पूजा सिंघल (Pooja Singhal) झारखंड कैडर की 2000 बैच की IAS अधिकारी हैं, जिन्होंने बहुत कम उम्र में सिविल सेवा में सफलता हासिल की थी। मात्र 21 वर्ष की आयु में उन्होंने UPSC परीक्षा पास करके IAS अधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया था। उनकी शुरुआती सफलता ने उन्हें एक प्रतिभाशाली और मेहनती अधिकारी के रूप में जाना जाता था। उन्होंने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया, जिसमें खूंटी जिले की डिप्टी कमिश्नर और राज्य के खनन विभाग में सचिव जैसे पद शामिल हैं।
MGNREGA घोटाले में गिरफ्तारी और आरोप

मई 2022 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के फंड के कथित गबन और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में उन पर छापेमारी की। जांच में खूंटी जिले में MGNREGA फंड के दुरुपयोग का आरोप लगा, जहां करोड़ों रुपये की हेराफेरी का दावा किया गया।
- ED ने उनके और उनसे जुड़े परिसरों से 36 करोड़ रुपये से अधिक नकदी बरामद की।
- जांच एजेंसियों ने उन्हें कुल लगभग 82-83 करोड़ रुपये की संपत्ति से जोड़ा, जिसमें विभिन्न संपत्तियां, अस्पताल और अन्य एसेट्स शामिल थे, जिन्हें अटैच किया गया।
- 11 मई 2022 को उन्हें गिरफ्तार किया गया और PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत मामला दर्ज हुआ।
- इस दौरान उन्हें लगभग 28 महीने (करीब 2.5 साल से अधिक) जेल में बिताना पड़ा, जिसमें ज्यादातर समय ज्यूडिशियल कस्टडी में रहा।
सुप्रीम कोर्ट सहित कई स्तरों पर उनकी जमानत याचिकाएं खारिज होती रहीं, लेकिन दिसंबर 2024 में विशेष PMLA कोर्ट ने उन्हें 7 दिसंबर 2024 को जमानत दे दी।
जमानत के बाद बहाली और नई पोस्टिंग
जमानत मिलते ही झारखंड सरकार ने तेजी से कार्रवाई की:
- उनके सस्पेंशन को रद्द कर दिया गया।
- उन्हें 7 दिसंबर 2024 से प्रभावी रूप से सेवा में बहाल किया गया।
- उन्हें कार्मिक विभाग, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग (Department of Personnel, Administrative Reforms and Raj Bhasa) में पोस्टिंग दी गई।
जनवरी 2025 में सरकारी अधिसूचना जारी हुई, जिसमें सस्पेंशन रिव्यू कमिटी की सिफारिश पर यह फैसला लिया गया। ED ने उनकी सरकारी पोस्टिंग पर रोक लगाने की याचिका दायर की थी, लेकिन PMLA कोर्ट ने फरवरी 2025 में इसे खारिज कर दिया, क्योंकि यह कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर माना गया।
वर्तमान स्थिति (2025-2026 तक)
- मामला अभी भी चल रहा है, चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, लेकिन पूजा सिंघल पर मुकदमा चलाने की औपचारिक मंजूरी (prosecution sanction) अभी तक नहीं मिली है।
- उनकी बहाली पर राजनीतिक विवाद हुआ है, जहां BJP ने इसे भ्रष्टाचार के प्रति नरमी बताया, जबकि सरकार ने इसे नियमों के अनुसार फैसला करार दिया।
- यह घटनाक्रम भारतीय नौकरशाही में दुर्लभ उदाहरण है, जहां गंभीर आरोपों के बाद जमानत पर ही अधिकारी को सेवा में वापस लौटाया गया।
पूजा सिंघल की कहानी सफलता, विवाद और वापसी की एक अनोखी मिसाल है—21 साल की उम्र में IAS बनने से लेकर जेल की सलाखों के पीछे और फिर सेवा में लौटने तक का सफर।










