Operation Verification In Meerut : उत्तर प्रदेश के मेरठ ( Meerut ) जिले में अवैध घुसपैठ और संदिग्ध शरणार्थियों के खिलाफ पुलिस ने ‘ऑपरेशन सत्यापन’ ( Operation Verification ) के तहत बड़ा एक्शन चलाया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. विपिन ताड़ा के नेतृत्व में मेरठ पुलिस ने फतेहउल्लापुर रोड पर बनी झुग्गी-झोपड़ियों में छापेमारी की। भारी पुलिस बल और रैपिड रिस्पॉन्स फोर्स (आरआरएफ) की मौजूदगी में संदिग्ध व्यक्तियों के दस्तावेजों की कड़ी जांच की गई। इस कार्रवाई से इलाके में दहशत फैल गई, और सैकड़ों लोगों की वेरिफिकेशन पूरी की गई।
झुग्गी-झोपड़ियों में घुसपैठियों का अड्डा: ज्यादातर असम के लोग

फतेहउल्लापुर रोड पर बसी झुग्गी-झोपड़ियां वर्षों से अवैध प्रवासियों का केंद्र बनी हुई हैं। यहां सैकड़ों लोग रहते हैं, जिनमें से अधिकांश असम और पूर्वोत्तर राज्यों से आए बताए जाते हैं। पुलिस के अनुसार, ये लोग बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे हैं, और कई संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं। ऑपरेशन सत्यापन के दौरान पुलिस टीमों ने घर-घर जाकर पूछताछ की। आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट और अन्य पहचान पत्रों की जांच की गई। जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं मिले, उन्हें हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “यह अभियान अवैध घुसपैठ को रोकने और शहर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चलाया जा रहा है। झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले अधिकांश लोग असम से हैं, और उनके दस्तावेजों में कई खामियां पाई गईं। हम किसी निर्दोष को परेशान नहीं कर रहे, लेकिन संदिग्धों पर नजर रखना जरूरी है।” कार्रवाई के दौरान महिलाओं और बच्चों को अलग रखकर पूछताछ की गई, ताकि कोई असुविधा न हो।
एसएसपी विपिन ताड़ा का सख्त रुख: सुरक्षा पहले, कार्रवाई बाद
एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने इस अभियान की कमान खुद संभाली। उन्होंने कहा, “मेरठ में अपराध नियंत्रण के लिए सत्यापन ड्राइव जरूरी है। फतेहउल्लापुर रोड जैसे संवेदनशील इलाकों में घुसपैठिए अपराध का केंद्र बन सकते हैं। हमारी टीमों ने 200 से अधिक परिवारों की जांच की, और 50 से ज्यादा संदिग्धों को चिह्नित किया गया।” ताड़ा ने आगे जोड़ा कि यह अभियान नियमित रूप से चलाया जाएगा, और अवैध प्रवासियों को सख्ती से निपटारा किया जाएगा।
पिछले कुछ महीनों में एसएसपी ताड़ा ने अपराध नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए हैं। हाल ही में उन्होंने जिले में तीन एसडब्ल्यूएटी (स्पेशल वेपन्स एंड टैक्टिक्स) टीमें गठित कीं, ताकि अपराध पर अंकुश लगाया जा सके। साथ ही, संदिग्धों की चेकिंग और नाकाबंदी अभियान को तेज किया गया है, जिसमें 8,000 से अधिक लोगों की जांच हो चुकी है।
भारी फोर्स तैनात: आरआरएफ ने संभाली कमान
कार्रवाई में मेरठ पुलिस के अलावा आरआरएफ की दो टुकड़ियां तैनात की गईं। फतेहउल्लापुर रोड पर सुबह 6 बजे शुरू हुई इस ड्राइव में 150 से अधिक पुलिसकर्मी शामिल हुए। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन की मदद से निगरानी की गई, और मुख्य चौराहों पर वाहनों की चेकिंग भी की गई। स्थानीय लोगों ने पुलिस का साथ दिया, लेकिन कुछ ने शिकायत की कि जांच के दौरान थोड़ी देर के लिए रास्ते जाम हो गए।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह अभियान शांतिपूर्ण रहा, और किसी तरह की हिंसा या टकराव की घटना नहीं हुई। हालांकि, संदिग्धों को थाने ले जाते समय हल्की हलचल हुई, जिसे फोर्स ने तुरंत संभाल लिया।
भविष्य की रणनीति: नियमित वेरिफिकेशन और सख्त निगरानी
एसएसपी ताड़ा ने बाइट में कहा, “यह केवल शुरुआत है। मेरठ को सुरक्षित बनाने के लिए हम झुग्गी-झोपड़ियों, होटलों और किराये के मकानों में नियमित सत्यापन करेंगे। अवैध घुसपैठियों को पहचानकर उचित कार्रवाई की जाएगी, चाहे वे कहीं से भी आए हों।” पुलिस ने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक व्यवस्था की सलाह भी दी है।
यह कार्रवाई मेरठ में बढ़ते अपराध दर को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जिले में हाल ही में हिस्ट्रीशीटरों से जुड़ी घटनाओं के बाद पुलिस अलर्ट मोड में है। ऑपरेशन सत्यापन से न केवल घुसपैठ पर अंकुश लगेगा, बल्कि शहर की आंतरिक सुरक्षा भी मजबूत होगी।










