Manrega Bachao Sangram : रायबरेली में राहुल गांधी का मनरेगा बचाओ संग्राम, मोदी सरकार पर तीखा हमला

Manrega Bachao Sangram : रायबरेली में मनरेगा बचाओ रैली, राहुल ने कहा - संविधान और गांधी की सोच मिटाना चाहते हैं मोदी

Manrega Bachao Sangram : कांग्रेस के सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रायबरेली के उमरन गांव में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। राहुल ने कहा कि आरएसएस और नरेंद्र मोदी बाबासाहेब अंबेडकर और संविधान की सोच को मिटाना चाहते हैं। साथ ही, महात्मा गांधी की विचारधारा को भी खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा जैसी योजनाओं को छीनकर पैसा अदानी और अंबानी जैसे बड़े पूंजीपतियों को दिया जा रहा है। इस कार्यक्रम में स्थानीय नेता अतुल सिंह ने राहुल गांधी का स्वागत राजा माहे पासी की प्रतिमा और अंग वस्त्र देकर किया। हजारों मनरेगा मजदूरों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में यह कार्यक्रम हुआ, जो कांग्रेस की पूरे देश में चल रही मुहिम का हिस्सा है।

मनरेगा क्या है और क्यों हो रहा विरोध?

मनरेगा यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 में कांग्रेस सरकार के समय शुरू हुई थी। यह योजना ग्रामीण इलाकों में गरीब परिवारों को साल में कम से कम 100 दिन का रोजगार देने की गारंटी देती है। इससे करोड़ों मजदूरों को काम मिलता है, खासकर सूखे या बेरोजगारी के समय। लेकिन हाल ही में केंद्र सरकार ने इसे बदलकर ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ कर दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि नया कानून मनरेगा की मूल भावना को खत्म कर रहा है। अब रोजगार की गारंटी कमजोर हो गई है, फंड का बंटवारा बदल गया है, और पंचायतों के अधिकार छिन गए हैं। कांग्रेस इसे गरीबों के ‘राइट टू वर्क’ का चोरी होना बता रही है। पार्टी का कहना है कि यह बदलाव गरीबों और मजदूरों के हितों के खिलाफ है।

उमरन में कार्यक्रम का माहौल और राहुल का संबोधन

उमरन गांव, जो ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र में आता है, इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बना। यहां मनरेगा मजदूरों की बड़ी संख्या में भीड़ जुटी थी। लोग अपनी समस्याएं लेकर आए थे – काम की कमी, मजदूरी में देरी, और नई योजना से डर। राहुल गांधी ने मजदूरों से सीधे बात की और कहा, आजादी से पहले जैसा हिंदुस्तान था, वैसा ही आज भी है। आपकी जमीन छीनी जा रही है, हक छीने जा रहे हैं। योजनाएं और उनका पैसा अदानी-अंबानी को दिया जा रहा है। आप भुखमरी की कगार पर खड़े हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदुस्तान की सरकार पूंजीपतियों की है, किसानों और मजदूरों की नहीं।

राहुल ने मजदूरों को भरोसा दिलाया, घबराना नहीं है। कांग्रेस पार्टी आपके साथ खड़ी है। हम केंद्र की इस योजना को सफल नहीं होने देंगे। उनका भाषण काफी भावुक था, जिसमें उन्होंने गांधी और अंबेडकर की विचारधारा को बचाने की बात की। कार्यक्रम की शुरुआत में पूर्व विधानसभा प्रत्याशी अतुल सिंह ने राहुल का स्वागत किया। अतुल ने राजा माहे पासी की प्रतिमा और अंग वस्त्र भेंट किया, जो पासी समुदाय के सम्मान का प्रतीक है। अतुल सिंह ने मंच से कहा, मनरेगा मजदूर सभी एक साथ हैं। यह योजना गरीबों के लिए वरदान थी, लेकिन मोदी सरकार ने बदलाव कर आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाया है।

अन्य नेताओं ने क्या कहा?

मंच पर रायबरेली के सांसद केएल शर्मा भी मौजूद थे। उन्होंने मनरेगा का नाम बदलने पर निशाना साधा और कहा, महात्मा गांधी की आत्मा को ठेस पहुंचाने के लिए नाम बदला गया है। शर्मा ने कांग्रेस की प्रतिबद्धता दोहराई कि पार्टी पूरे प्रदेश में ‘मनरेगा बचाओ समिति’ के तहत जागरूकता अभियान चलाएगी।

जिलाध्यक्ष पंकज तिवारी, विजय शंकर अग्निहोत्री, पूर्व विधायक अजयपाल सिंह, सुशील पासी, प्रमेन्द्र पाल गुलाटी, शिवानंद मौर्या, ज्योति पासी, अनिरुद्ध दीक्षित, केदार नाथ सिंह, शैलेन्द्र सिंह, रणजीत सिंह, शाजू नकवी जैसे कई नेता भी मौजूद थे। हजारों की संख्या में लोग आए, जिनमें ज्यादातर मनरेगा से जुड़े मजदूर थे।

राहुल की यात्रा और इसका राजनीतिक महत्व

यह कार्यक्रम राहुल गांधी की दो-दिवसीय रायबरेली यात्रा का हिस्सा था। उन्होंने मनरेगा चौपाल के अलावा पार्टी कार्यकर्ताओं से मीटिंग की और आगे की रणनीति पर चर्चा की। कांग्रेस अब पंचायत स्तर पर जागरूकता बढ़ा रही है। उत्तर प्रदेश में महापंचायतें आयोजित की जा रही हैं, जहां राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी हिस्सा ले सकते हैं।

यह अभियान कांग्रेस की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। पार्टी का दावा है कि नई योजना से गरीबों का ‘राइट टू वर्क’ छिन रहा है। राहुल और खड़गे ने मनरेगा मजदूरों को चिट्ठी लिखकर कहा कि मोदी सरकार इसे ‘रेवड़ी’ बता रही है, लेकिन यह गरीबों का हक है। उत्तर प्रदेश में यह मुहिम ग्रामीण वोटरों को जोड़ने का तरीका है, जहां बेरोजगारी और रोजगार बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

मजदूरों की प्रतिक्रिया और आगे क्या?

कार्यक्रम के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने राहुल के भाषण की सराहना की। एक मजदूर ने कहा, राहुल जी ने हमारी पीड़ा समझी। मनरेगा से हमें काम मिलता है, लेकिन अब डर लग रहा है। कांग्रेस अब पंचायत स्तर पर आउटरीच बढ़ाएगी और महापंचायतें शुरू करेगी।

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