Raebareli: करोड़ों की बिल्डिंग, लाखों की सैलरी… फिर भी महाविद्यालय में सिर्फ 19 छात्र, व्यवस्था पर उठे सवाल

रायबरेली (Raebareli) जिले से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित राजकीय महाविद्यालय हरीपुर निहस्था की स्थिति इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। वर्ष 2016 में केंद्र सरकार की रूसा (RUSA) योजना के तहत करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए इस महाविद्यालय में आज 10 साल बाद भी छात्र-छात्राओं की भारी कमी बनी हुई है। हा

Apr 07, 2026 - 05:48
Updated: 4 months ago
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रायबरेली (Raebareli) जिले से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित राजकीय महाविद्यालय हरीपुर निहस्था की स्थिति इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। वर्ष 2016 में केंद्र सरकार की रूसा (RUSA) योजना के तहत करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए इस महाविद्यालय में आज 10 साल बाद भी छात्र-छात्राओं की भारी कमी बनी हुई है। हालात यह हैं कि पूरे महाविद्यालय में महज 19 छात्र ही पंजीकृत हैं, जो शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

महाविद्यालय की भव्य इमारत, आधुनिक सुविधाएं और उच्च शिक्षित स्टाफ होने के बावजूद यहां सन्नाटा पसरा रहता है। कक्षाओं में छात्र नजर नहीं आते, जबकि शिक्षक और अन्य स्टाफ नियमित रूप से उपस्थित रहते हैं।

यह महाविद्यालय लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध है और यहां दो दर्जन से अधिक विषयों की पढ़ाई कराई जाती है। खास बात यह है कि यहां लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित योग्य प्रोफेसर तैनात हैं, जिन्हें लाखों रुपये वेतन दिया जाता है। इसके बावजूद छात्रों की संख्या बेहद कम होना चिंता का विषय बन गया है।

महाविद्यालय में आधुनिक प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, छात्रावास, खेल मैदान, जिम जैसी तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही प्रवेश शुल्क भी न्यूनतम रखा गया है, ताकि अधिक से अधिक छात्र यहां दाखिला ले सकें। लेकिन इन तमाम प्रयासों के बावजूद छात्र-छात्राओं को आकर्षित करने में कॉलेज प्रशासन अब तक असफल रहा है।

महाविद्यालय के स्टाफ द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान और मोटिवेशनल कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं, लेकिन उनका अपेक्षित असर नहीं दिख रहा है। स्थानीय स्तर पर भी यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इतनी सुविधाओं के बावजूद छात्र इस महाविद्यालय से दूरी क्यों बना रहे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्र में स्थित होने, जागरूकता की कमी, परिवहन सुविधा का अभाव और निजी कॉलेजों की बढ़ती संख्या जैसे कई कारण इसके पीछे हो सकते हैं।

अब जरूरत इस बात की है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए ठोस कदम उठाए, ताकि करोड़ों की लागत से बने इस महाविद्यालय का सही उपयोग किया जा सके और क्षेत्र के छात्रों को इसका लाभ मिल सके।

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