रायबरेली जिले के लालगंज थाना क्षेत्र के टटियापुर गांव में एक अक्टूबर की काली रात को हुई महिला प्रमिला देवी की क्रूर हत्या का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा कर दिया है। लालगंज पुलिस ने इस हत्याकांड के पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। प्रभारी निरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह के नेतृत्व में चली इस अभियान ने न केवल अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया, बल्कि गांव में व्याप्त डर का माहौल भी कम करने में सफलता हासिल की है। पुलिस जांच के अनुसार, हत्या का मुख्य कारण मृतका द्वारा उधार दिए गए 1 लाख 15 हजार रुपये की वसूली को लेकर उत्पन्न विवाद था।
घटना की जानकारी देते हुए प्रभारी निरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी अमर बहादुर, उसके बेटे शिवम और मनीष ने मिलकर प्रमिला देवी पर लाठी-डंडों और कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला बोला। हमले में इतनी बेरहमी बरती गई कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शव पर कुल नौ गंभीर चोटें पाई गईं। ये चोटें सिर, छाती और अन्य हिस्सों पर थीं, जो सीधे हत्या की मंशा को उजागर करती हैं। पुलिस के अनुसार, अमर बहादुर और उसके साथियों ने महिलाओं गुड्डी देवी और धुन्नी देवी के उकसावे पर यह कदम उठाया। दोनों महिलाओं ने न केवल हत्या की साजिश रची, बल्कि अपराधियों को हथियार उपलब्ध कराने और घटनास्थल पर मौजूद रहने में भी उनकी पूरी मदद की।

जांच के दौरान सामने आया कि प्रमिला देवी ने कुछ महीनों पहले अमर बहादुर को 1 लाख 15 हजार रुपये उधार दिए थे। जब वसूली न होने पर प्रमिला ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई, तो आरोपी पक्ष बेहद नाराज हो गया। इसी नाराजगी ने हिंसा का रूप ले लिया और एक अक्टूबर की रात को टटियापुर गांव में प्रमिला को निशाना बनाया गया। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस टीम ने तत्कालीन जांच शुरू की, जिसमें ग्रामीणों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और फोरेंसिक सबूतों का सहारा लिया गया। परिणामस्वरूप, मात्र चार दिनों में ही सभी आरोपी धर दबोचे गए।
पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त लाठी, डंडे और कुल्हाड़ी बरामद कर ली गई है। सभी हथियारों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है, ताकि चोटों से उनका मिलान साबित हो सके। लालगंज कोतवाली में दर्ज एफआईआर में हत्या, आपराधिक साजिश और हथियार अधिनियम के तहत धाराएं जोड़ी गई हैं। सभी पांचों आरोपियों—अमर बहादुर, शिवम, मनीष, गुड्डी देवी और धुन्नी देवी—को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस का दावा है कि इस गिरफ्तारी से हत्याकांड का पूरा नेटवर्क उजागर हो गया है और अब कोई लूज एंड नहीं बचा।
लालगंज के सीओ अमित सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा, “यह हत्या एक छोटे-मोटे वित्तीय विवाद से उपजी थी, लेकिन इसकी क्रूरता देखकर कोई भी सिहर उठेगा। हमारी टीम ने रात-दिन की मेहनत से इस केस को क्रैक किया है। जनता से अपील है कि ऐसे विवादों को तुरंत पुलिस के समक्ष लाएं, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। आरोपी महिलाओं का शामिल होना इस बात का संकेत है कि अपराध में लिंग कोई बाधा नहीं बनता। जांच जारी है और आगे की कार्रवाई सख्ती से की जाएगी।”
यह घटना ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की सुरक्षा और वित्तीय विवादों के खतरों को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है, जबकि ग्रामीणों में पुलिस की तत्परता की सराहना हो रही है। आगे की अपडेट्स के लिए बने रहें।










