Raebareli News : आयुष्मान कार्ड के नाम पर वसूली से टूटा गरीब परिवार

Raebareli : जिस डॉक्टर को धरती पर भगवान का रूप माना जाता है, उसी व्यवस्था से जुड़कर अगर गरीब की सांसों का सौदा होने लगे, तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं बल्कि इंसानियत पर सवाल है। सरकार की गरीबों के लिए बनाई गई महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना, जो इलाज में सहारा बनने का दावा करती है, वही योजना नसीराबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कथित फर्जीवाड़े और अवैध वसूली का शिकार बनती नजर आ रही है। थाना क्षेत्र के ग्राम पूरे तहदिल मजरे लहेंगा निवासी नफीस पुत्र मोहम्मद वहीद ने सीएम पोर्टल और जिलाधिकारी से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है।

नफीस का कहना है कि उसके भाई तौफीक के नाम 5 लाख रुपये का आयुष्मान कार्ड बना हुआ था। आरोप है कि सीएचसी नसीराबाद में अवैध रूप से काम कर रहे अमन पाल नामक व्यक्ति ने कार्ड “लॉक” होने की बात कहकर उसे खुलवाने के बदले 6 हजार रुपये की मांग की। गरीबी के चलते रकम एकमुश्त न दे पाने पर दो किस्तों में भुगतान तय हुआ। 7 जनवरी को नफीस ने गूगल पे के माध्यम से 3 हजार रुपये अमन पाल को भेजे। इसके बाद कार्ड तो खुल गया, लेकिन आधार और आयुष्मान कार्ड में नाम का मिसमैच सामने आया। शिकायत करने पर सही सुधार कराने के बजाय कथित रूप से फर्जी एडिटिंग कर नाम ठीक कर दिया गया। इस छल का दर्द तब सामने आया जब संजय गांधी अस्पताल, मुंशीगंज (अमेठी) में इलाज के दौरान आयुष्मान कार्ड जांच में पोर्टल पर सही नाम नहीं मिला। नतीजा यह हुआ कि गरीब परिवार को भगवान समझकर जिस व्यवस्था पर भरोसा था, उसी ने उसे बेसहारा छोड़ दिया।

नफीस के अनुसार, इस लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार के कारण तौफीक के पैर का दो बार ऑपरेशन कराना पड़ा। इलाज में दो लाख रुपये से अधिक खर्च हो गए। मजबूरी में खेती तक गिरवी रखनी पड़ी। पीड़ित का आरोप है कि उसने बार-बार सीएचसी अधीक्षक से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। तहरीर में यह भी आरोप लगाया गया है कि फर्जीवाड़ा और वसूली अधीक्षक की शह पर चल रही है। ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का प्रमाण भी शिकायत के साथ दिया गया है।

वहीं, इस पूरे मामले में सीएचसी नसीराबाद के अधीक्षक डॉ. आशीष कुमार यादव का कहना है कि उनके यहां अमन पाल नाम का कोई व्यक्ति कार्यरत नहीं है। आरोप निराधार हैं। यदि पीड़ित सामने आता है तो मामले को देखा जाएगा। अब सवाल यह है कि क्या “भगवान का दूसरा रूप” कहलाने वाले डॉक्टरों की व्यवस्था गरीब की आखिरी उम्मीद को इस तरह कुचलती रहेगी, या फिर प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई कर आयुष्मान योजना की गरिमा बचाएगा?

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