Punjab Govt Rejects Amritpal Singh Request: जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह को बड़ा झटका! रिहाई पर लगी रोक

Punjab Govt Rejects Amritpal Singh Request: पंजाब सरकार ने क्यों रोकी अमृतपाल सिंह की अस्थायी रिहाई? जानिए पूरी खबर

Punjab Govt Rejects Amritpal Singh Request: खडूर साहिब (Khadoor Sahib) से सांसद और ‘वारिस पंजाब दे’ के प्रमुख अमृतपाल सिंह (Amritpal Singh) को पंजाब सरकार (Punjab Government) ने बड़ा झटका दिया है। लगभग दो वर्षों से एनएसए (NSA) के तहत असम (Assam) की डिब्रूगढ़ जेल (Dibrugarh Jail) में बंद अमृतपाल सिंह ने संसद के शीतकालीन सत्र में भाग लेने के लिए अस्थायी रिहाई की मांग की थी। लेकिन पंजाब सरकार ने यह अनुरोध ठुकराते हुए साफ कहा कि अदालत के निर्देशों के अनुरूप उनकी हिरासत बरकरार रखी जाएगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमृतपाल पहले ही सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अपनी NSA हिरासत को चुनौती दे चुके हैं और अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी रिहाई को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज है। तो चलिए जानते हैं पूरा मामला क्या है, विस्तार से…

अमृतपाल की गिरफ्तारी और NSA के तहत कार्रवाई

मार्च 2023 में पंजाब पुलिस (Punjab Police) ने ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन से जुड़े मामलों की जांच के दौरान अमृतपाल सिंह (Amritpal Singh) और उनके 9 सहयोगियों को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि अमृतपाल खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे थे, राज्य के खिलाफ उकसाने वाले भाषण दे रहे थे और कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने में सक्रिय थे। सार्वजनिक सुरक्षा और संभावित हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए उन पर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) लगाया गया और उन्हें असम के डिब्रूगढ़ (Dibrugarh) जेल भेज दिया गया। गिरफ्तारी के बाद से ही अमृतपाल राजनीतिक बहस और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी का केंद्र रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में जीतने के बाद उनकी स्थिति और जटिल हो गई, क्योंकि एक निर्वाचित सांसद होने के बावजूद वे दो वर्षों से हिरासत में हैं। इसी वजह से उन्होंने संसद सत्र में शामिल होने की अनुमति मांगी थी।

शीतकालीन सत्र में रिहाई का अनुरोध क्यों हुआ रद्द

1 दिसंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में भाग लेने के लिए अमृतपाल सिंह (Amritpal Singh) ने अस्थायी रिहाई की अपील की थी। यह अनुरोध पंजाब सरकार के गृह विभाग तक पहुंचा, जहां उच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के तहत समीक्षा की गई। अतिरिक्त मुख्य सचिव (Home Department) ने फैसला सुनाते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए अमृतपाल को रिहा करना उचित नहीं है। सरकार के अनुसार, उनकी उपस्थिति से कानून-व्यवस्था पर असर पड़ सकता है और खालिस्तान समर्थक तत्वों के सक्रिय होने की आशंका भी जताई गई। चूंकि अमृतपाल अभी भी NSA के तहत हिरासत में हैं, इसलिए सरकार ने कहा कि अदालत की अनुमति के बिना किसी तरह की विशेष राहत नहीं दी जा सकती। इसी आधार पर उनकी अस्थायी रिहाई का अनुरोध खारिज कर दिया गया, जिससे राजनीतिक हलचल और भी बढ़ गई है।

सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट तक लड़ाई

इसी महीने अमृतपाल सिंह (Amritpal Singh) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दायर कर अपनी NSA हिरासत को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि एक निर्वाचित सांसद को अपने संसदीय कर्तव्यों से रोकना उनके क्षेत्र के लोगों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। जस्टिस अरविंद कुमार (Justice Aravind Kumar) और जस्टिस एन.वी. अंजारिया (Justice N.V. Anjaria) की बेंच ने याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए साफ कहा कि यह मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab & Haryana High Court) के अधिकार क्षेत्र में आता है। कोर्ट ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि याचिका पर छह सप्ताह में सुनवाई पूरी की जाए। याचिका में केंद्र सरकार (Central Government) और पंजाब सरकार (Punjab Government) दोनों को पक्षकार बनाया गया था। अमृतपाल का दावा है कि उनकी गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित है और उन्हें गलत तरीके से सुरक्षा कानूनों के तहत बंद किया गया है।

कानूनी लड़ाई और राजनीतिक असर

फिलहाल अमृतपाल सिंह (Amritpal Singh) असम की डिब्रूगढ़ जेल (Dibrugarh Jail) में दो वर्षों से बंद हैं और उनके वकील हाईकोर्ट में विस्तृत सुनवाई की तैयारी में हैं। पंजाब सरकार द्वारा शीतकालीन सत्र में शामिल होने की अनुमति न देना उनके लिए बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है। राजनीतिक स्तर पर भी यह मामला गर्म हो चुका है, क्योंकि अमृतपाल के समर्थक इसे “जनादेश का अपमान” बता रहे हैं, जबकि सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल मान रही है। हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई अब इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी। यदि अदालत उनकी हिरासत की समीक्षा करती है, तो आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज हो सकती है। वहीं संसद सत्र शुरू होने के बावजूद अमृतपाल की गैरमौजूदगी उनके क्षेत्र में सियासी बहस को और गहरा सकती है। आने वाले हफ्तों में इस मामले में कई नए मोड़ देखने को मिल सकते हैं।

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