Gas Cylinder Crisis : राजधानी लखनऊ (Lucknow) में कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति रुकने से खानपान कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो गया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि शहर की करीब 80 प्रतिशत खानपान की दुकानें बंद पड़ी हैं। छोटे होटल, ढाबे, चाय-नाश्ते की दुकानें और रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदार गैस न मिलने के कारण काम नहीं कर पा रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि अगर जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो आने वाले दिनों में पूरी तरह कारोबार बंद होने की नौबत आ सकती है।
चौक से गोमतीनगर तक दिखा बंदी का असर

गैस संकट का असर शहर के प्रमुख बाजारों में साफ दिखाई दिया। चौक के पारंपरिक बाजार से लेकर हजरतगंज और गोमतीनगर के फूड कोर्ट तक कई दुकानों के शटर गिरे रहे। आमतौर पर भीड़भाड़ से भरा रहने वाला चौक चौराहा मंगलवार को काफी शांत नजर आया। यहां कई होटल और रेस्टोरेंट लगातार बंद मिले, जबकि सड़क किनारे लगने वाली खानपान की रेहड़ियां भी नहीं दिखीं।
घरेलू गैस से काम चलाने की कोशिश
कुछ दुकानदारों ने मजबूरी में घरेलू गैस सिलिंडर से काम चलाने की कोशिश की। हालांकि इससे घरेलू गैस की मांग अचानक बढ़ गई है और कई जगहों पर सिलिंडर के लिए मारामारी जैसी स्थिति बन गई। दुकानदारों का कहना है कि कॉमर्शियल सिलिंडर के बिना लंबे समय तक कारोबार चलाना संभव नहीं है।
हजारों व्यापारियों की रोजी पर संकट
गैस की किल्लत का असर केवल दुकानों तक सीमित नहीं है बल्कि हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर भी खतरा मंडराने लगा है। अनुमान के मुताबिक शहर में करीब 1000 से अधिक छोटे-बड़े होटल, लगभग 5000 रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकानें और 50 हजार से ज्यादा रेहड़ी-पटरी वाले इस कारोबार से जुड़े हैं। अगर गैस संकट जारी रहा तो इन सभी के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
बाहर से आने वाले लोगों को भी हो रही परेशानी
होटल और रेस्टोरेंट बंद होने का असर शहर में बाहर से आने वाले लोगों पर भी पड़ रहा है। खासतौर पर मेडिकल कॉलेज, हॉस्टल और ऑफिस क्षेत्रों में भोजन की व्यवस्था प्रभावित हो गई है। कई जगह छात्र, मरीजों के तीमारदार और बाहर से आए लोग खाने की तलाश में भटकते दिखाई दिए।
कारोबारियों ने जताई पूरी बंदी की आशंका
कुछ रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि गैस आपूर्ति नहीं सुधरी तो बुधवार तक अधिकांश खानपान प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद हो सकते हैं। बड़े होटल फिलहाल अपने पास मौजूद सीमित स्टॉक के सहारे काम चला रहे हैं, लेकिन छोटे कारोबारियों के लिए यह स्थिति ज्यादा मुश्किल बन गई है।










