ईरान: मिडिल ईस्ट की धरती पर पिछले पांच हफ्ते से भयंकर जंग चल रही है। अमेरिका और इजरायल के ताबड़तोड़ हमलों के बावजूद ईरान ने हार नहीं मानी है। चारों तरफ तबाही का मंजर है – आग के गोले, धुएं के बादल, बमों की गड़गड़ाहट और विध्वंसक विमानों की गरज। ईरान अपनी जमीन, अपनी आजादी और अपने सुप्रीम लीडर की याद में मोर्चे पर डटा हुआ है। लोग कह रहे हैं कि टाइगर अभी जिंदा है।
यह जंग 28 फरवरी 2026 से शुरू हुई थी। शुरू में लगा कि अमेरिका-इजरायल के मजबूत हमलों से ईरान झुक जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरान ने सस्ते ड्रोन और सटीक मिसाइलों से जवाब दिया। इससे पूरे खाड़ी इलाके में हड़कंप मच गया। ईरान के हमलों ने इजरायल, अमेरिकी ठिकानों और आसपास के देशों को नुकसान पहुंचाया।

ईरान पर लगातार हमले, लेकिन जवाब भी तेज
शुक्रवार को भी ईरान पर हमला हुआ। बुशहर प्रांत में एक गोदाम पर ड्रोन हमला किया गया। इसमें दो रिलीफ कंटेनर, दो बसें और एक एंबुलेंस पूरी तरह नष्ट हो गए। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने इसकी पुष्टि की। इजरायल ने ईरान पर मिसाइल भी दागी। इसके अलावा इस्फाहान इलाके में घातक हमले हुए, जहां आग और धुएं के बड़े-बड़े बादल दिखे।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि ईरान में स्वास्थ्य सुविधाओं पर 20 से ज्यादा हमले हो चुके हैं। इनमें अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है। ईरान को कुल मिलाकर भारी नुकसान हुआ है। उसके कई बड़े नेता और सैन्य अधिकारी शहीद हो चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद ईरान की सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) लड़ाई जारी रखे हुए हैं।
ईरान ने जवाब में अमेरिकी जहाज को मार गिराने का दावा किया है। उसने F-35 फाइटर जेट को भी तबाह करने की बात कही। इजरायल पर भी ईरान ने मिसाइलें दागीं। तेल अवीव के रामत गन इलाके में एक मिसाइल सीधे बिल्डिंग पर गिरी। इसमें दो लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए। सायरन की आवाजें लगातार सुनाई दे रही हैं।
खाड़ी देशों में भी फैली आग
जंग सिर्फ ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रही। ईरान ने खाड़ी देशों को भी निशाना बनाया। कुवैत की सबसे बड़ी पुरानी तेल रिफाइनरी मीना अल-अहमदी पर ड्रोन हमला हुआ। वहां आग लग गई। बहरीन में कई धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। इराक में भी ईरानी ड्रोन हमले से भयंकर आग फैल गई और तेल रिफाइनरी को नुकसान पहुंचा।
ईरान ने खाड़ी और जॉर्डन के आठ महत्वपूर्ण पुलों की हिट लिस्ट जारी की है। इसमें कुवैत का शेख जाबेर पुल, सऊदी अरब और बहरीन को जोड़ने वाला किंग फहद कॉजवे, यूएई के शेख जायद और अल मक्ता पुल, जॉर्डन के किंग हुसैन, दामिया, शेख खलीफा और अब्दौन पुल शामिल हैं। यह लिस्ट ईरान के जवाबी हमलों का संकेत दे रही है।
अमेरिका ने कराज के पास बी-1 पुल के कुछ हिस्सों को तबाह कर दिया। इसमें 8 लोग मारे गए और 95 घायल हुए। यह पहला मौका था जब अमेरिका ने किसी नागरिक ढांचे को निशाना बनाया। ईरान ने इसे दुश्मन की हार बताया और सोशल मीडिया पर ट्रंप के वीडियो का जवाब दिया।
ईरान के पास अभी भी ताकत बाकी
अमेरिका और इजरायल के हमलों के बावजूद ईरान की मिसाइल क्षमता आधी से ज्यादा बची हुई है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक उसके हजारों ड्रोन अभी भी एक्टिव हैं। ये अमेरिका और इजरायल के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। ईरान ने लेबनान के कुछ इलाकों को खाली करने की चेतावनी भी जारी की है, जहां रहने वाले लोगों को अलर्ट किया गया है।
दोनों तरफ से बातचीत की कोशिशें हुईं, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जंग के लक्ष्य लगभग पूरे हो चुके हैं और कुछ हफ्तों में काम खत्म हो सकता है। लेकिन ईरान ने साफ कहा कि बातचीत पूरी तरह बंद है।
आम लोगों पर सबसे ज्यादा असर
इस जंग में सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों का हो रहा है। ईरान में हजारों लोग मारे गए और घायल हुए हैं। अस्पताल, फार्मास्यूटिकल प्लांट और स्टील प्लांट जैसे ठिकानों पर हमले हुए। इजरायल और खाड़ी देशों में भी जान-माल का नुकसान हुआ। तेल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।
ईरान अपने सुप्रीम लीडर और शहीद नेताओं की याद में लड़ रहा है। वह कह रहा है कि अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार है। चारों तरफ आग और तबाही के बीच ईरान की जिद देखकर लगता है कि यह टाइगर अभी आसानी से नहीं रुकने वाला।










