Lalu Yadav Tej Pratap Reunion: जिस बेटे को निकाला था, उसी के घर आज लालू यादव! तेज प्रताप लीन होकर पिता की सेवा करते दिखे

Lalu Yadav Tej Pratap Reunion: मकर संक्रांति पर भावुक मिलन, लालू यादव पहुंचे तेज प्रताप के घर,पिता-बेटे साथ नजर आए

Lalu Yadav Tej Pratap Reunion: बिहार की राजनीति में आज एक ऐसी खबर आई है जो दिल को छू गई। जो बेटा 7-8 महीने पहले परिवार और पार्टी से निकाला गया था, उसी के घर आज पिता लालू प्रसाद यादव पहुंचे। बात हो रही है तेज प्रताप यादव की, जो RJD के बड़े नेता लालू यादव के बड़े बेटे हैं। मकर संक्रांति के मौके पर तेज प्रताप ने अपने घर पर दही-चूड़ा का भोज रखा था, और इसमें शामिल होने लालू यादव खुद पहुंच गए। तेज प्रताप को पिता की सेवा करते देखा गया, जो काफी भावुक लग रहा था।

ये घटना इसलिए खास है क्योंकि मई 2025 में एक विवाद के बाद लालू जी ने तेज प्रताप को RJD से 6 साल के लिए निकाल दिया था और परिवार से भी अलग कर दिया था। वजह थी तेज प्रताप का सोशल मीडिया पर एक महिला (अनुष्का यादव) के साथ रिलेशनशिप का पोस्ट, जिससे परिवार की इज्जत पर सवाल उठे थे। लालू जी ने उन्हें “संस्कारहीन” तक कह दिया था। उसके बाद तेज प्रताप ने अपनी अलग पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ बना ली और राजनीति में अलग रास्ता अपनाया।

7-8 महीने बाद पहली बार परिवार से जुड़ाव/Lalu Yadav Tej Pratap Reunion

तेज प्रताप के निकाले जाने के बाद ये पहली बार था जब परिवार में कोई बड़ा मिलन हुआ। जनवरी 2026 की शुरुआत में 1 तारीख को राबड़ी देवी के जन्मदिन पर तेज प्रताप राबड़ी आवास पहुंचे थे, लेकिन वो छोटी मुलाकात थी। फिर 13 जनवरी को मकर संक्रांति से एक दिन पहले तेज प्रताप ने राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड वाले घर जाकर पिता लालू, मां राबड़ी और छोटे भाई तेजस्वी को दही-चूड़ा भोज का न्योता दिया। उन्होंने तेजस्वी को गले लगाया और भतीजी कात्यायनी को गोद में लेकर खिलाया – ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं।

14 जनवरी को तेज प्रताप के घर पर भोज हुआ। लालू यादव पहुंचे और वहां काफी देर रुके। मीडिया से बात करते हुए लालू जी ने कहा, “मैं अपने बेटे से नाराज नहीं हूं। वो परिवार के साथ ही रहे।” जब तेज प्रताप के NDA में जाने की अफवाहों पर सवाल हुआ तो लालू जी ने कहा, “बेटे को हमेशा आशीर्वाद रहेगा।” ये शब्द सुनकर लग रहा था कि पुरानी नाराजगी अब कम हो रही है।

तेज प्रताप ने भी पिता की सेवा में हाथ बंटाए – उन्हें बैठने में मदद की, खाने में साथ दिया। ये देखकर कई लोगों ने कहा कि परिवार में अब सब ठीक हो रहा है। हालांकि राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव इस भोज में नहीं दिखे, जिससे कुछ सवाल उठे। लेकिन लालू जी का जाना ही बड़ा संदेश था।

राजनीतिक मायने क्या हैं?

ये सिर्फ परिवार की बात नहीं, राजनीति में भी इसका असर दिख रहा है। तेज प्रताप हाल ही में NDA नेताओं से मिले थे – डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के यहां दही-चूड़ा खाया, नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी से बात की। कई लोग कह रहे थे कि वो NDA में जा सकते हैं। लेकिन परिवार से मिलन के बाद ये अफवाहें थम गईं। कुछ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि लालू जी का तेज प्रताप के घर जाना RJD में एकता का मैसेज है, खासकर जब पार्टी को चुनौतियां मिल रही हैं।

तेज प्रताप की पार्टी ने पिछले चुनाव में कोई सीट नहीं जीती, लेकिन उनका नाम अभी भी बिहार में चर्चा में है। परिवार का साथ मिलना उन्हें नई ताकत दे सकता है। वहीं लालू परिवार के लिए भी ये अच्छा संकेत है – बेटे-बाप की नाराजगी खत्म हो रही है, जो बिहार की जनता को अच्छा लगता है।

निष्कर्ष

अभी सब कुछ साफ नहीं है। क्या तेज प्रताप वापस RJD में आएंगे? या परिवार अलग रहेगा लेकिन रिश्ते सुधरेंगे? ये समय बताएगा। लेकिन आज की ये तस्वीर – पिता बेटे के घर पहुंचे, बेटा पिता की सेवा में लीन – काफी इमोशनल है। बिहार में राजनीति परिवार से जुड़ी होती है, और जब परिवार जुड़ता है तो राजनीति भी मजबूत होती है।

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