Indian Stock Market Crash: सोमवार, 8 दिसंबर की सुबह शेयर बाजार निवेशकों के लिए डरावनी साबित हुई। जिस बाजार से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की लिक्विडिटी सपोर्ट के बाद तेजी की उम्मीद थी, वही कुछ ही घंटों में टमाटर की तरह लाल हो गया। निवेशकों को ऐसा झटका लगा कि करीब 8 लाख करोड़ रुपये का मार्केट कैप मिनटों में गायब हो गया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक तेज गिरावट के साथ लुढ़क गए। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, डॉलर के मुकाबले कमजोर होता रुपया और अमेरिकी फेड की बैठक से पहले बना डर- इन सभी फैक्टर्स ने बाजार की चाल बिगाड़ दी। हर निवेशक के मन में अब सिर्फ एक सवाल है कि आखिर यह गिरावट क्यों आई और आगे क्या बाजार संभलेगा या और फिसलेगा? चलिए जानते हैं पूरी खबर क्या है…
तेज शुरुआत की उम्मीद, लेकिन मिला बड़ा झटका/Indian Stock Market Crash
पिछले सप्ताह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) द्वारा रेपो रेट में कटौती और करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये की लिक्विडिटी सपोर्ट देने के बाद मार्केट एक्सपर्ट्स को उम्मीद थी कि सोमवार को बाजार तेजी दिखाएगा। निवेशकों को लगा कि बैंकिंग सेक्टर में मजबूती आएगी और बाजार को सपोर्ट मिलेगा। लेकिन हुआ इसका उल्टा। सुबह से ही बिकवाली का दबाव बन गया और देखते ही देखते सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में फिसल गए। खासतौर पर बैंकिंग, आईटी और मेटल सेक्टर में भारी प्रेशर देखा गया। मुंबई (Mumbai) स्थित बीएसई और एनएसई में ट्रेडिंग शुरू होते ही निवेशकों की घबराहट साफ नजर आने लगी। शुरुआती एक घंटे में ही हजारों करोड़ रुपये स्वाहा हो गए, जिससे बाजार में डर का माहौल बन गया।

सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट से हिला बाजार
सोमवार दोपहर करीब 2:50 बजे तक 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 700.58 अंक टूटकर 85,011.79 के स्तर पर आ गया, जबकि एनएसई निफ्टी-50 (NSE Nifty) 262.40 अंक गिरकर 25,924.05 पर कारोबार करता दिखा। इस गिरावट के चलते निवेशकों की कुल संपत्ति में करीब 8 लाख करोड़ रुपये की सेंध लग गई। सबसे ज्यादा नुकसान बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर को हुआ। कई दिग्गज शेयर 2 से 4 प्रतिशत तक टूट गए। छोटे और मझोले शेयरों में भी जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। बाजार का मूड पूरी तरह नेगेटिव नजर आया। जिन निवेशकों को RBI के ऐलान के बाद मजबूती की उम्मीद थी, उन्हें कुछ ही घंटों में बड़ा झटका लग गया।
विदेशी बिकवाली से लेकर अमेरिकी फेड का डर
बाजार गिरने की सबसे बड़ी वजह बनी विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने पिछले सात कारोबारी दिनों से लगातार शेयर बेचे हैं। केवल शुक्रवार को ही लगभग 438.90 करोड़ रुपये की निकासी की गई। दिसंबर में अब तक करीब 11 हजार करोड़ रुपये बाजार से निकल चुके हैं। इसके अलावा 9-10 दिसंबर को न्यूयॉर्क (New York) में होने वाली अमेरिकी फेड (US Fed) की बैठक से पहले भी निवेशक बेहद सतर्क नजर आए। ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने जोखिम लेने की क्षमता कम कर दी। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 90.11 तक पहुंच गया, जिससे भी बाजार पर दबाव बना।
कच्चा तेल, कमजोर रुपया और आगे की रणनीति
अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत 63.83 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारत के आयात बिल और महंगाई पर पड़ता है, जिससे शेयर बाजार में चिंता बढ़ जाती है। रुपया लगातार कमजोर होने से विदेशी निवेशकों का भरोसा भी डगमगाता है। मौजूदा हालात में बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि अमेरिकी फेड की बैठक के बाद ही बाजार की दिशा साफ होगी। तब तक उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। जिन निवेशकों ने लंबी अवधि के लिए निवेश किया है, उन्हें घबराने के बजाय रणनीति के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी जा रही है।










