Nirmala Sitharaman Budget 2026 Expectations: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को संसद में यूनियन बजट 2026-27 पेश करने वाली हैं। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा। देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, लेकिन लोगों की उम्मीदें भी बहुत ज्यादा हैं। पिछले बजट में स्वास्थ्य और शिक्षा पर अच्छा खर्च बढ़ाया गया था, लेकिन अब और ज्यादा निवेश की मांग हो रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोग और एक्सपर्ट्स वित्त मंत्री से बड़ी-बड़ी उम्मीदें लगा रहे हैं। आइए, सरल भाषा में समझते हैं कि अलग-अलग क्षेत्रों से क्या-क्या मांगें उठ रही हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी उम्मीदें/Nirmala Sitharaman Budget 2026 Expectations
स्वास्थ्य क्षेत्र में सबसे ज्यादा जोर इस बात पर है कि लोगों की जेब से होने वाला खर्च (आउट-ऑफ-पॉकेट एक्सपेंस) कम हो। अभी भी भारत में स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च जीडीपी का सिर्फ 1.15% के आसपास है, जबकि नेशनल हेल्थ पॉलिसी में 2025 तक 2.5% करने का लक्ष्य था।

जन स्वास्थ्य अभियान जैसी संस्थाएं मांग कर रही हैं कि यूनियन हेल्थ बजट को दोगुना किया जाए। डॉ. पी.आर. सोदानी जैसे एक्सपर्ट्स कहते हैं कि हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, डॉक्टरों-नर्सों की संख्या बढ़ाने, डिजिटल हेल्थ और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर ज्यादा पैसा लगाना चाहिए। ग्रामीण इलाकों में अस्पतालों और प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स को अपग्रेड करने की जरूरत है।
पिछले बजट 2025-26 में स्वास्थ्य मंत्रालय को करीब 99,858 करोड़ रुपये मिले थे, जो पहले से 9.8% ज्यादा था। अब उम्मीद है कि इस बार और बढ़ोतरी हो, ताकि आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं और मजबूत हों। दवाइयों और मेडिकल उपकरणों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए भी स्पेशल फंड की मांग है।
शिक्षा क्षेत्र को कौशल और गुणवत्ता पर फोकस
शिक्षा में भी बजट से बहुत उम्मीदें हैं। पंकज प्रिया जैसे एक्सपर्ट्स कहते हैं कि सिर्फ डिग्री देने से काम नहीं चलेगा, बच्चों को स्किल्स सिखानी होंगी। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 की अपेक्षा साल 2025 तक 50% विद्यार्थियों को स्किल-बेस्ड शिक्षा मिलनी चाहिए।
उच्च शिक्षा को इंडस्ट्री 4.0, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग से जोड़ने की जरूरत है। पिछले बजट में शिक्षा को 1,28,650 करोड़ रुपये मिले थे, जिसमें स्कूल एजुकेशन के लिए 78,572 करोड़ और हायर एजुकेशन के लिए 50,078 करोड़ थे। AI रिसर्च के लिए 500 करोड़ अलग से दिए गए थे।
अब मांग है कि शिक्षा को किफायती बनाया जाए, GST को कम किया जाए, और आउटकम-बेस्ड फंडिंग हो यानी पैसा असर दिखाने पर दिया जाए। युवाओं को नौकरी के लिए तैयार करने और इनोवेशन बढ़ाने पर फोकस चाहिए। कॉलेजों की संख्या बढ़ी है और GER (ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो) 28.4% तक पहुंच गया है, लेकिन अब क्वालिटी और रिसर्च पर ध्यान देना होगा।
कृषि और ग्रामीण विकास की अपेक्षाएं
किसान देश की रीढ़ हैं, इसलिए बजट में कृषि पर खास ध्यान रहेगा। उम्मीद है कि कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण, क्लाइमेट रेसिलिएंट खेती और पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट पर ज्यादा फंड आए।
रूरल प्रॉस्पेरिटी प्रोग्राम चलाने की बात हो रही है, जिसमें ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और छोटे किसानों को स्किलिंग, टेक्नोलॉजी और निवेश से मदद मिले। किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन को और मजबूत करने की मांग है। पिछले बजट में कृषि को बूस्ट देने वाली कई योजनाएं थीं, अब उम्मीद है कि और बड़े ऐलान हों।
इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य क्षेत्र
इंफ्रास्ट्रक्चर पर कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) पिछले सालों की तरह 11-12 लाख करोड़ रुपये के आसपास रहने की उम्मीद है। रोड, रेलवे, एयरपोर्ट, अर्बन डेवलपमेंट और ग्रीन एनर्जी पर फोकस रहेगा। NIP 2.0 जैसी नई पाइपलाइन लॉन्च होने की बात है।
एमएसएमई सेक्टर को आसान लोन, टैक्स राहत और रेगुलेटरी सपोर्ट चाहिए। टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स स्लैब में राहत, स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने और होम लोन पर ज्यादा छूट चाहते हैं।
निष्कर्ष
यह बजट विकास को तेज करने, गरीबों युवाओं, महिलाओं,किसानों को मजबूत बनाने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर ले जाने वाला होना चाहिए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से उम्मीद है कि वे इन सभी क्षेत्रों में बैलेंस बनाकर ऐलान करेंगी। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बेसिक सेक्टरों में निवेश बढ़ेगा, तो देश की नींव और मजबूत होगी।










