Bokaro : झारखंड बोकारो नदुआस्थान-सोलागीडिह सड़क विवाद, बैरियर हटाने की जंग तेज, ग्रामीणों में तनाव

Bokaro : चास के सोलागीडिह मुख्य सड़क से नदुआस्थान जाने वाली कच्ची-पक्की सड़क पर इन दिनों हंगामा मचा हुआ है। यहां अस्थाई बैरियर लगा दिया गया है, जिससे नदुआस्थान के लोग परेशान हैं। वे बैरियर हटवाना चाहते हैं ताकि घर बनाने का सामान आसानी से पहुंच सके। दूसरी तरफ सोलागीडिह बस्ती के लोग कहते हैं कि भारी गाड़ियां चलने से नई सड़क खराब हो रही है। दोनों पक्षों में बातचीत नहीं बन पा रही, इसलिए अगली तारीख तक मामला टल गया है। गांव में असमंजस का माहौल है, कोई नहीं जानता कि आगे क्या होगा।

बैरियर लगने के वजह से विवाद

सोलागीडिह के लोग बताते हैं कि यह सड़क हाल ही में बनी है। मुख्य सड़क से जुड़कर नदुआस्थान तक जाती है। पहले यहां सिर्फ पैदल या हल्की गाड़ियां चलती थीं, लेकिन अब नदुआस्थान में कई लोग नए मकान बना रहे हैं। इसके लिए ट्रक, ट्रैक्टर और सीमेंट-ईंट से लदे भारी वाहन रोज आते-जाते हैं।

“सड़क अभी नई है, ज्यादा भार से दरारें पड़ रही हैं। बारिश में तो कीचड़ हो जाएगा,” सोलागीडिह के एक ग्रामीण रामू महतो ने कहा। उनके मुताबिक, बैरियर लगाने से भारी गाड़ियां रुकेंगी और सड़क बचेगी। गांव वालों ने मिलकर लकड़ी और पत्थर से अस्थाई बैरियर बनाया है। वे कहते हैं कि यह उनकी सड़क है, बाहर के लोग इसे खराब कर रहे हैं। बच्चे स्कूल जाते हैं, बुजुर्ग घूमते हैं, सड़क टूटेगी तो सबकी मुसीबत बढ़ेगी।

नदुआस्थान वालों की मजबूरी, सामान कैसे पहुंचे?

नदुआस्थान के मकान मालिकों की बात अलग है। यहां ज्यादातर लोग बाहर से आए हैं या पुराने प्लॉट पर नया घर बना रहे हैं। बैरियर की वजह से सामान लाना मुश्किल हो गया है।

“सीमेंट, रेत, ईंट सब ट्रक से आता है। बैरियर पर गाड़ी रुक जाती है, फिर मजदूरों से उतारकर सिर पर ढोना पड़ता है। दूर है, महंगा पड़ता है,” नदुआस्थान के रहने वाले संजय कुमार ने शिकायत की। उनके घर का काम रुका हुआ है। कई परिवारों ने प्लॉट खरीदा है, लेकिन अब सामान पहुंचाने में दिक्कत। महिलाएं और बच्चे भी परेशान हैं क्योंकि राशन-पानी की छोटी गाड़ियां भी कभी-कभी अटक जाती हैं।

लोगों का कहना है कि सड़क सार्वजनिक है, कोई बैरियर नहीं लगना चाहिए। वे बैरियर खुलवाने के लिए लगे हैं। कुछ ने स्थानीय नेता से बात की, कुछ पुलिस के पास जाने की सोच रहे हैं।

दोनों पक्षों की मुख्य दलीलें

सोलागीडिह निवासी

नई सड़क पर भारी वाहनों से दरारें पड़ रही हैं; बारिश में कीचड़ बन जाएगी। सड़क का उपयोग पैदल चलने, हल्की गाड़ियों और स्थानीय जरूरतों (स्कूल, बुजुर्गों के लिए) के लिए।”सड़क अभी नई है, ज्यादा भार से दरारें पड़ रही हैं… यह उनकी सड़क है, बाहर के लोग इसे खराब कर रहे हैं।

नदुआस्थान निवासी

निर्माण सामग्री (सीमेंट, ईंट, रेत) ट्रक से लाना जरूरी है, बैरियर से मजदूरों को सिर पर ढोना पड़ता है, जो महंगा और असुविधाजनक है, सड़क सार्वजनिक है और बैरियर अवैध। ग्रामीणों का कहना ये भी है कि कभी आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस का जाना भी मुश्किल होगा,बच्चों की स्कूल बस भी नहीं निकल सकती।

आगे की चुनौती, सड़क मजबूत हो या बैरियर हटे?

यह विवाद छोटा लगता है, लेकिन गांव के विकास से जुड़ा है। नदुआस्थान में घर बढ़ रहे हैं, तो सड़क पर बोझ बढ़ेगा। सोलागीडिह वाले सही कहते हैं कि सड़क टूटेगी तो सबको नुकसान। लेकिन नदुआस्थान वालों की भी मजबूरी है, बिना सामान के घर कैसे बनेगा?

स्थानीय लोग सुझाव दे रहे हैं कि सड़क को पक्का किया जाए, चौड़ा किया जाए। सरकार से मदद मांगी जाए। कुछ कहते हैं कि भारी गाड़ियों के लिए टाइम लिमिट हो, या वैकल्पिक रास्ता बने। लेकिन फिलहाल सब टल गया है।

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