Odisha Witch Hunting Murder: ओडिशा के रायगढ़ जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। काशीपुर ब्लॉक के हाडिगुरा पंचायत के दोरागुरा गांव में रहने वाले बुजुर्ग गोपाल डोरा की हत्या कर दी गई। यह सब जादू-टोने यानी डायन होने के शक में हुआ। पुलिस ने इस मामले में अब तक छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
गोपाल डोरा काफी उम्र के थे और गांव में अकेले रहते थे। इस महीने की 9 तारीख को उनके परिवार ने उन्हें लापता बताते हुए दोरागुरा पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। कई दिनों तक उनकी तलाश चलती रही, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। फिर पिछले गुरुवार को गांव के पास एक नहर में उनकी लाश मिली। लाश देखकर सब हैरान रह गए क्योंकि उनके हाथ-पैर बंधे हुए थे और शरीर पर चोट के निशान साफ दिख रहे थे।

पोस्टमॉर्टम से हुआ हत्या का पुख्ता सबूत/Odisha Witch Hunting Murder
पुलिस ने लाश को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम कराया। रिपोर्ट से साफ हो गया कि यह कोई सामान्य मौत नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या थी। लाश को टुकड़ों में काटने की कोशिश की गई थी ताकि सबूत मिटाए जा सकें। लेकिन अपराधी इतने चालाक नहीं थे कि पुलिस के हाथ न लगें। जांच शुरू होते ही पुलिस ने गांव के कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया और उनसे पूछताछ की।
आरोपी का खुलासा: डायन होने का शक था वजह
पूछताछ में आरोपी लोगों ने कबूल लिया कि वे गोपाल डोरा को डायन (जादूगरनी या जादू करने वाला) मानते थे। गांव में कई बीमारियां और मौतें हुई थीं, जिनका इल्जाम उन्होंने गोपाल पर लगा दिया। उनका मानना था कि गोपाल जादू-टोना करके लोगों को नुकसान पहुंचा रहा है। इसी अंधविश्वास के चलते उन्होंने मिलकर उसकी हत्या की साजिश रची।
हत्या के बाद उन्होंने लाश को नहर में फेंक दिया और भागने की कोशिश की। लेकिन पुलिस की जांच तेज थी। दोरागुरा थाने ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की और छह आरोपियों को पकड़ लिया। इनमें से पांच को गांव से ही गिरफ्तार किया गया, जबकि छठा आरोपी एलोहिम डोरा तीर्थ यात्रा के बहाने भागकर पुरी चला गया था।
पुरी से गिरफ्तारी: तीर्थ यात्रा का बहाना फेल
एलोहिम डोरा ने सोचा कि पुरी जाकर तीर्थ यात्रा का बहाना बनाकर पुलिस की पकड़ से बच जाएगा। लेकिन दोरागुरा पुलिस ने पुरी के कुंभारपारा थाने से संपर्क किया और वहां की मदद से एलोहिम को गिरफ्तार कर लिया। अब सभी आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और उनसे आगे की पूछताछ चल रही है।
इलाके में अफरा तफरी, अंधविश्वास की बढ़ती जड़ें
यह घटना पूरे इलाके में सनसनी फैला रही है। लोग हैरान हैं कि आज के दौर में भी जादू-टोने जैसे अंधविश्वास के नाम पर निर्दोष लोगों की जान ली जा रही है। ओडिशा के आदिवासी इलाकों में ऐसी घटनाएं पहले भी होती रही हैं, जहां लोग बीमारी या दुर्भाग्य को डायन या जादूगर पर थोप देते हैं और बदला लेने के लिए हिंसा का सहारा लेते हैं।
पुलिस का कहना है कि यह मामला अंधविश्वास से जुड़ा है और इसमें सख्त कार्रवाई की जाएगी। आरोपी लोगों पर हत्या, सबूत मिटाने और साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या और लोग इस साजिश में शामिल थे या नहीं।
निष्कर्ष
ऐसी घटनाएं बताती हैं कि हमारे समाज में अभी भी अंधविश्वास कितना गहरा है। ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की कमी और जागरूकता न होने से लोग आसानी से ऐसे झूठे इल्जाम लगा देते हैं। सरकार और सामाजिक संगठनों को ऐसे मामलों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। स्कूलों में बच्चों को वैज्ञानिक सोच सिखानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी क्रूर घटनाएं रुक सकें।










