Khaira Outsourcing Company Water Tanker Fire DGMS Violations: खैरा में आउटसोर्सिंग कंपनी का पानी टैंकर जलकर राख, DGMS नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही

Khaira Outsourcing Company Water Tanker Fire DGMS Violations: कोलियरी के खैरा इलाके में एक बड़ा हादसा हो गया। यहां चल रही आउटसोर्सिंग कंपनी का पानी का टैंकर अचानक आग लगने से पूरी तरह जलकर राख हो गया। यह घटना उस समय हुई जब टैंकर चालक दोपहर साढ़े बारह बजे के करीब टैंकर लेकर ओवरबर्डन (ओबी) में लगी आग पर पानी छिड़कने गया था। ओबी करीब 200 फीट ऊंचाई पर था। तभी टैंकर के आगे के पहिए में आग लग गई और देखते-देखते पूरी गाड़ी जलने लगी।

सूचना मिलते ही कंपनी के अन्य कर्मचारी दूसरा टैंकर लेकर बचाव के लिए पहुंचे, लेकिन तब तक पहला टैंकर पूरी तरह खाक हो चुका था। अच्छी बात यह रही कि टैंकर चालक किसी तरह सुरक्षित बाहर निकल आया और उसकी जान बच गई। लेकिन इस हादसे ने कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

आउटसोर्सिंग कंपनी पर लापरवाही के आरोप/Khaira Outsourcing Company Water Tanker Fire DGMS Violations

पिछले कुछ महीनों से खैरा में आउटसोर्सिंग कंपनी ओबी हटाकर कोयला निकालने का काम दिन-रात चला रही है। कंपनी अपने कर्मचारियों से ज्यादा से ज्यादा काम करवाने की होड़ में लगी है, लेकिन सुरक्षा के नियमों की पूरी तरह अनदेखी कर रही है। सूत्रों का कहना है कि यहां DGMS (डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ माइंस सेफ्टी) के नियमों का कोई पालन नहीं हो रहा। DGMS खदानों में सुरक्षा के लिए सख्त नियम बनाता है, जैसे वाहनों का रखरखाव, नंबर प्लेट लगाना, फिटनेस सर्टिफिकेट और आग बुझाने के इंतजाम। लेकिन यहां सबकी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

इस घटना में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जलने वाला पानी टैंकर बिना नंबर प्लेट का था। आखिर बिना रजिस्ट्रेशन के टैंकर कैसे खदान में काम कर रहा था? क्या यह कंपनी की देखरेख में चल रहा था? अगर नंबर प्लेट थी तो आग लगने पर वह भी जलकर गायब हो गई? ये सवाल कंपनी की पोल खोल रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि आउटसोर्सिंग कंपनी कोई खेल तो नहीं खेल रही, जहां सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।

DGMS नियम क्यों महत्वपूर्ण हैं

DGMS भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के अधीन काम करता है और कोयला खदानों सहित सभी माइंस में मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियम बनाता है। इन नियमों में वाहनों की नियमित जांच, आग से बचाव के उपकरण, ड्राइवर की ट्रेनिंग और खदान में इस्तेमाल होने वाले हर वाहन का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। लेकिन आउटसोर्सिंग कंपनियां अक्सर ज्यादा मुनाफे के चक्कर में इन नियमों को तोड़ती हैं। BCCL जैसी बड़ी कंपनी के प्रोजेक्ट में आउटसोर्सिंग को दिया जाता है, लेकिन जिम्मेदारी दोनों की होती है। ऐसे हादसे बताते हैं कि नियमों का पालन नहीं हो रहा।

खदानों में आग लगना आम है क्योंकि कोयला खुद गर्म होकर जल सकता है, लेकिन पानी टैंकर जैसे वाहन का जलना लापरवाही दिखाता है। हो सकता है कि टैंकर पुराना था, वायरिंग खराब थी या ब्रेक में समस्या थी। लेकिन बिना जांच के कुछ कहना मुश्किल है।

ऐसे हादसे क्यों हो रहे हैं बार-बार

झारखंड की कोयला खदानों में आउटसोर्सिंग का चलन बढ़ गया है। कंपनियां ज्यादा कोयला निकालने के लिए निजी ठेकेदारों को काम देती हैं। ठेकेदार कम खर्च में ज्यादा काम करवाते हैं, जिससे सुरक्षा पर ध्यान नहीं जाता। मजदूरों की जान खतरे में रहती है। हाल के सालों में BCCL एरिया में कई हादसे हो चुके हैं – कभी ओबी धंसने से मौतें, कभी ब्लास्टिंग से घरों को नुकसान, कभी गैस लीक। लेकिन सबक नहीं लिया जाता।

लोगों का कहना है कि अगर DGMS सख्ती से जांच करे और नियम तोड़ने पर जुर्माना या लाइसेंस रद्द करे, तो ऐसे हादसे रुक सकते हैं। BCCL को भी आउटसोर्सिंग कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए। आखिर मजदूरों की जान और पर्यावरण दोनों दांव पर हैं।

आगे क्या होना चाहिए

इस घटना की गहराई से जांच होनी चाहिए। टैंकर क्यों जला, उसकी वजह क्या थी? कंपनी ने DGMS नियम क्यों नहीं माने? बिना नंबर के वाहन कैसे चल रहे थे? ये सारे सवालों के जवाब मिलने चाहिए। अगर लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो। साथ ही सभी आउटसोर्सिंग कंपनियों की सुरक्षा ऑडिट कराई जाए।

खदानों में काम करने वाले मजदूर देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा सबसे ऊपर होनी चाहिए। ऐसे हादसे न सिर्फ परिवारों को तोड़ते हैं, बल्कि पूरे इलाके में डर पैदा करते हैं। उम्मीद है कि यह घटना आंख खोलने वाली साबित होगी और सुरक्षा के नियमों का सख्ती से पालन होगा। नहीं तो ऐसे सवाल हमेशा लाजवाब बने रहेंगे।

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