AIIMS Stroke Recovery Study: भारत में ब्रेन स्ट्रोक (मस्तिष्कघात) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हर साल लाखों लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं। लेकिन अच्छी खबर यह है कि AIIMS दिल्ली की एक नई स्टडी ने एक सस्ता और आसान तरीका बताया है – रोजाना सिर्फ 30 मिनट धूप में समय बिताना। यह स्ट्रोक से उबर रहे मरीजों की रिकवरी तेज कर सकता है, नींद बेहतर कर सकता है और मूड भी सुधार सकता है। आइए सरल भाषा में समझते हैं कि स्टडी क्या कहती है, क्यों स्ट्रोक बढ़ रहे हैं और धूप कैसे मदद करती है।
स्ट्रोक के मामले क्यों बढ़ रहे हैं भारत में?/AIIMS Stroke Recovery Study
स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग में खून की सप्लाई अचानक रुक जाती है या ब्लड वेसल फट जाता है। इससे दिमाग के हिस्से को ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिलता, जिससे लकवा या मौत हो सकती है।

भारत में स्थिति चिंताजनक है। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज के अनुमान के मुताबिक, 2021 में भारत में करीब 12.5 लाख नए स्ट्रोक के केस आए थे। लगभग 94 लाख लोग स्ट्रोक के लंबे समय तक प्रभावों से जूझ रहे थे। अब 2026 में यह संख्या और बढ़ चुकी है।
कारण क्या हैं?
- हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं।
- अनहेल्दी लाइफस्टाइल – ज्यादा तेल-मसाले वाला खाना, कम एक्सरसाइज, स्मोकिंग और शराब।
- प्रदूषण, तनाव और उम्रदराज आबादी।
- युवाओं में भी स्ट्रोक बढ़ रहा है – 30-40 साल के लोग प्रभावित हो रहे हैं।
स्ट्रोक भारत में मौत और विकलांगता का बड़ा कारण बन चुका है। लेकिन इलाज महंगा है और रिकवरी लंबी चलती है।
AIIMS की स्टडी क्या कहती है?
AIIMS न्यू दिल्ली के डॉक्टरों ने एक रिसर्च की, जो नवंबर 2023 से अप्रैल 2025 तक चली। इसमें मॉडरेट स्ट्रोक से पीड़ित 18 से 80 साल के मरीजों को शामिल किया गया। 200 से ज्यादा मरीजों की स्क्रीनिंग के बाद 40 मरीजों को चुना गया।
इन्हें दो ग्रुप में बांटा गया:
- पहला ग्रुप: सिर्फ स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट और रिहैबिलिटेशन (फिजियोथेरेपी, दवाएं आदि)।
- दूसरा ग्रुप: स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट के साथ हर दूसरे दिन 30 मिनट धूप में समय बिताना (कुल 15 दिन)।
धूप की तीव्रता 10,000 से 25,000 लक्स रखी गई (जो सामान्य दिन की रोशनी जैसी होती है)। सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया।
परिणाम चौंकाने वाले थे:
- धूप वाली ग्रुप में स्ट्रोक से जुड़ी जीवन गुणवत्ता (quality of life) काफी बेहतर हुई।
- नींद की क्वालिटी सुधरी।
- मूड बेहतर हुआ, डिप्रेशन कम हुआ।
- कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं देखा गया।
स्टडी AIIMS के रिसर्च डे पर पेश की गई। यह बताती है कि धूप एक सस्ता, घरेलू और बिना दवा का तरीका है जो रिकवरी में मदद करता है।
धूप कैसे मदद करती है स्ट्रोक रिकवरी में?
डॉक्टरों के मुताबिक धूप कई तरीकों से फायदा पहुंचाती है:
- विटामिन D बढ़ाती है: सूरज की किरणें त्वचा में विटामिन D बनाती हैं। स्ट्रोक मरीजों में विटामिन D की कमी आम है क्योंकि वे घर में ज्यादा रहते हैं। कमी से हड्डियां कमजोर होती हैं और रिकवरी धीमी होती है।
- नींद का पैटर्न सुधारती है: धूप बॉडी क्लॉक (सर्केडियन रिदम) को सेट करती है। अच्छी नींद से दिमाग ठीक होता है।
- सूजन कम करती है: स्ट्रोक के बाद दिमाग में सूजन होती है। धूप से इन्फ्लेमेशन घटती है।
- मूड और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर: धूप से सेरोटोनिन हार्मोन बढ़ता है, जो खुशी देता है। स्ट्रोक के बाद डिप्रेशन बहुत आम है।
यह सब मिलकर फिजिकल रिकवरी (चलना-फिरना, रोजमर्रा के काम) को तेज करते हैं।
धूप लेते समय क्या सावधानियां बरतें?
डॉक्टर कहते हैं कि धूप फायदेमंद है लेकिन ज्यादा न लें:
- सुबह 10 से दोपहर 3 बजे के बीच ज्यादा UV rays होते हैं, इसलिए सुबह या शाम की हल्की धूप बेहतर।
- आंखों पर चश्मा, सिर ढककर और ज्यादा देर न रहें।
- गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचें, पानी पीते रहें।
- अगर स्किन सेंसिटिव है या कोई दवा ले रहे हैं तो डॉक्टर से पूछें।
- शुरुआत में 10-15 मिनट से शुरू करें, फिर बढ़ाएं।
निष्कर्ष
AIIMS की यह स्टडी बताती है कि महंगी दवाओं के अलावा प्रकृति भी इलाज दे सकती है। भारत में जहां सूरज भरपूर है, वहां 30 मिनट धूप एक आसान उपाय बन सकता है। लेकिन याद रखें – यह स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट की जगह नहीं ले सकता। डॉक्टर की सलाह जरूरी है।










