Rajasthan New Law on Dead Body Protest: राजस्थान (Rajasthan) की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव सामने आया है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। अब सड़क पर शव रखकर विरोध प्रदर्शन करना सिर्फ सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि सीधा कानूनी अपराध बन गया है। राज्य सरकार (Rajasthan Government) ने “मृत शरीर सम्मान अधिनियम” को लागू कर दिया है, जिसके तहत परिजनों को 24 घंटे के भीतर अंतिम संस्कार करना अनिवार्य होगा। सरकार का दावा है कि ऐसा कानून लागू करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है। इस फैसले के पीछे कानून-व्यवस्था, मृतक की गरिमा और सामाजिक अनुशासन को लेकर गंभीर तर्क दिए जा रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या यह कानून हर परिस्थिति में व्यवहारिक साबित होगा? तो चलिए जानते हैं पूरा मामला क्या है…
क्यों जरूरी समझा गया यह अधिनियम/Rajasthan New Law on Dead Body Protest
राजस्थान (Rajasthan) में बीते कुछ वर्षों के दौरान कई बार ऐसी घटनाएं सामने आईं, जब सड़क पर शव रखकर लंबा प्रदर्शन किया गया, जिससे यातायात बाधित हुआ और कानून-व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा। कई मामलों में मुआवजे, सरकारी नौकरी या अन्य मांगों को लेकर घंटों और कभी-कभी दिनों तक शव को सड़क पर रखा गया। इससे न सिर्फ आम जनता को परेशानी हुई, बल्कि पुलिस और प्रशासन (Administration) के सामने भी बड़ा संकट खड़ा हुआ। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने “मृत शरीर सम्मान अधिनियम” का मसौदा तैयार किया। सरकार का कहना है कि विरोध का अधिकार लोकतंत्र में जरूरी है, लेकिन मृत शरीर का इस तरह उपयोग करना न तो संवैधानिक है और न ही मानव गरिमा के अनुरूप। इसी संतुलन को बनाते हुए यह नया कानून लागू किया गया है।

सड़क पर शव रखना अब संगीन अपराध
नए अधिनियम के तहत अब सड़क, चौराहे या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर शव रखकर प्रदर्शन, धरना या दबाव बनाना आपराधिक कृत्य माना जाएगा। ऐसे मामलों में दोषियों को 6 महीने से लेकर 5 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है। वहीं, यदि मृतक के परिजन खुद इस तरह के प्रदर्शन में शामिल पाए जाते हैं, तो उन्हें भी दो साल तक की सजा हो सकती है। एक महत्वपूर्ण बदलाव यह भी है कि अब कोई भी अस्पताल (Hospital) बकाया बिल या किसी अन्य वजह से शव को रोक नहीं सकेगा। सरकार का कहना है कि यह प्रावधान इसलिए जोड़ा गया है ताकि मृतक के सम्मान (Respect of the Dead) से किसी भी स्थिति में समझौता न हो और परिवार को मानसिक पीड़ा न झेलनी पड़े।
24 घंटे का नियम और प्रशासन की भूमिका
नए नियमों के अनुसार, कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद परिजनों को 24 घंटे के भीतर अंतिम संस्कार करना अनिवार्य होगा। यदि parivar किसी कारणवश ऐसा नहीं करते हैं, तो पुलिस (Police) शव को अपने कब्जे में लेकर स्वयं अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करेगी। सरकार का कहना है कि कई बार कानूनी विवाद, सामाजिक टकराव या पारिवारिक कारणों से शव को लंबे समय तक रखा जाता है, जो असंवेदनशील स्थिति पैदा करता है। इस कानून के बाद प्रशासन को यह अधिकार मिल जाएगा कि वह मृत शरीर के सम्मान को प्राथमिकता देते हुए अंतिम संस्कार सुनिश्चित करे। अधिकारियों के अनुसार, यह व्यवस्था सामाजिक तनाव और अनावश्यक विवादों को रोकने में सहायक सिद्ध होगी।
अधिनियम अब पूरी तरह प्रभावी
राजस्थान (Rajasthan) में यह अधिनियम अब पूरी तरह प्रभावी हो चुका है और आज से इसके नए नियम लागू माने जा रहे हैं। पुलिस और प्रशासनिक अमला अब ऐसे मामलों में सीधे कानूनी कार्रवाई कर सकेगा। सरकार का दावा है कि इससे एक ओर जहां कानून-व्यवस्था मजबूत होगी, वहीं दूसरी ओर मृतक की गरिमा की रक्षा सुनिश्चित होगी। हालांकि, कुछ सामाजिक संगठनों का मानना है कि विशेष परिस्थितियों में परिजनों को अपनी बात रखने के लिए अतिरिक्त समय और संवेदनशीलता की जरूरत होती है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह कानून जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है। फिलहाल इतना तय है कि राजस्थान इस फैसले के जरिए देश के सामने एक नई कानूनी मिसाल पेश कर चुका है।










