Sambhal Cemetery Land Encroachment: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में शाही जामा मस्जिद के बगल में स्थित कब्रिस्तान की जमीन को लेकर बड़ा विवाद चल रहा है। यह जमीन राजस्व रिकॉर्ड में कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है, लेकिन यहां पर कुछ लोग सालों से मकान और दुकानें बनाकर रह रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि यह अवैध कब्जा है। इस मामले में अब तहसील प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है और कुल 48 लोगों को नोटिस जारी कर दिए हैं। इन लोगों को 15 दिनों के अंदर अपने दस्तावेज पेश करने होंगे, वरना कब्जा हटाने की कार्रवाई हो सकती है।
पैमाइश कैसे हुई और क्या निकला सामने?/Sambhal Cemetery Land Encroachment
यह पूरा मामला संभल सदर क्षेत्र के मोहल्ला कोट पूर्वी का है। यहां जामा मस्जिद से सटे कब्रिस्तान की करीब 8 बीघा (लगभग 4780 वर्ग मीटर) जमीन पर कब्जे की शिकायत मिली थी। शिकायत के बाद 30 दिसंबर को प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जमीन की पैमाइश कराई। पैमाइश में पता चला कि इस जमीन पर 22 मकान और दुकानें बनी हुई हैं। ये संरचनाएं अवैध तरीके से बनाई गई हैं, क्योंकि राजस्व अभिलेखों में पूरी जमीन कब्रिस्तान ही दर्ज है। कोई मकान या दुकान का रिकॉर्ड नहीं है।

पैमाइश के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस ने इलाके में फ्लैग मार्च किया और ड्रोन से निगरानी की, ताकि कोई गड़बड़ी न हो। जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने बताया कि पैमाइश शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हुई। अब प्रशासन का फोकस अवैध कब्जों को हटाने पर है।
नोटिस क्यों और कितनों को दिए गए?
पैमाइश के बाद तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह की अगुवाई में टीम ने कार्रवाई की। पहले तो 22 मकान और दुकानों की पहचान हुई, लेकिन जांच में पता चला कि इनमें कई परिवार रह रहे हैं। एक मकान या दुकान में कई लोग रहते हैं, इसलिए हर व्यक्ति को अलग-अलग नोटिस दिया गया। कुल मिलाकर 48 लोगों को नोटिस थमाए गए।
नोटिस में साफ लिखा है कि 15 दिनों के अंदर ये लोग अपने दस्तावेज और जवाब प्रशासन के सामने पेश करें। दस्तावेजों से साबित करना होगा कि उनका कब्जा वैध है। तहसीलदार ने कहा कि अगर समय पर जवाब नहीं आया या दस्तावेज संतोषजनक नहीं हुए, तो कानून के तहत कब्जा हटाया जाएगा। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी होगी और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराना सरकार की प्राथमिकता है।
प्रभावित लोगों का क्या कहना है?
नोटिस मिलने के बाद इलाके में हलचल मच गई है। एक दुकानदार सालिम खान ने बताया कि उन्हें नोटिस मिल गया है। वे कहते हैं कि अब जो भी जवाब और दस्तावेज हैं, वो प्रशासन को दे देंगे। कई स्थानीय लोग दशकों से यहां रह रहे हैं और उनका दावा है कि वे पुराने निवासी हैं। कुछ का कहना है कि यह जमीन उनके पूर्वजों के समय से इस्तेमाल हो रही है। लेकिन प्रशासन का स्टैंड साफ है – राजस्व रिकॉर्ड ही अंतिम साक्ष्य होंगे।
आगे इसमें क्या हो सकता है
15 दिनों की मोहलत खत्म होने के बाद अगर लोग संतोषजनक जवाब नहीं देते, तो बड़ा एक्शन हो सकता है। प्रशासन ने पहले ही डाटा तैयार करना शुरू कर दिया है – किसने कितनी जमीन पर कब्जा किया, कब से रह रहा है, आदि। संभल में पहले भी अतिक्रमण हटाओ अभियान चले हैं, जिसमें बुलडोजर का इस्तेमाल हुआ है। यहां भी अगर जरूरत पड़ी तो वैसी कार्रवाई हो सकती है।
यह मामला संवेदनशील है, क्योंकि यह धार्मिक स्थल से जुड़ा है। जामा मस्जिद संभल की ऐतिहासिक इमारत है और कब्रिस्तान भी पुराना है। प्रशासन बार-बार कह रहा है कि कार्रवाई निष्पक्ष और कानून के दायरे में होगी। इलाके में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस मुस्तैद है। पूरे जिले की नजरें इस पर टिकी हैं कि 15 दिन बाद क्या होता है।
निष्कर्ष
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सरकारी या सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जा कितनी बड़ी समस्या है। प्रशासन का कहना है कि वे सिर्फ रिकॉर्ड के हिसाब से काम कर रहे हैं। प्रभावित लोग अगर अपने दस्तावेज मजबूत रखते हैं, तो शायद बचाव कर लें। लेकिन अगर नहीं, तो कब्जा जाना तय है। उम्मीद है कि मामला शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ जाए और किसी को अनावश्यक परेशानी न हो। संभल जैसे संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सबसे जरूरी है।










