Israel Iran Strikes: मध्य पूर्व में चल रही जंग ने नया मोड़ ले लिया है। इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं, जिसमें ईरान के हजारों सैन्य लक्ष्यों को तबाह किया जा रहा है। भारत में इजरायल के राजदूत रियुवेन अजार ने एक विशेष बातचीत में खुलासा किया है कि यह कार्रवाई सिर्फ रक्षा के लिए नहीं, बल्कि ईरान की पूरी सैन्य ताकत को कमजोर करने का ट्रंप-नेतन्याहू का सुनियोजित प्लान है। उनका कहना है कि अब ईरान अमेरिकी दूतावासों या बेस पर हमला करने की स्थिति में नहीं रहेगा।
राजदूत अजार ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “इजरायल और अमेरिका मिलकर ईरान के आसमान पर कंट्रोल कर रहे हैं। हम 2,500 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। उनका कहना है कि इन हमलों का मकसद ईरान की मिलिट्री क्षमता को इतना कमजोर करना है कि वह न इजरायल पर, न क्षेत्र के अन्य देशों पर और न ही अमेरिकी ठिकानों पर हमला कर सके। यह प्लान ऐसे समय में आया है जब ईरान ने पहले इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन अटैक किए थे, जिसमें इजरायल के शहर बेत शेमेंश में 9 नागरिकों की मौत हुई और 50 से ज्यादा घायल हुए।

ईरान की मिसाइलें और ड्रोन कामयाब हैं या नहीं?/Israel Iran Strikes
राजदूत ने बताया कि ईरान से आने वाली ज्यादातर मिसाइलों और ड्रोन को इजरायल ने सफलतापूर्वक रोक लिया है। उन्होंने कहा, हमने अपने देश की ओर आने वाली अधिकांश मिसाइलों को निष्क्रिय कर दिया है। उत्तर में हिज्बुल्लाह के हमलों को भी रोका गया है। इजरायल की एडवांस्ड मिसाइल डिफेंस सिस्टम (जिसमें आयरन डोम जैसी तकनीक शामिल है) ने इन हमलों को काफी हद तक नाकाम कर दिया है। राजदूत ने जोर देकर कहा कि इजरायल क्षेत्र में शांति और स्थिरता चाहता है, ठीक वैसे ही जैसे भारत चाहता है।
ईरान में शासन परिवर्तन की उम्मीद
रियुवेन अजार ने बड़ी उम्मीद जताई कि इन हमलों से ईरान में शासन बदल सकता है। उन्होंने कहा, “हमें निश्चित रूप से उम्मीद है। यह ईरानी जनता पर निर्भर करता है। कुछ सप्ताह पहले लाखों ईरानियों ने प्रदर्शन कर शासन बदलने की मांग की थी, लेकिन शासन ने क्रूरता दिखाई और हजारों निर्दोष लोगों को मार डाला।” अब इन हमलों से रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कई मुख्यालय तबाह हो रहे हैं। राजदूत का मानना है कि ईरानी लोग फिर सड़कों पर उतरेंगे और बदलाव की मांग करेंगे।
उन्होंने आगे कहा, “चुनौती यह है कि ईरान की मिलिट्री क्षमताओं को लगातार कम करते रहना है। ताकि वह इजरायल, क्षेत्र के देशों या अमेरिकी बेस पर हमला करने लायक न रहे। ऐसे में बाकी लीडरशिप को समझ आएगा कि रास्ता बदलना होगा, वरना वे अगली कतार में होंगे।”
तेल टैंकर हमले और क्षेत्रीय तनाव
ईरान ने हाल में तेल टैंकर पर हमला किया और संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन जैसे देशों को निशाना बनाया, ताकि तेल व्यापार बाधित हो। राजदूत अजार ने कहा कि यह तनाव बढ़ाने की कोशिश ईरान के खिलाफ ही जाएगी। उन्होंने बताया, “जैसे-जैसे यह सैन्य अभियान जारी रहेगा, उनकी क्षमताएं कमजोर होती जाएंगी। वे अराजकता नहीं पैदा कर पाएंगे। आने वाले दिनों या हफ्तों में तनाव कम होने की उम्मीद है।”
प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा
राजदूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजरायल यात्रा की तारीफ की। उन्होंने कहा, “हम पीएम मोदी के नेतृत्व की बहुत सराहना करते हैं। उनकी यात्रा में भारतीय और इजरायली लोगों के बीच गर्मजोशी महसूस हुई। हमारे संबंध सिर्फ हितों पर नहीं, बल्कि मूल्यों और साझा विरासत पर आधारित हैं। भारत एक विश्वसनीय साझेदार है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान के खतरे कम होने के बाद दोनों देश फिर से सकारात्मक गतिविधियों में जुड़ेंगे।
जमीनी कार्रवाई की कोई योजना नहीं
राजदूत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल इजरायल हवाई कार्रवाई कर रहा है। किसी खास खतरे को हटाने के लिए सीमित जमीनी ऑपरेशन हो सकता है, लेकिन बड़े पैमाने पर जमीनी सेना भेजने की कोई योजना नहीं है।
अमेरिकी दूतावासों पर खतरा कम
राजदूत के अनुसार, इन हमलों से ईरान अब अमेरिकी दूतावासों या बेस पर बड़ा हमला करने की स्थिति में नहीं रहेगा। हालांकि, हाल की घटनाओं में ईरान ने सऊदी अरब के रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन अटैक किया है। अमेरिका ने मिडिल ईस्ट के कई देशों से अपने नागरिकों को तुरंत निकलने की चेतावनी दी है। इजरायल का कहना है कि यह अभियान ईरान को हमेशा के लिए कमजोर कर देगा।










