Jharkhand Police Handcuff Parade: अपराधियों को सड़क पर हथकड़ी लगाकर घुमाया, रामगढ़ पुलिस की अनोखी सजा

Jharkhand Police Handcuff Parade: झारखंड में पुलिस का नया तरीका, रुसवाई का डर दिखाकर अपराध रोकने की कोशिश

Jharkhand Police Handcuff Parade: झारखंड के रामगढ़ जिले में पुलिस ने अपराधियों को सबक सिखाने का एक ऐसा तरीका अपनाया है, जो देखकर हर कोई हैरान रह गया। पुलिस ने कई आरोपियों को हाथ में हथकड़ी लगाकर शहर की सड़कों पर, चौक-चौराहों पर परेड करवाई। मतलब साफ है – अपराध करोगे तो सिर्फ जेल ही नहीं भुगतोगे, बल्कि पूरे मोहल्ले-गाँव के सामने बेइज्जती भी होगी। लोग देखेंगे, पहचानेंगे, उंगली उठाएंगे और यही डर अपराधियों के मन में घर कर जाए, यही पुलिस का मकसद है।

शुक्रवार को रामगढ़ जिले के रजरप्पा थाना क्षेत्र में यह अनोखा नजारा देखने को मिला। अलग-अलग मामलों में पकड़े गए दर्जन भर से ज्यादा आरोपी थे। कोई चोरी का था, कोई मारपीट का, कोई जुआ-सट्टा चलाने वाला, कोई शराब तस्करी करने वाला। सबको पुलिस की जीप में बिठाया नहीं गया, बल्कि हथकड़ी लगाकर लाइन से खड़ा किया गया और फिर सड़क पर चलने को कहा गया। आगे-आगे पुलिस की गाड़ी, पीछे-पीछे हथकड़ी लगे अपराधी और दोनों तरफ खड़े होकर तमाशा देखते लोग।

क्यों उठाया पुलिस ने यह कदम?/Jharkhand Police Handcuff Parade

रामगढ़ के एसपी अजय कुमार का साफ कहना है कि अपराधी जेल जाने से डरते कम हैं, क्योंकि जेल में तो दोस्त मिल जाते हैं, खाना-पीना फ्री मिलता है, कई बार तो रुतबा भी बढ़ जाता है। लेकिन समाज में इज्जत जाने का डर सबसे बड़ा होता है। गाँव में, मोहल्ले में लोग जब उंगली दिखाकर कहें – “देखो यही वो चोर है, यही वो गुंडा है”, तो अपराधी का मन टूट जाता है। उसकी बीवी-बच्चे, माँ-बाप, रिश्तेदार सबके सामने सिर झुक जाता है। पुलिस इसी रुसवाई के डर को हथियार बनाना चाहती है।

पुलिस का कहना है कि सिर्फ सजा देना काफी नहीं, अपराध की सोच को ही खत्म करना है। जब कोई नया लड़का अपराध करने की सोचेगा तो उसे याद आएगा कि भाई को, चचेरे भाई को या पड़ोसी को पुलिस ने किस तरह सड़क पर घुमाया था। लोग हंस रहे थे, फोटो खींच रहे थे, वीडियो बना रहे थे। सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। बस यही डर चाहिए।

लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

जहाँ कुछ लोग इस कदम की तारीफ कर रहे हैं कि “बहुत अच्छा किया, इन गुंडों को तो यही चाहिए”, वहीं कुछ लोग इसे गलत भी बता रहे हैं। उनका कहना है कि अभी तो ये लोग सिर्फ आरोपी हैं, कोर्ट ने सजा नहीं सुनाई है। फिर उन्हें इस तरह सार्वजनिक रूप से अपमानित करना क्या ठीक है? क्या यह कानूनी रूप से सही है? कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या पुलिस को यह अधिकार है कि वह खुद सजा देने लगे?

लेकिन ज्यादातर आम लोग, खासकर जो अपराध से परेशान हैं, वे पुलिस के साथ हैं। एक दुकानदार ने कहा, “हम लोग सालों से चोरी से परेशान थे। अब जब चोर को सबने हथकड़ी में देख लिया तो कोई हिम्मत नहीं करेगा।”

क्या यह तरीका नया है?

ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हुआ हो। पहले भी बिहार, उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में पुलिस ने ऐसा किया है। बिहार में तो कई एसपी ने शराब माफिया को हथकड़ी लगाकर गाँव-गाँव घुमाया था। वहाँ अपराध के ग्राफ में काफी गिरावट आई थी। झारखंड में भी कुछ साल पहले गोड्डा, दुमका जैसे जिलों में ऐसा हुआ था। अब रामगढ़ पुलिस ने फिर से इस पुराने तरीके को नया रंग दे दिया है।

निष्कर्ष

पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में जितने भी हार्डकोर अपराधी, आदतन बदमाश पकड़े जाएंगे, उन्हें भी इसी तरह सड़क पर घुमाया जाएगा। साथ ही उनके पोस्टर भी गाँव-गाँव में लगाए जाएंगे, जिस पर लिखा होगा – “यह अपराधी है, सावधान रहें”।

कई लोग कह रहे हैं कि यह तरीका भले ही विवादास्पद हो, लेकिन अगर अपराध कम होता है तो ठीक है। आखिर आम आदमी को शांति चाहिए, चाहे वह किसी भी तरीके से आए।

रामगढ़ पुलिस की यह मुहीम अभी चर्चा में है। देखना यह है कि क्या वाकई अपराधियों के मन में रुसवाई का डर बैठ पाता है या यह सिर्फ कुछ दिनों का शोर बनकर रह जाता है। लेकिन इतना तय है कि जिसने भी सड़क पर हथकड़ी लगे अपराधियों को चलते देखा, वह आज रात चैन की नींद सोएगा।

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