Rewa Old Bus Stand : रीवा बस स्टैंड पर एजेंटों की खुली लूट, पुलिस चौकी के सामने वसूली का खेल, थाना प्रभारी पर सवाल

Rewa Old Bus Stand : पुराने बस स्टैंड में एजेंट राज, 50-100 रुपये प्रति बस वसूली, पुलिस की आंखें बंद

Rewa Old Bus Stand : रीवा शहर का पुराना बस स्टैंड इन दिनों फिर से विवादों में घिरा हुआ है। जहां रोजाना हजारों यात्री इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर जैसे शहरों के लिए बस पकड़ते हैं, वहां एजेंटों का एक ऐसा नेटवर्क सक्रिय हो गया है जो बस चालकों और कंडक्टरों से खुलेआम पैसे वसूल रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब पुलिस चौकी की नाक के नीचे हो रहा है। स्थानीय लोग और बस संचालक इसे एजेंटगिरी का खेल बता रहे हैं और थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

बस स्टैंड पर क्या हो रहा है?

पुराना बस स्टैंड रीवा का सबसे बड़ा परिवहन केंद्र है। सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक यहां बसों का आना-जाना लगा रहता है। स्थानीय बसों के अलावा बाहरी जिलों से आने वाली गाड़ियां भी यहां रुकती हैं। यात्रियों की भारी भीड़ होती है, लेकिन व्यवस्था का नामोनिशान नहीं।

बस संचालकों और कंडक्टरों का आरोप है कि कुछ एजेंट बसों को स्टैंड से रवाना करने के नाम पर पैसे मांगते हैं। अगर कोई चालक 50 से 100 रुपये देने से मना कर दे, तो उसकी बस को रोका जाता है। एजेंट कहते हैं – “पैसे दो, नहीं तो बस आगे नहीं जाएगी।” इसके बाद एजेंट अपनी मनपसंद बस को पहले रवाना कर देते हैं। कई बार इस बात पर बस कर्मचारियों और एजेंटों के बीच तीखी बहस और हाथापाई भी हो जाती है।

रोजाना 4-5 हजार रुपये की वसूली का दावा किया जा रहा है

बस कर्मचारियों का कहना है कि बाहरी बसों से 50-100 रुपये प्रति बस लिए जाते हैं। दिन भर में 80-100 बसों से यह रकम इकट्ठी हो जाती है, जो कुल मिलाकर 4 हजार से 5 हजार रुपये रोज बनती है। यह पैसा किसके पास जाता है, इस पर साफ जवाब कोई नहीं देता, लेकिन स्थानीय दुकानदारों और बस संचालकों में चर्चा है कि इस पूरे खेल में पुलिसकर्मियों की मौन सहमति या संरक्षण है।

पुलिस चौकी मौजूद, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?

बस स्टैंड परिसर में ही पुलिस चौकी है, लेकिन लोग कहते हैं कि यहां पुलिस की सक्रियता बहुत कम दिखती है। दुकानदारों का आरोप है कि सिपाही तभी नजर आते हैं जब वसूली का समय होता है। विवाद होने पर पुलिसकर्मी मौके पर नहीं पहुंचते। एक दुकानदार ने बताया, “एजेंट और बस वाले झगड़ा करते हैं, चिल्ला-चिल्ला कर लड़ते हैं, लेकिन चौकी से कोई नहीं निकलता। इससे लगता है कि सब कुछ जानबूझकर होने दिया जा रहा है।”

इससे थाना प्रभारी और बस स्टैंड चौकी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं – चौकी होने के बावजूद अव्यवस्था और वसूली क्यों नहीं रुक रही?

यात्रियों को भी झेलनी पड़ रही परेशानी

इस एजेंट सिस्टम का सबसे ज्यादा नुकसान यात्रियों को हो रहा है। कई बार एजेंटों के झगड़े के कारण बसों के रवाना होने में देरी हो जाती है। ग्रामीण इलाकों से आने वाले यात्री घंटों इंतजार करते हैं। माहौल में तनाव रहता है, बहस और चिल्ल-पों होती है। महिलाएं और बच्चे असहज महसूस करते हैं। एक यात्री ने कहा, “बस पकड़ने आते हैं, लेकिन यहां झगड़े देखकर डर लगता है। सुरक्षित यात्रा की उम्मीद खत्म हो जाती है।”

शिकायत पुलिस अधीक्षक तक पहुंची, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं

स्थानीय व्यापारियों, बस संचालकों और कुछ यात्रियों ने इस मामले की शिकायत कई बार रीवा के पुलिस अधीक्षक तक पहुंचाई है। शिकायत में साफ लिखा गया है कि एजेंट बस स्टैंड पर अवैध वसूली कर रहे हैं और पुलिस चौकी इस पर आंख मूंदे बैठी है। लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है और धारणा बन रही है कि शिकायतें सिर्फ कागजों पर दब जा रही हैं।

कानून क्या कहता है?

मध्य प्रदेश के नियमों के मुताबिक बस स्टैंड पर पार्किंग या अन्य कोई शुल्क सिर्फ नगर पालिका या अधिकृत ठेकेदार ही वसूल सकता है। किसी निजी एजेंट या व्यक्ति द्वारा बस चालकों, कंडक्टरों या यात्रियों से पैसे लेना पूरी तरह गैरकानूनी है। अगर यह साबित होता है, तो यह न सिर्फ परिवहन नियमों का उल्लंघन है, बल्कि पुलिस की मिलीभगत का भी मामला बन सकता है।

निष्कर्ष

रीवा के पुराने बस स्टैंड पर रोज होने वाली इस कथित एजेंटगिरी और वसूली को लेकर अब सबकी नजरें आला अधिकारियों पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या पुलिस अधीक्षक या जिला प्रशासन इसकी जांच कराएगा? क्या एजेंटों पर कार्रवाई होगी? क्या बस स्टैंड पर पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाएगी?

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