Ramgarh Illegal Liquor Raid : झारखंड के रामगढ़ जिले में अवैध शराब के कारोबार पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिले के उपायुक्त फैज अक अहमद मुमताज ने अवैध शराब बनाने और बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के आधार पर सहायक आयुक्त उत्पाद अरविंद कुजूर ने तुरंत टीम को सक्रिय किया। मंगलवार को उत्पाद विभाग की टीम ने गोला थाना क्षेत्र के अंतर्गत कामता गांव में छापामारी की। यह अभियान काफी सघन और व्यापक था, जिसमें कई जगहों पर तलाशी ली गई। टीम ने अवैध शराब की कई भट्टियां (भट्ठियां) ढूंढ निकालीं और उन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया।
इस कार्रवाई में टीम को बड़ी सफलता मिली। लगभग 1500 किलोग्राम जावा महुआ (महुआ की जड़ या कच्चा माल जो शराब बनाने में इस्तेमाल होता है) और करीब 70 लीटर तैयार महुआ शराब बरामद की गई। महुआ शराब झारखंड के ग्रामीण इलाकों में काफी आम है, लेकिन यह अवैध तरीके से बनाई जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक होती है और कानून के खिलाफ है। इस बरामदगी से अवैध कारोबारियों को बड़ा झटका लगा है।

किन लोगों पर दर्ज हुआ मुकदमा?
छापेमारी के दौरान टीम ने कई लोगों को इस अवैध काम में शामिल पाया। कामता गांव के निवासी अनूज साव, टिंकू साव, गुजरा उर्फ गुलशन साव, बीतन साव, खखुआ साव, जगदंब साव आदि के खिलाफ उत्पाद अधिनियम की धारा 47(a) के तहत मामला दर्ज किया गया है। ये सभी लोग फरार बताए जा रहे हैं, यानी पुलिस और उत्पाद विभाग अब इन्हें तलाश रही है। धारा 47(a) अवैध शराब बनाने, रखने या बेचने से जुड़ी है, जिसमें सख्त सजा का प्रावधान है। प्रशासन का कहना है कि इन लोगों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा और कानूनी कार्रवाई पूरी की जाएगी।
किसके नेतृत्व में हुई कार्रवाई?
यह पूरी छापेमारी अभियान अवर निरीक्षक उत्पाद कांग्रेश कुमार के नेतृत्व में किया गया। उनके साथ अधीनस्थ उत्पाद बल के जवान और प्रतिनियुक्त गृहरक्षक (होमगार्ड) के जवान भी शामिल थे। टीम ने काफी सतर्कता और समन्वय के साथ काम किया। गांव के अंदरूनी इलाकों में छिपी भट्टियों को ढूंढना आसान नहीं था, लेकिन टीम की मेहनत से सफलता मिली। इस तरह की कार्रवाई से साफ संदेश जाता है कि सरकार अवैध शराब के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है।
अवैध महुआ शराब क्यों है समस्या?

झारखंड में महुआ का पेड़ बहुतायत में मिलता है। महुआ के फूल और बीज से लोग पारंपरिक रूप से शराब बनाते हैं, लेकिन बिना लाइसेंस के यह अवैध है। अवैध भट्टियां न सिर्फ सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि घटिया क्वालिटी की शराब से लोगों की सेहत भी बिगड़ती है। कई बार ऐसी शराब से मौतें भी हो जाती हैं। रामगढ़ जैसे जिले में जहां ग्रामीण इलाके ज्यादा हैं, वहां यह समस्या आम है। उपायुक्त फैज अक अहमद मुमताज ने कहा है कि ऐसे अभियान नियमित रूप से चलाए जाएंगे ताकि जिले को अवैध शराब मुक्त बनाया जा सके।
प्रशासन की मुहिम, स्वास्थ्य और कानून दोनों की रक्षा
यह कार्रवाई सिर्फ एक घटना नहीं है। झारखंड सरकार अवैध शराब, मादक पदार्थों और नशीले तत्वों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। रामगढ़ में हाल के महीनों में कई बार ऐसी छापेमारी हुई हैं, जिसमें हजारों लीटर शराब और कच्चा माल नष्ट किया गया है। सहायक आयुक्त अरविंद कुजूर ने टीम को बधाई दी और कहा कि यह सफलता स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। अवैध शराब से जुड़े अपराध समाज में अपराध दर बढ़ाते हैं, झगड़े-मारपीट बढ़ाते हैं और परिवारों को बर्बाद करते हैं।
स्थानीय लोगों में राहत की सांस
कामता गांव और आसपास के इलाकों में लोगों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है। कई लोग कहते हैं कि अवैध शराब से युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही थी। अब प्रशासन की सख्ती से उम्मीद जगी है कि गांव में शांति बनी रहेगी। हालांकि फरार आरोपियों की तलाश जारी है, लेकिन टीम का मनोबल ऊंचा है।
निष्कर्ष
उत्पाद विभाग ने चेतावनी दी है कि अवैध शराब बनाने वालों के खिलाफ और सख्ती बरती जाएगी। नियमित छापेमारी, निगरानी और सूचना पर आधारित कार्रवाई जारी रहेगी। उपायुक्त ने सभी थाना क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया है। झारखंड सरकार का लक्ष्य है कि राज्य में नशा मुक्ति अभियान सफल हो और लोग स्वस्थ, सुरक्षित जीवन जी सकें।










