रायबरेली : उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के रायबरेली (Raebareli) जनपद में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। शहर कोतवाली थाना क्षेत्र के नेहरू नगर निवासी अजय प्रताप सिंह ने वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक (एसपी) को शिकायती पत्र सौंपा है। पीड़ित ने दावा किया है कि विभाग के अधिकारियों ने नौकरी देने के नाम पर 13 लाख रुपए की घूस लेकर नौकरी दी, जो नियमो के विपरीत है। इस मामले में जांच और कार्यवाही की मांग की गई है।
पीड़ित अजय प्रताप सिंह ने अपने शिकायती पत्र में विस्तार से बताया कि उनके बड़े भाई स्वर्गीय अजीत प्रताप सिंह, पुत्र स्वर्गीय चंद्रभान सिंह, वाणिज्य कर विभाग जनपद रायबरेली में उनके पिताजी के स्थान पर मृतक आश्रित कोटे के तहत कार्यरत थे। अजीत प्रताप सिंह का निधन वर्ष 2017 में हो गया था। भाई की मौत के बाद, उनकी पत्नी अनामिका सिंह ने ग्राम बिरनावा, विकासखंड डीह, तहसील सलोन निवासी धर्मेंद्र प्रताप सिंह के साथ दूसरी शादी कर ली। पीड़ित का आरोप है कि इस दौरान वाणिज्य कर विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने परिवार से संपर्क किया और नौकरी दिलाने के बदले में 13 लाख रुपए की घूस ली परिवार ने घूस की रकम दे दी,औऱ सबकुछ,जानते हुए नौकरी दी

अजय प्रताप सिंह ने आगे कहा कि इस भ्रष्टाचार की शिकायत उन्होंने कई विभागों में की है, लेकिन कहीं से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया, “ऐसा कोई विभाग नहीं बचा जहां हमने शिकायत न की हो। हर जगह से सिर्फ भ्रमित किया गया और आश्वासन दिए गए, लेकिन न्याय नहीं मिला।” पीड़ित ने रायबरेली के पुलिस अधीक्षक को दिए गए शिकायती पत्र में सभी संबंधित दस्तावेज और प्रार्थना पत्र संलग्न किए हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की है। जब पीड़ित ने एसपी कार्यालय पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने कहा कि वह लंबे समय से न्याय की गुहार लगा रहा है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। इस मामले ने वाणिज्य कर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, शिकायती पत्र प्राप्त होने के बाद मामले की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि, आधिकारिक रूप से अभी कोई बयान जारी नहीं किया गया है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह विभागीय भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण साबित हो सकता है। पीड़ित परिवार अब पुलिस जांच के नतीजों का इंतजार कर रहा है, जबकि स्थानीय निवासियों ने इस मामले में पारदर्शिता की मांग की है।










