Mann Ki Baat: PM Modi ने स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित गणेश प्रतिमाएं खरीदने की अपील की

Mann Ki Baat: PM Narendra Modi ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम Mann Ki Baat के 135वें एपिसोड में देशवासियों से आगामी गणेश उत्सव के दौरान स्थानीय कारीगरों और भारतीय कुम्हारों द्वारा निर्मित मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि गणपति बप्पा की प्रतिमा देश की मिट्टी से बनी होनी चाहिए और इसे हमारे स्थानीय कलाकारों के हाथों से तैयार किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि गणेश प्रतिमा निर्माण का कार्य त्योहार से काफी पहले शुरू हो जाता है और इससे जुड़े हजारों कारीगर एवं परिवार महीनों पहले से अपनी तैयारियों में जुट जाते हैं। उन्होंने कहा कि देशवासियों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि उनके घरों, सोसायटी और सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित होने वाली गणेश प्रतिमाएं स्थानीय कलाकारों और कुम्हारों द्वारा बनाई गई हों।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराओं और स्थानीय कला को संरक्षित करने के लिए आम नागरिकों की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे “वोकल फॉर लोकल” की भावना को आगे बढ़ाएं और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें।

स्थानीय कारीगरों को मिलेगा प्रोत्साहन

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की इस अपील से देशभर के लाखों कुम्हारों और मूर्तिकारों को आर्थिक मजबूती मिलेगी। हर वर्ष गणेश उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाओं की खरीदारी होती है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिलता है। पिछले कुछ वर्षों में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी से बनी पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाओं की मांग भी लगातार बढ़ी है। इससे न केवल प्रदूषण कम होता है, बल्कि पारंपरिक कला और शिल्प को भी संरक्षण मिलता है।

गणेश उत्सव और भारतीय संस्कृति का संबंध

भारत में गणेश उत्सव केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में गणपति बप्पा की स्थापना की जाती है और लाखों लोग इसमें भाग लेते हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के माध्यम से लोगों को भारतीय परंपराओं, स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि देश के कुम्हारों और स्थानीय कलाकारों के परिश्रम का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। यदि लोग स्थानीय स्तर पर निर्मित प्रतिमाओं को अपनाते हैं, तो इससे आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।

स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर

प्रधानमंत्री की यह अपील ऐसे समय में आई है, जब देश में स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गणेश उत्सव के दौरान स्थानीय कलाकारों को समर्थन देने से ग्रामीण और छोटे स्तर के उद्योगों को नई ऊर्जा मिल सकती है।

आगामी गणेश उत्सव को देखते हुए प्रधानमंत्री का यह संदेश देशभर के श्रद्धालुओं, कारीगरों और सामाजिक संगठनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं को भी नई पहचान मिलेगी।

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