Ramgarh Cyber Gang Arrest: झारखंड के रामगढ़ जिले में पुलिस ने एक ऐसे साइबर फ्रॉड गैंग के मुख्य सदस्य को गिरफ्तार किया है, जिसके कारनामे सुनकर कोई भी व्यक्ति हैरान रह जाएगा। यह गैंग सिर्फ पैसे की ठगी तक सीमित नहीं था, बल्कि बड़े-बड़े व्यापारियों को झांसे में लेकर उनका अपहरण करता था और फिरौती वसूलता था। जो लोग फिरौती नहीं देते, उनकी हत्या तक कर दी जाती थी। इस गैंग का सरगना संटू कुमार उर्फ कुंदन (27 वर्ष) को गोला थाना क्षेत्र से धर दबोचा गया है।
रामगढ़ के एसपी अजय कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस गिरफ्तारी की पूरी जानकारी दी। संटू बिहार के नालंदा जिले के परवलपुर थाना का रहने वाला है। वह कई महीनों से रामगढ़ के हेरमदगा, रजरप्पा रोड के पास एक रिटायर्ड इंजीनियर के घर किराए पर रह रहा था। यहीं से वह साइबर ठगी का जाल फैला रहा था। पुलिस ने उसके पास से 4 लाख 42 हजार रुपये नगद, 3 आईफोन सहित कुल 6 मोबाइल फोन और एक बुलेट बाइक बरामद की है।

कैसे काम करता था यह ठगी का रैकेट?/Ramgarh Cyber Gang Arrest
संटू और उसके साथी बैंक के कस्टमर केयर अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते थे। वे कहते थे कि आपके अकाउंट में समस्या है, KYC अपडेट करवाइए या कोई सर्विस एक्टिवेट करवाइए। इसके लिए वे एक APK फाइल डाउनलोड करवाते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति यह फाइल इंस्टॉल कर लेता, उसके फोन का पूरा कंट्रोल ठगों के हाथ में आ जाता। बैंक डिटेल्स, पासवर्ड, OTP सब कुछ चुरा लिया जाता।
फिर गूगल सर्च करके बड़े व्यापारियों के नंबर निकाले जाते थे, जैसे कि एल्यूमिनियम, कॉपर या मेटल का बड़ा कारोबार करने वाले। उन्हें बड़ी डील का लालच देकर बिहार के पटना बुलाया जाता। वहां पहुंचते ही उनका अपहरण कर लिया जाता और परिवार से मोटी फिरौती मांगी जाती। संटू ने पुलिस को बताया कि इस तरह उन्होंने कई राज्यों के व्यापारियों से करोड़ों रुपये ऐंठे हैं।
पटना की खौफनाक हत्या, लक्ष्मण शिंदे का मामला
इस गैंग का सबसे बड़ा और दिल दहला देने वाला कारनामा अप्रैल 2025 में हुआ। महाराष्ट्र के पुणे में रहने वाले लक्ष्मण साधु शिंदे, जो रणदीप कास्टिंग कंपनी के मालिक थे, को फर्जी बिजनेस डील के नाम पर पटना बुलाया गया। झारखंड के कोल इंडिया के फर्जी ईमेल से सस्ते स्क्रैप का लालच दिया गया। 11 अप्रैल 2025 को पटना एयरपोर्ट से ही उनका अपहरण कर लिया गया। उन्हें हिलसा (बिहार) में रखा गया।
परिवार से फिरौती के तौर पर 12 लाख रुपये मंगवाए गए। लक्ष्मण के अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करवाए गए। फिर एटीएम पिन कोड मांगा गया। लक्ष्मण ने पिन नहीं बताया या गलत बताया, तो गैंग ने उन्हें बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला। उनका शव जहानाबाद के घोसी थाना क्षेत्र में फेंक दिया गया। पटना पुलिस ने इस हत्याकांड में पहले ही 8 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें शिवराज सांघी, संगीता कुमारी, विकास कुमार, लाल बिहारी, विपत्र कुमार, सचिन कुमार, सुमित कुमार और संतोष कुमार शामिल हैं। संटू इस केस में वांछित था और फरार चल रहा था। रामगढ़ पुलिस की इस गिरफ्तारी को बड़ी सफलता माना जा रहा है।
कई व्यापारियों से वसूली गई मोटी रकम
संटू ने पुलिस को कबूल किया कि गैंग ने कई राज्यों के व्यापारियों से कुल लगभग 1 करोड़ 60 लाख रुपये ठगे और वसूले हैं। कुछ प्रमुख नाम और रकम इस प्रकार हैं:
- राजकोट के कौशिक कडिया से 7 लाख रुपये
- जीवेश कुमार से 5 लाख
- सोमनाथ पटेल से 4 लाख
- महेश भाई (महाराष्ट्र) से 5 लाख
- संभाजी (गुजरात) से 8 लाख
- रितु कास्टिंग कंपनी के मालिक से अपहरण कर 10 लाख
- दीपक कुमार कनोडिया से 7 लाख
- कौशिक भाई से जबरन 30 लाख
- दीपेश कुमार (अहमदाबाद) से 60 लाख
- महेंद्र चौधरी (बेंगलुरु) से 7 लाख
- आशीष पटेल और महक चवाटिया से 5-5 लाख
इसके अलावा कई अन्य मामलों में भी लाखों रुपये ऐंठे गए। गैंग राजकोट, बेंगलुरु, पुणे, अहमदाबाद जैसे शहरों के व्यापारियों को टारगेट करता था।
पुलिस की बड़ी उपलब्धि
रामगढ़ एसपी अजय कुमार ने कहा कि तकनीकी निगरानी और सूचना के आधार पर संटू को पकड़ा गया। यह गिरफ्तारी न सिर्फ रामगढ़ पुलिस के लिए बल्कि पटना पुलिस के लिए भी बड़ी कामयाबी है, क्योंकि संटू लंबे समय से फरार था। पुलिस अब गैंग के बाकी सदस्यों की तलाश में जुटी है।










