Raebareli : गौ-प्रतिष्ठा ‘धर्मयुद्ध’ के शंखनाद के लिए शंकराचार्य की यात्रा, काशी से रायबरेली पहुंचे; 11 मार्च को लखनऊ में बड़ी महसभा

Raebareli : गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने काशी से लखनऊ तक यात्रा शुरू की। रायबरेली पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया। 11 मार्च को लखनऊ में बड़ी धर्मसभा होगी।

Raebareli : ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Swami Avimukteshwaranand Saraswati) ‘1008’ ने गाय को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करने की मांग को लेकर 11 मार्च को लखनऊ में प्रस्तावित ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध के शंखनाद’ के लिए अपनी यात्रा शुरू कर दी है। शनिवार को काशी से रवाना होकर शाम करीब 7:30 बजे उनका काफिला रायबरेली पहुंचा, जहां रानी झलकारी बाई चौराहा के पास समाजसेवी यश पाण्डेय के निवास पर उन्होंने रात्रि विश्राम किया।

शंकराचार्य जी के रायबरेली पहुंचने पर जगह-जगह श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और लोगों ने फूल-मालाओं से उनका भव्य स्वागत किया। पूरे मार्ग में “गौमाता राष्ट्रमाता” और “शंकराचार्य जी महाराज की जय” के नारों से वातावरण गूंजता रहा। श्रद्धालुओं में शंकराचार्य जी के दर्शन करने की होड़ लगी रही।

काशी में गौ-गंगा पूजन के बाद शुरू हुई यात्रा

शनिवार सुबह काशी में शंकराचार्य जी ने गौमाता का पूजन किया और मठ से पालकी में सवार होकर चिंतामणि गणेश मंदिर पहुंचे। वहां पूजा-अर्चना करने के बाद संकटमोचन हनुमान मंदिर में हनुमान जी के दर्शन किए तथा हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ किया। इसके बाद उन्होंने लखनऊ की ओर अपनी यात्रा शुरू की।

इससे एक दिन पहले शुक्रवार शाम को काशी के शंकराचार्य घाट पर ‘गो-ब्राह्मण प्रतिपालक’ वीर शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर मां गंगा और शिवाजी महाराज का पूजन कर ‘गो प्रतिष्ठार्थ धर्मयुद्ध शंखनाद’ का संकल्प लिया गया।

लखनऊ में तय होगी आंदोलन की दिशा

यात्रा पर रवाना होने से पहले शंकराचार्य जी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपने ही देश में गौमाता की रक्षा के लिए धर्मयुद्ध का शंखनाद करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनता द्वारा चुनी गई सरकार के सामने ही गौमाता को बचाने के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि 11 मार्च को लखनऊ में ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ के नाम से एक बड़ी सभा आयोजित की जाएगी, जिसमें देशभर के साधु-संत शामिल होंगे। इस सभा में आगे की रणनीति और आंदोलन की दिशा तय की जाएगी।

सरकार को दिया गया समय

शंकराचार्य जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिए गए 40 दिनों के समय में से 36 दिन पूरे हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि गौमाता को ‘राज्यमाता’ घोषित करने और उत्तर प्रदेश से बीफ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने सहित पंचसूत्रीय मांगपत्र पर अभी तक सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार के पास अब भी तीन से चार दिनों का समय है और यदि इस अवधि में निर्णय नहीं हुआ तो इसकी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार और संबंधित राजनीतिक दलों की होगी।

“हमारा अस्त्र शास्त्र और संवाद है, हिंसा नहीं”

शंकराचार्य जी ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह अहिंसक और वैचारिक होगा। उन्होंने कहा, “हमारा अस्त्र शास्त्र और संवाद है, हिंसा नहीं। हम शांतिपूर्ण तरीके से सरकार को उसकी नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी का स्मरण कराने के लिए लखनऊ की ओर ‘गोप्रतिष्ठार्थ धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा’ पर निकले हैं।”

रास्ते भर हुआ भव्य स्वागत

काशी से रायबरेली पहुंचने के दौरान जौनपुर, सुल्तानपुर और गौरीगंज समेत कई स्थानों पर शंकराचार्य जी का भव्य स्वागत किया गया। बाबतपुर हाईवे, जमदग्नि आश्रम जमेठा, सीहीपुर चौराहा, बदलापुर हाईवे, ढकवा चौराहा, लंभुआ बाजार और दुर्गा देवी मंदिर लोहरामऊ सहित कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं और पुष्पवर्षा के साथ उनका अभिनंदन किया।

गौरीगंज में कृष्णानंद पांडे के यहां पादुका पूजन और धर्मसभा का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और विद्वान आचार्य मौजूद रहे। महिलाओं ने आरती उतारकर शंकराचार्य जी का स्वागत किया।

आज उन्नाव के लिए रवाना होगी यात्रा

बताया गया कि 8 मार्च की सुबह करीब 8:30 बजे शंकराचार्य जी की यात्रा रायबरेली से लालगंज और मदनखेड़ा होते हुए उन्नाव के लिए रवाना होगी, जहां रात्रि विश्राम किया जाएगा।

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