्य विस्तार से…

वैश्विक मंदी के बीच भारत की तेज़ रफ्तार

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जहां अमेरिका (US) की ऊंची टैरिफ नीतियाँ और यूरोपीय बाज़ार की अस्थिरता ने कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित किया है, वहीं भारत की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। इंडिया रेटिंग्स (Ind-Ra) की रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक संकटों के बावजूद घरेलू मांग और निवेश गतिविधियों ने अर्थव्यवस्था को संभाले रखा। एजेंसी का मानना है कि मजबूत घरेलू उपभोग और सरकारी खर्च ने भारत को मंदी की लहर से बचाया है। पिछले कुछ महीनों में विदेशी निवेश में हल्की गिरावट आई है, परंतु घरेलू स्तर पर खपत और सेवा क्षेत्र की सक्रियता ने संतुलन बनाए रखा। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का आर्थिक मॉडल “Self-sustaining Consumption” पर आधारित है, जिसने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद विकास की राह नहीं रुकने दी।

निजी खपत और कर रियायतों का असर

एजेंसी के मुख्य अर्थशास्त्री पारस जसराय (Paras Jasrai) के अनुसार, GDP ग्रोथ में सबसे बड़ी भूमिका Private Consumption (निजी खपत) की रही। रिपोर्ट के मुताबिक ऊँची और निम्न दोनों आय वर्गों की वास्तविक आय (Real Income) में सुधार हुआ है, जिससे लोगों की खरीदारी क्षमता बढ़ी है। इसके साथ ही हाल ही में आयकर दरों में कटौती (Income Tax Relief) ने उपभोक्ताओं के पास अधिक खर्च योग्य आय छोड़ी, जिससे बाजार में मांग बढ़ी। हालांकि, GST दरों के युक्तिकरण के चलते कुछ उपभोक्ताओं ने खरीदारी टाल दी, जिससे अनुमानित वृद्धि कुछ हद तक सीमित रही। फिर भी, रिपोर्ट कहती है कि उपभोग में यह सुधार आने वाले महीनों में भी जारी रहेगा, जो अर्थव्यवस्था को और मजबूत बना सकता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर, सेवा क्षेत्र और निवेश मांग का योगदान

इंड-रा (Ind-Ra) की रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरी तिमाही में इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure), सेवा क्षेत्र (Services Sector) और निवेश मांग (Investment Demand) ने GDP ग्रोथ को उल्लेखनीय समर्थन दिया। निवेश मांग में सालाना आधार पर 7.5% की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) का बड़ा योगदान रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, निजी खपत में लगभग 8% की बढ़ोतरी देखी गई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि (6.4%) से काफी अधिक है। सेवा क्षेत्र में भी पर्यटन, परिवहन, और डिजिटल सेवाओं में उछाल देखा गया है, जिससे रोजगार और उत्पादकता दोनों में सुधार हुआ है। यह परिदृश्य संकेत देता है कि भारत की आर्थिक वृद्धि अब केवल औद्योगिक उत्पादन पर निर्भर नहीं, बल्कि विविध क्षेत्रों के समन्वय से आगे बढ़ रही है।

आधिकारिक आंकड़ों और वैश्विक स्थिति पर नज़र

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical Office – NSO) 28 नवंबर को दूसरी तिमाही के आधिकारिक GDP आंकड़े जारी करेगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वास्तविक ग्रोथ रेट 7% से ऊपर रहेगी, जिससे भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते प्रमुख बाजारों में शीर्ष पर बना रहेगा। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर सतर्क रहना ज़रूरी है, क्योंकि ये आगे चलकर मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ा सकते हैं। फिलहाल, घरेलू निवेश, सेवा क्षेत्र की रफ्तार और ग्रामीण मांग के पुनरुद्धार से भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बने रहने की संभावना जताई जा रही है।

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