Jharkhand Scholarship Delay : झारखंड के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने मंगलवार को विभाग की बड़ी समीक्षा बैठक ली और छात्रवृत्ति योजना की। बैठक में जैसे ही प्री-मैट्रिक (कक्षा 1 से 10) और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के आंकड़े सामने आए, मंत्री जी का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया। खासकर बोकारो, चतरा और गिरिडीह जिले का प्रदर्शन देखकर उन्होंने अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाई और साफ-साफ चेतावनी दे दी – “वर्तमान शैक्षणिक सत्र खत्म होने से पहले हर पात्र बच्चे के खाते में छात्रवृत्ति पहुँच जानी चाहिए, चाहे जो हो जाए।”
तीन जिले सबसे फिसड्डी, बाकी भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं

मंत्री जी ने बैठक में जो आंकड़े देखे, उसमें वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्री-मैट्रिक (कक्षा 1-8), प्री-मैट्रिक (कक्षा 9-10) और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति का वितरण कई जिलों में बहुत धीमा चल रहा है। सबसे खराब स्थिति बोकारो, चतरा और गिरिडीह की है। यहाँ तो अभी तक 50-60 फीसदी से भी कम बच्चों को ही छात्रवृत्ति मिल पाई है। बाकी जिलों का हाल भी बहुत अच्छा नहीं है, लेकिन ये तीन जिले सबसे नीचे हैं।
चमरा लिंडा ने तुरंत इन तीनों जिलों के जिला कल्याण पदाधिकारियों से लिखित में कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दे दिया। उन्होंने कहा, “आप लोगों को तनख्वाह बच्चों की पढ़ाई के लिए मिलती है, न कि कुर्सी गर्म करने के लिए। अगर एक भी बच्चा छात्रवृत्ति से वंचित रह गया तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा नहीं।”
डीसी को भी लगी लताड़, हर महीने बैठक अनिवार्य
मंत्री जी ने सिर्फ कल्याण विभाग के अफसरों को ही नहीं, सभी जिलों के उपायुक्तों (डीसी) को भी सख्त हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि हर जिले में जिला स्तरीय छात्रवृत्ति स्वीकृति समिति की बैठक हर महीने जरूर होनी चाहिए। इस समिति में डीसी खुद अध्यक्ष होते हैं। कई जिलों में महीनों से बैठक ही नहीं हुई है, जिसकी वजह से हजारों आवेदन लंबित पड़े हैं।
मंत्री ने कहा, “उपायुक्त महोदय सबसे बड़े अधिकारी हैं जिले के। अगर वे बैठक नहीं बुला रहे तो नीचे वाले अफसर भला क्या करेंगे? अब से हर महीने बैठक होगी और लंबित आवेदनों को तुरंत निपटाया जाएगा।”
गरीब बच्चों का हक है छात्रवृत्ति, इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं
चमरा लिंडा ने बैठक में भावुक होते हुए कहा, “ये छात्रवृत्ति किसी की दान या एहसान नहीं है। ये उन गरीब आदिवासी, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक बच्चों का हक है जिनके माँ-बाप दिन-रात मेहनत करके उन्हें पढ़ाना चाहते हैं। अगर समय पर पैसा नहीं पहुँचा तो कई बच्चे स्कूल छोड़ देंगे। हम ऐसा होने नहीं देंगे।”
उन्होंने अफसरों से कहा कि अब कोई बहाना नहीं चलेगा – न सर्वर की समस्या, न बैंक की समस्या, न आधार सीडिंग की समस्या। हर समस्या का समाधान ढूँढकर 100 फीसदी वितरण करना है।
अब क्या-क्या कड़े कदम उठाए गए?
- बोकारो, चतरा, गिरिडीह के जिला कल्याण अधिकारियों से 3 दिन में लिखित स्पष्टीकरण।
- सभी 24 जिलों के डीसी को पत्र – हर महीने जिला स्तरीय समिति की बैठक अनिवार्य।
- लंबित आवेदनों को 31 मार्च 2026 से पहले हर हाल में निपटाने का टारगेट।
- हर हफ्ते विभाग को जिलेवार रिपोर्ट भेजने का आदेश।
- खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी।
बच्चे और अभिभावक काफी खुश, उम्मीद जगी
इस सख्त रुख से हजारों छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों में खुशी की लहर है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर मंत्री जी को धन्यवाद कहा है। एक अभिभावक ने लिखा कि पहली बार किसी मंत्री ने ऐसा किया है। उम्मीद है इस बार हमारे बच्चों को समय पर पैसा मिलेगा।
संक्षेप में कहें तो चमरा लिंडा ने साफ कर दिया है कि उनके विभाग में अब लापरवाही नहीं चलेगी। अब देखना यह है कि अफसर कितनी जल्दी अपनी गति पकड़ते हैं और गरीब बच्चों के खाते में उनका हक का पैसा पहुँचता है या नहीं।










