Plane Disappears From Radar: आज के दौर में प्लेन को ट्रैक करने के लिए दो मुख्य तरह के रडार इस्तेमाल होते हैं। प्राइमरी रडार (Primary Radar) – ये जमीन से रेडियो वेव्स भेजता है जो प्लेन से टकराकर वापस आती हैं। इससे प्लेन की लोकेशन पता चलती है, लेकिन नाम, ऊंचाई या स्पीड नहीं। ये पुराना तरीका है और ज्यादा दूर तक नहीं काम करता।
सेकंडरी रडार (Secondary Surveillance Radar – SSR) – ये सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। प्लेन में ट्रांसपोंडर नाम का डिवाइस होता है, जो रडार की क्वेरी पर जवाब भेजता है। इसमें प्लेन का कोड, फ्लाइट नंबर, ऊंचाई, स्पीड सब जानकारी आती है। ATC (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) इसी से प्लेन को आसानी से पहचानता और ट्रैक करता है।

अगर ट्रांसपोंडर काम नहीं करता, तो सेकंडरी रडार पर प्लेन “गायब” हो जाता है। प्राइमरी रडार पर अभी भी छोटा ब्लिप दिख सकता है, लेकिन वो अनआइडेंटिफाइड होता है।
हादसे से पहले रडार से प्लेन गायब होने के कारण क्या हैं/Plane Disappears From Radar
ज्यादातर मामलों में प्लेन अचानक रडार से गायब होता है तो ये तकनीकी खराबी या अन्य वजहों से होता है। ये वजहें हादसे की शुरुआत हो सकती हैं:
- ट्रांसपोंडर फेलियर या बंद होना
ट्रांसपोंडर में इलेक्ट्रिकल फॉल्ट, पावर सप्लाई कटना, या गलती से स्टैंडबाय मोड में चला जाना। इससे प्लेन सेकंडरी रडार पर तुरंत गायब हो जाता है। उदाहरण: MH370 में ट्रांसपोंडर बंद हो गया था, जिससे वो “अदृश्य” हो गया। कई हादसों में क्रैश से पहले ट्रांसपोंडर बंद हो जाता है क्योंकि प्लेन का इलेक्ट्रिकल सिस्टम फेल हो जाता है। - इलेक्ट्रिकल या पावर फेलियर
प्लेन में बड़ा इलेक्ट्रिकल फेलियर होने पर ट्रांसपोंडर, कम्युनिकेशन और ACARS (ऑटोमैटिक रिपोर्टिंग सिस्टम) सब बंद हो जाते हैं। प्लेन अभी भी उड़ रहा होता है, लेकिन ATC को कुछ पता नहीं चलता। एयर फ्रांस 447 या कुछ अन्य केस में ऐसा हुआ। - रडार कवरेज की कमी
ओशन या रिमोट एरिया में रडार कवरेज नहीं होती। प्लेन हॉराइजन (पृथ्वी की कर्व) के आगे चला जाए तो ग्राउंड रडार नहीं पकड़ पाता। MH370 जैसे केस में प्लेन इंडियन ओशन में गया जहां रडार नहीं पहुंचता। - एक्सट्रीम वेदर या इंटरफेरेंस
भारी तूफान, क्लाउड या रेडियो फ्रीक्वेंसी जामिंग से सिग्नल डिस्टर्ब हो सकता है। ट्रांसपोंडर सिग्नल कमजोर हो जाता है। - क्रैश या स्ट्रक्चरल फेलियर
अगर प्लेन में बड़ा ब्रेकअप हो जाए (एक्सप्लोजन, विंग टूटना), तो ट्रांसपोंडर भी टूट जाता है और प्लेन रडार से गायब। क्रैश होने पर ट्रांसपोंडर बंद हो जाता है, इसलिए FlightRadar24 जैसे ऐप्स पर प्लेन अचानक गायब दिखता है।
कुछ बड़े हादसों में क्या हुआ?
- MH370 (2014): ट्रांसपोंडर बंद हो गया, कोई डिस्ट्रेस कॉल नहीं। प्लेन टर्न लेकर इंडियन ओशन में गया। आज तक मुख्य wreckage नहीं मिला, लेकिन डेब्री मिले हैं। वजह: संभवतः डेलिबरेट या बड़े फेलियर।
- एयर एशिया QZ8501 (2014): स्टॉर्म में गया, ट्रांसपोंडर बंद, प्लेन क्रैश।
- रूसी An-24 (हाल का): ट्रांसपॉन्डर फेलियर + रिमोट एरिया, क्रैश में 48 मौतें।
- Gol 1907 (2006): ट्रांसपोंडर गलती से बंद, मिड-एयर कॉलिजन।
आजकल क्या बदलाव आए हैं?
आज ADS-B (Automatic Dependent Surveillance-Broadcast) ज्यादा इस्तेमाल होता है, जो GPS से लोकेशन भेजता है। लेकिन अगर ट्रांसपोंडर/पावर फेल हो तो ये भी बंद। ICAO ने नए रूल्स बनाए हैं जैसे ELT(DT) – डिस्ट्रेस ट्रैकिंग वाला इमरजेंसी लोकेटर, जो क्रैश पर ऑटो एक्टिवेट होता है। सैटेलाइट ट्रैकिंग (Inmarsat जैसे) से प्लेन को घंटों ट्रैक किया जा सकता है।
निष्कर्ष
प्लेन रडार से गायब होना हमेशा हादसा नहीं होता, लेकिन अगर अचानक और बिना वजह हो तो ये बड़ा खतरा है। ज्यादातर केस में ट्रांसपोंडर या इलेक्ट्रिकल फेलियर शुरुआती संकेत होता है। एविएशन बहुत सेफ है, लेकिन MH370 जैसे केस ने हमें सिखाया कि ट्रैकिंग सिस्टम और मजबूत करने की जरूरत है। आज सैटेलाइट और ADS-B से प्लेन ज्यादा सुरक्षित ट्रैक होते हैं, लेकिन पूरी तरह “गायब” होने का खतरा अभी भी है – खासकर ओशन के ऊपर।










