रायबरेली एनटीपीसी ( NTPC) ऊंचाहार थर्मल पावर प्लांट में वर्षों से ठेकेदार कंपनियों द्वारा मजदूरों को डरा-धमकाकर उनकी मासिक मजदूरी का आधा हिस्सा जबरन वसूलने का गंभीर आरोप लगाया गया है। जिसको लेकर आज दिनांक 29 मार्च 2026 दिन रविवार को समय करीब 1:00 बजे कलेक्ट्रेट स्थित परिसर में प्रेस वार्ता करते हुए ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) के प्रदेश अध्यक्ष विजय विद्रोही ने आज पत्रकार वार्ता में यह दावा करते हुए कहा कि यह अवैध वसूली एनटीपीसी प्रबंधन और ठेकेदारों के गठजोड़ से दशकों से चल रही है। उन्होंने इसे गंभीर अपराधिक कृत्य करार दिया।
विद्रोही ने कहा कि प्लांट में कार्यरत हजारों संविदा मजदूर इस लूट के शिकार हैं। ठेकेदार कंपनियां और एजेंसियां मजदूरों को धमकाकर आधी मजदूरी वापस ले लेती हैं, जो श्रम कानूनों का Flagrante उल्लंघन है। संगठन पिछले कई वर्षों से एनटीपीसी प्रबंधन, स्थानीय प्रशासन और जिला प्रशासन से इस अवैध प्रथा को रोकने की मांग कर रहा है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उल्टे, विरोध करने वाले नेताओं और सदस्यों पर दमनात्मक रवैया अपनाया जा रहा है।

पिछले विरोध पर धमकी और मुकदमा
विद्रोही ने याद दिलाया कि पिछले वर्ष इसी वसूली के विरोध में संगठन के प्रमुख नेता पवन मिश्रा को एक ठेकेदार ने मोबाइल फोन पर जान से मारने की धमकी दी थी और अश्लील गाली-गलौज की थी। इस मामले में अपराधिक मुकदमा भी दर्ज हुआ था। फिर भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
हालिया घटनाक्रम और प्रबंधन का रुख
संगठन द्वारा आंदोलन का नोटिस जारी करने के बाद प्रबंधन ने 15 मार्च को वार्ता बुलाई। इसमें सहमति बनी कि सभी कार्यरत कंपनियों और ठेकेदारों से शपथ-पत्र लिया जाएगा, वसूली पर सख्त रोक लगाई जाएगी, शिकायत के लिए हेल्पलाइन जारी की जाएगी और वसूली करने वालों को काली सूची में डाला जाएगा। साथ ही सभी मजदूरों की निरंतर सेवाएं सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया गया।
लेकिन अगले ही दिन प्रबंधन ने अपना “असली रंग” दिखा दिया। पवन मिश्रा सहित कुछ अन्य नेताओं और श्रमिकों को सेवा से पृथक कर दिया गया या उनके स्थानांतरण के आदेश जारी किए गए। पवन मिश्रा को उनके मूल सेवा स्थल से हटाकर प्लांट से करीब 4 किलोमीटर दूर एक दूरस्थ जगह पर तैनात करने का आदेश दिया गया।
विद्रोही ने सवाल उठाया, “प्रबंधन पवन मिश्रा को प्लांट से दूर क्यों रखना चाहता है? इसका एक ही कारण है—मजदूरों से वसूली अबाध रूप से जारी रखना और विरोध की मुख्य आवाज को दबाना।” उन्होंने आरोप लगाया कि यह मजदूरों को आतंकित करने और संगठन के नेतृत्व को खामोश करने की साजिश है।
ऐक्टू की मांगें और आंदोलन कार्यक्रम
विजय विद्रोही ने जोर देकर कहा कि ऐक्टू निम्नलिखित मांगों पर अडिग है:
- पवन मिश्रा और अन्य प्रभावित मजदूरों को तत्काल गेट पास जारी कर सेवा में बहाल किया जाए।
- एनटीपीसी ऊंचाहार में मजदूरों से जबरन आधी मजदूरी छीनने की आपराधिक प्रथा को तुरंत रोका जाए।
- इसमें संलग्न कंपनियों, एजेंसियों और ठेकेदारों को काली सूची में डालकर उनके कार्यादेश निरस्त किए जाएं।
- पेटी ठेकेदारों को भी काली सूची में शामिल किया जाए।
- लोकतांत्रिक तरीके से मजदूर अधिकारों के लिए काम करने वाले नेताओं और सदस्यों को डराने-धमकाने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
15 मार्च की वार्ता के बाद स्थगित आंदोलन को अब तेज किया जाएगा। संगठन का कार्यक्रम इस प्रकार है:
- 1 अप्रैल: एनटीपीसी गेट के समीप एकता कन्वेंशन।
- 9 अप्रैल: जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन।
- 13 अप्रैल: एनटीपीसी गेट पर धरना शुरू।
विद्रोही ने चेतावनी दी कि एनटीपीसी प्रबंधन और ठेकेदार प्रशासन के बल पर किसी भी दमनात्मक कार्रवाई के मुगालते में न रहें। उन्होंने कहा कि प्लांट में चल रहे अन्य भ्रष्टाचार और कृत्यों के खिलाफ ऊंचाहार में पनप रहे व्यापक विक्षोभ का प्रबंधन को अभी अंदाजा नहीं है। समस्याओं का सकारात्मक और त्वरित समाधान ही शांति बनाए रख सकता है।
यह मामला एनटीपीसी जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख उपक्रम में ठेकेदारी प्रथा और संविदा श्रमिकों की स्थिति पर सवाल उठाता है। मजदूर संगठनों का आरोप है कि बिना सुरक्षा और उचित वेतन के काम कराने की प्रथा आम है, जबकि विरोध करने वालों को निशाना बनाया जाता है।
ऐक्टू ने प्रशासन और प्रबंधन से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है, ताकि मजदूरों के हक सुरक्षित रहें और अवैध वसूली की प्रथा समाप्त हो।










