ईरान: दुनिया का तेल और गैस व्यापार का एक बहुत बड़ा रास्ता है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज। यह फारस की खाड़ी को खुला समुद्र से जोड़ता है। यहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है। अगर यह रास्ता बंद हो जाए तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है और खाने-पीने की चीजों की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है।
अभी मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा हुआ है। ईरान और उसके विरोधी देशों के बीच झड़पें चल रही हैं। इसी बीच ईरान ने होर्मुज को पूरी तरह बंद करने की धमकी दी थी, लेकिन अब उसने साफ कर दिया है कि रास्ता पूरी तरह बंद नहीं है। सिर्फ उसके ‘दोस्त’ देशों के जहाजों को वहां से गुजरने की अनुमति है।

ईरान के विदेश मंत्री का बड़ा ऐलान
25-26 मार्च 2026 को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट कहा कि होर्मुज सिर्फ मित्र देशों के लिए खुला रहेगा। उन्होंने मुंबई स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास के जरिए बताया:
“हमने चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान जैसे मित्र देशों के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है। दुश्मनों और उनके सहयोगियों के लिए यह रास्ता बंद रहेगा।”
ईरान की रक्षा परिषद ने भी नए नियम जारी किए हैं। अब किसी भी गैर-विरोधी जहाज को वहां से गुजरने से पहले ईरानी अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी और सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा। कुछ भारतीय जहाज पहले ही इस रास्ते से गुजर चुके हैं।
वो पांच ‘दोस्त’ देश कौन-कौन से हैं?
ईरान ने जिन पांच देशों को अपने दोस्त माना है और उनके जहाजों को सुरक्षित गुजरने की इजाजत दी है, वे हैं:
- भारत
- चीन
- रूस
- इराक
- पाकिस्तान
ये देश ऐसे हैं जिन्होंने ईरान के खिलाफ किसी हमले में हिस्सा नहीं लिया और ईरान के साथ अच्छे संबंध रखते हैं। ईरान कह रहा है कि जो देश उसके साथ तालमेल बिठाकर चलेंगे, उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। कुछ रिपोर्ट्स में बांग्लादेश का नाम भी लिया गया है, लेकिन मुख्य लिस्ट में ये पांच देश ही हैं।
भारत के लिए अच्छी खबर क्यों है?
भारत को इस फैसले से काफी फायदा हो सकता है। भारत ईरान से काफी तेल खरीदता है और होर्मुज से गुजरकर ही बहुत सारा तेल भारत पहुंचता है। अगर रास्ता बंद रहता तो तेल की सप्लाई प्रभावित होती और कीमतें बढ़तीं। अब भारतीय जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति मिल गई है, जिससे तेल आयात सुचारू रह सकता है।
भारत की कूटनीति भी यहां काम आई लगती है। हमने ईरान के साथ संबंध बनाए रखे और किसी भी पक्ष में सीधे शामिल नहीं हुए। इसी वजह से ईरान ने भारत को ‘दोस्त’ की लिस्ट में रखा।
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख की चिंता
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि होर्मुज का बंद होना या आंशिक रूप से प्रभावित होना पूरी दुनिया में तेल, गैस और खाद्यान्न की सप्लाई को प्रभावित कर रहा है। ईंधन महंगा हो रहा है और खेती के मौसम में देरी से गंभीर समस्या हो सकती है।
गुटेरेस ने अमेरिका और इजरायल से कहा कि अब युद्ध खत्म करने का समय आ गया है। उन्होंने ईरान से भी अपील की कि वह उन पड़ोसी देशों पर हमले बंद करे जो इस लड़ाई में शामिल नहीं हैं।
ईरान ने शांति प्रस्ताव क्यों ठुकराया?
ईरान ने अमेरिका के समर्थन वाले 15 सूत्री शांति प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया है। ईरान का कहना है कि जंग सिर्फ उनकी अपनी शर्तों पर ही खत्म होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के नेताओं से बातचीत जारी है और वे डील के लिए तैयार हो सकते हैं, क्योंकि उन्हें अपने लोगों के गुस्से का डर है।
निष्कर्ष
अभी स्थिति काफी संवेदनशील है। होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण है, इसलिए वह चाहे तो किसी भी जहाज को रोक सकता है। लेकिन मित्र देशों के लिए रास्ता खुला रखकर ईरान अपनी कूटनीतिक ताकत भी दिखा रहा है। दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ने का खतरा अभी भी है।










