Raebareli : वन विभाग में व्याप्त है भ्रष्टाचार का मकड़जाल, वर्षों से जमे कर्मचारियों व डिप्टी रेंजर पर उठ रहे सवाल

Raebareli : उत्तर प्रदेश सरकार जहां भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति लागू करने का दावा कर रही है, वहीं रायबरेली का वन विभाग इस नीति को ठेंगा दिखाता नजर आ रहा है। विभाग में वर्षों से जमे कुछ कमर्चारियों व अधिकारियों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन पर कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिखाई दे रही है।

जानकारी के अनुसार वन विभाग में तैनात डिप्टी रेंजर यूनुस खान व प्रदीप कुमार तिवारी यही रहकर कई वर्षों से रायबरेली में ही जमे हुए हैं, और विभाग में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। बताया जा रहा है कि वह पहले यहां फॉरेस्टर के पद पर तैनात थे और प्रमोशन के बाद डिप्टी रेंजर बन गए, लेकिन इसके बावजूद उनका स्थानांतरण अब तक नहीं हुआ है। विभागीय ट्रांसफर नीति भी उन पर लागू होती नजर नहीं आ रही है।

स्थानीय लोगों और विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यूनुस खान व प्रदीप कुमार तिवारी को यहां की भौगोलिक स्थिति की पूरी जानकारी है,और इसी का फायदा उठाकर वह लंबे समय से अपने प्रभाव के दम पर यहां जमे हुए हैं। आरोप यह भी है कि जहां-जहां उनकी तैनाती रही है, वहां भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

हालात यह हैं कि समय-समय पर जिले में वन विभाग के डीएफओ बदलते रहते हैं, लेकिन डिप्टी रेंजर यूनुस खान का तबादला नहीं हो रहा है। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं और यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिरकार किसके संरक्षण में यह सब चल रहा है। वही प्रदीप कुमार अब कंप्यूटर बाबू वन बैठा है। पहले कैटरिंग गार्ड और अचानक से बाबू सवाल तो पैदा ही करता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में जीरो टॉलरेंस की नीति को लागू करना चाहती है, तो ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल वन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और वर्षों से जमे अधिकारियों को लेकर चर्चा तेज होती जा रही है।

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