Marburg virus outbreak in Ethiopia : इथियोपिया, अफ्रीका महाद्वीप के पूर्वी हिस्से में स्थित यह देश, अब एक घातक वायरस के प्रकोप का सामना कर रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दक्षिणी इथियोपिया के जिंका शहर में मारबर्ग वायरस डिजीज का पहला मामला सामने आया है। 14 नवंबर 2025 को घोषित इस प्रकोप में कुल 9 लोग संक्रमित पाए गए हैं, जिनमें स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं। यह वायरस एबोला की तरह ही खतरनाक है और बिना किसी वैक्सीन या विशेष इलाज के फैलने का खतरा बना हुआ है। WHO ने तत्काल हाई अलर्ट जारी कर दिया है, जबकि इथियोपिया सरकार और अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) तेजी से प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इस प्रकोप ने न केवल स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था को चुनौती दी है, बल्कि पड़ोसी दक्षिण सूडान जैसे कमजोर स्वास्थ्य प्रणाली वाले देशों के लिए भी चिंता बढ़ा दी है।
मारबर्ग वायरस, जो फिलोविरिडे परिवार से संबंधित है, फल खाने वाली चमगादड़ों से फैलता है। यह मानवों में बुखार, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, दस्त और गंभीर रक्तस्राव का कारण बनता है। मृत्यु दर 24% से 88% तक हो सकती है, जो प्रकोप के पैमाने पर निर्भर करती है। इथियोपिया में यह पहला प्रकोप है, लेकिन पूर्वी अफ्रीका में पहले भी ऐसे मामले देखे गए हैं। WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने सोशल मीडिया पर कहा, “इथियोपिया की त्वरित कार्रवाई इस प्रकोप को जल्दी नियंत्रित करने की गंभीरता को दर्शाती है।”

कितना खतरनाक है ये वायरस और क्या हैं इसके लक्षण
मारबर्ग वायरस को 1967 में पहली बार यूरोप में इथियोपिया से आयातित बंदरों के माध्यम से खोजा गया था। यह एक फिलामेंटस (धागे जैसी संरचना वाला) वायरस है, जो Rousettus aegypti प्रजाति की चमगादड़ों को प्राकृतिक होस्ट मानता है। संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों (रक्त, पसीना, उल्टी) के संपर्क से फैलता है। दूषित सतहों, जैसे बिस्तर या चादरें, भी इसके वाहक हो सकती हैं। प्रारंभिक लक्षण इन्फ्लूएंजा जैसे होते हैं – सिरदर्द, थकान और बुखार – लेकिन जल्द ही यह गंभीर हो जाता है, जिससे आंतरिक रक्तस्राव और अंग विफलता हो सकती है।
वर्तमान प्रकोप में पाए गए वायरस का स्ट्रेन पूर्वी अफ्रीकी देशों में पहले देखे गए स्ट्रेन से मेल खाता है। WHO के अनुसार, कोई लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन या थेरेपी उपलब्ध नहीं है, हालांकि कुछ क्लिनिकल ट्रायल्स चल रहे हैं। इलाज मुख्य रूप से सहायक होता है – ओरल या इंट्रावेनस फ्लूइड्स से डिहाइड्रेशन रोकना और लक्षणों का प्रबंधन। जिंका शहर में संक्रमितों को अलग-थलग रखा गया है, और उनके संपर्क में आए लोगों की ट्रेसिंग चल रही है। स्वास्थ्यकर्मियों का संक्रमित होना चिंताजनक है, क्योंकि वे सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं। Africa CDC के निदेशक जीन कासेया ने चेतावनी दी, “दक्षिण सूडान की कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण यह प्रकोप क्षेत्रीय खतरा बन सकता है।”
जिंका शहर में कैसे फैला ये वायरस?
दक्षिणी इथियोपिया का ओमो क्षेत्र, जो दक्षिण सूडान से सटा हुआ है, इस प्रकोप का केंद्र है। जिंका शहर में वायरल हेमोरेजिक फीवर के संदिग्ध मामलों की जांच के लिए सैंपल्स लैब में भेजे गए थे। 14 नवंबर को WHO ने पुष्टि की कि ये मारबर्ग वायरस से संक्रमित थे। कुल 9 मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें से कुछ स्वास्थ्यकर्मी हैं जो संदिग्ध मरीजों का इलाज कर रहे थे। प्रारंभिक जांच से पता चला कि संक्रमण चमगादड़ों से मानव संपर्क के माध्यम से शुरू हुआ हो सकता है, हालांकि सटीक स्रोत की तलाश जारी है।
इथियोपिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने तुरंत कम्युनिटी-वाइड स्क्रीनिंग शुरू की है। संक्रमितों को विशेष आइसोलेशन यूनिट्स में रखा गया है, जहां सहायक उपचार दिया जा रहा है। संपर्क ट्रेसिंग में सैकड़ों लोगों की जांच हो रही है। सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसमें लोगों को हाथ धोने, मास्क पहनने और संदिग्ध संपर्क से बचने की सलाह दी जा रही है। WHO ने विशेषज्ञों की टीम भेजी है, जिसमें वायरल हेमोरेजिक फीवर के विशेषज्ञ शामिल हैं। मेडिकल सप्लाईज और उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं। अभी तक मृत्यु की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थिति गंभीर बनी हुई है।
WHO की विशेष टीम तैनात, हाई अलर्ट मोड
WHO ने इस प्रकोप को हाई अलर्ट पर रखा है, क्योंकि मारबर्ग वायरस तेजी से फैल सकता है। संगठन ने इथियोपिया सरकार को समर्थन देने के लिए तुरंत कार्रवाई की। “यह प्रकोप अफ्रीका में एक नया खतरा है, लेकिन त्वरित प्रतिक्रिया से इसे रोका जा सकता है,” WHO के अफ्रीकी क्षेत्रीय कार्यालय ने कहा। Africa CDC ने भी सहयोग की पेशकश की है। टेड्रोस ने अपनी पोस्ट में इथियोपिया की त्वरित जांच की सराहना की, जो प्रकोप की पुष्टि में केवल कुछ दिनों में हो गई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, संयुक्त राष्ट्र और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियां निगरानी बढ़ा रही हैं। पड़ोसी देशों को अलर्ट किया गया है, खासकर दक्षिण सूडान को, जहां संघर्ष के कारण स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं। कोई अन्य अफ्रीकी देश में हाल के हफ्तों में मारबर्ग के मामले नहीं रिपोर्ट हुए हैं, जो सकारात्मक है। हालांकि, वैश्विक यात्रा के कारण वायरस के प्रसार का जोखिम बना हुआ है। WHO ने यात्रा प्रतिबंध की सिफारिश नहीं की, लेकिन सतर्कता बरतने को कहा है।
रोकथाम के उपाय,क्या करें आम लोग?
मारबर्ग वायरस को रोकने के लिए सख्त उपाय जरूरी हैं। इथियोपिया सरकार ने स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर सैनिटाइजेशन अभियान चलाया है। स्वास्थ्यकर्मियों को PPE (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) उपलब्ध कराए गए हैं। आम लोगों के लिए सलाह है: संदिग्ध जानवरों से दूरी बनाएं, बीमार व्यक्ति के संपर्क से बचें, नियमित हाथ धोएं और लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। भविष्य में वैक्सीन विकास पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन फिलहाल रोकथाम ही एकमात्र हथियार है।
निष्कर्ष
इथियोपिया का यह पहला मारबर्ग प्रकोप न केवल स्थानीय बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए चेतावनी है। 9 संक्रमितों के साथ शुरू हुआ यह प्रकोप, यदि नियंत्रित नहीं हुआ, तो बड़े पैमाने पर फैल सकता है। लेकिन इथियोपिया की त्वरित प्रतिक्रिया और WHO की मदद से आशा है कि इसे जल्दी रोका जाएगा। महामारी के दौर में यह याद दिलाता है कि सतर्कता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही महामारियों से लड़ने का रास्ता है। दुनिया की नजरें अब दक्षिणी इथियोपिया पर टिकी हैं – क्या यह प्रकोप एक छोटी घटना रहेगा या बड़ा संकट बनेगा? समय ही बताएगा, लेकिन प्रयास जारी हैं।










