Russia Spy Network Exposed ISI: रूस (Russia) ने पाकिस्तान (Pakistan) की खुफिया एजेंसी ISI के उस जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो उसकी एडवांस्ड एयर डिफेंस और हेलिकॉप्टर तकनीक चुराने की फिराक में था। बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क का मकसद रूस से जुड़े उन दस्तावेजों को हड़पना था जो भारत की सुरक्षा व्यवस्था में अहम भूमिका निभा सकते थे। रूसी खुफिया एजेंसियों (Russian Intelligence Agencies) ने इस कार्रवाई को ‘काउंटर-एस्पियोनेज ऑपरेशन’ के तहत अंजाम दिया। माना जा रहा है कि यह खुलासा न सिर्फ रूस, बल्कि भारत के लिए भी रणनीतिक दृष्टि से बड़ा संकेत है। तो चलिए जानते हैं आखिर पूरा मामला क्या है, कैसे हुआ यह खुलासा और क्या है इसका असर….
कैसे उजागर हुआ रूस में ISI का जाल/Russia Spy Network Exposed ISI
रूस की खुफिया एजेंसियों ने सेंट पीटर्सबर्ग (St. Petersburg) में एक रूसी नागरिक को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर पाकिस्तान (Pakistan) की ISI के लिए काम कर रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह व्यक्ति रूस के एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम से जुड़ी तकनीकी फाइलें विदेश भेजने की कोशिश में था। इससे पहले ही खुफिया एजेंसियों ने गुप्त दस्तावेजों की तस्करी को रोक लिया। गिरफ्तारी के बाद रूस ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया और जांच शुरू की। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और इसका मुख्य टारगेट भारत से जुड़ी रक्षा तकनीक की जानकारी हासिल करना था।

क्या-क्या मिला जासूस के पास से?
गिरफ्तार व्यक्ति के पास से मिले दस्तावेजों ने रूस की खुफिया एजेंसियों को चौका दिया। इनमें Mi-8 AMTShV सैन्य हेलिकॉप्टर और S-400 मिसाइल सिस्टम से जुड़ी संवेदनशील तकनीकी जानकारियां थीं। ये वही सिस्टम हैं जिन्हें भारत ने रूस से खरीदा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर ये जानकारियां लीक हो जातीं, तो भारत की रक्षा रणनीति गंभीर खतरे में पड़ सकती थी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या इसमें पाकिस्तान के दूतावास या किसी तीसरे देश की भूमिका रही। फिलहाल पूछताछ जारी है और रूस इसे अपने सबसे बड़े काउंटर-इंटेलिजेंस ऑपरेशन में से एक मान रहा है।
भारत-रूस रक्षा साझेदारी और ISI की साजिश
भारत और रूस के बीच S-400 डिफेंस सिस्टम की डील रणनीतिक साझेदारी की सबसे अहम कड़ी मानी जाती है। भारत के पास फिलहाल तीन S-400 सिस्टम हैं और दो और आने वाले हैं। यह सिस्टम सीमाओं पर भारत को मजबूत रक्षा कवच देता है। ऐसे में ISI का यह प्रयास सीधा भारत की सैन्य बढ़त को कमजोर करने की कोशिश था। सूत्र बताते हैं कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने भारतीय ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद रूस में अपने नेटवर्क को सक्रिय किया था ताकि भविष्य में भारत की रक्षा क्षमताओं की जासूसी की जा सके।
जासूसी के खेल का ग्लोबल असर
रूस (Russia) ने इस खुलासे को बेहद गंभीरता से लिया है। मॉस्को ने पहले भी पाकिस्तानी मीडिया (Pakistan Media) में चल रही एंटी-रशियन रिपोर्ट्स पर आपत्ति जताई थी। इस घटना ने पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय साख को झटका दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह नेटवर्क सफल हो जाता, तो भारत की रक्षा तकनीक खतरे में पड़ सकती थी और रूस-पाकिस्तान संबंधों में तनाव और बढ़ जाता। इस खुलासे ने एक बार फिर दिखा दिया कि जासूसी की दुनिया में भरोसे और रणनीति के बीच की रेखा कितनी पतली होती है।










