बदायूं ( Badaun ) के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में बीती 16 व 17 नंवबर की रात्रि में साईं मंदिर के पुजारी की अज्ञात हत्यारों ने हाथ-पैर बांधकर गला दबाकर हत्या और भगवान के दो चांदी के मुकुट लूट की वारदात को अंजाम दिया था। इस घटना के बदायूं एसएसपी बृजेश कुमार सिंह, एडीजी बरेली, डीएम सहित आला अफसरों ने घटनास्थल कर जल्द खुलासे के लिए पुलिस की चार अलग-अलग टीमें गठित की गई।
वहीं घटना को अंजाम देने वाले बदमाशों पर पच्चीस-पच्चीस हजार का ईनाम घोषित किया गया। आज बुधवार को एसएसपी बृजेश कुमार सिंह ने पुजारी हत्याकांड और लूटपाट की वारदात का सनसनीखेज खुलासा किया है। पुलिस ने लूटी गई संपत्ति बरामद करते हुए तीन आरोपितों को अरेस्ट कर कोर्ट में पेश किया है।

दरअसल बदायूं के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में 16 व 17 नंवबर की रात शहर के खेड़ा बुजुर्ग नवादा पुलिस चौकी से 50 मीटर की दूरी पर स्थित सर्वेश्वर साईं मंदिर परिसर में कमरे में सो रहे पुजारी मनोज शंखधार की अज्ञात बदमाशों ने हाथ-पैर बांधकर अंगोछे से गला दबाकर निर्मम तरीके से हत्या कर दी साथ ही बदमाश मंदिर परिसर से भगवान के दो चांदी के मुकुट और सीसी कैमरे की डीवीआर लूट ले गए। पुलिस ने इस घटना के बाद मृतक पुजारी के बहनोई सत्येंद्र मिश्रा की तहरीर पर एफआईआर दर्ज कर वारदात की तप्दीश शुरू की।
घटना के खुलासे के लिए अफसरों ने अलग-अलग पुलिस की चार टीमें गठित की। पुलिस को मुखबिर तंत्र आदि से क्लू मिलें। और वारदात में संलिप्त आरोपित दो सगे भाई विशेष कुमार उर्फ छोटू और नीतेश कुमार पुत्र अमरीश चंद्र शर्मा निवासी गांव व थाना परौर जिला शाहजहांपुर और हिमांशु पुत्र सत्यदेव निवासी ग्राम मनसा नगला थाना उसावां जिला बदायूं को अरेस्ट किया गया। पुलिस ने इनके पास से साईं मंदिर परिसर से लूटे गए भगवान के दो मुकुट, घटना शामिल एक मोटरसाइकिल बरामद की है। तीनों बदमाशों पर बदायूं पुलिस ने पच्चीस-पच्चीस हजार रूपये का ईनाम घोषित किया था।
पुजारी हत्याकांड में लव अफेयर एंगल
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार अभियुक्तों ने पुछतांछ के दौरान बताया कि विशेष कुमार उर्फ छोटे और नीतेश कुमार की बड़ी बहन की शादी मृतक पुजारी के बड़े भाई प्रदीप शर्मा के साथ हुई थी। लेकिन उनकी बहन की बीमारी के चलते तीन साल पहले मृत्यू हो गई। वहीं उनकी एक दूसरी बहन जब अविवाहित थी,जोकि तब वह अक्सर बड़ी बहन की ससुराल में प्रदीप शर्मा के घर रहा करती थी। चूंकि मृतक पुजारी मनोज शंखधार प्रदीप का सगा छोटा भाई था, और वो भी वहां आया करता था, इसी बीच पुजारी मनोज और प्रदीप की साली के बीच लव अफेयर शुरू हो गया और मनोज उससे विवाह करना चाहता था। लेकिन प्रदीप के ससुराल वालों ने इस शादी की रजावंदी नहीं दी, और फिर उसकी शादी आरोपित हिमांशु के साथ कर दी गई। लेकिन शादी के बाद भी पुजारी मनोज भाई प्रदीप की साली के संपर्क में बना रहा यानि की उसका अफेयर जारी रहा। पुजारी मनोज की लव स्टोरी का पता जब हिमांशु का लगा उसकी पत्नी शादी से पूर्व से मनोज के प्रेमजाल में थी, तो इसको लेकर गृह क्लेश शुरू हो गया। दोनों दंपत्ति के बीच मनमुटाव हुआ तो प्रदीप की साली ने अपने पति हिमांशु पर वर्ष 2020 में थाना उसावां में दहेज उत्पीड़न की धाराओं में एफआईआर दर्ज करा दी। इसके बाद रिश्तेदारों ने दोनों दंपत्ति के बीच सुलह समझौता करा दिया शर्त ये थी कि इनके वैवाहिक रिश्तों में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा। लेकिन कुछ दिनों तक तो सबकुछ ठीक-ठीक चला लेकिन कुछ समय बाद पुजारी मनोज भाई प्रदीप की साली के फिर संपर्क करने लगा। पुन: मतभेद शुरू हो गए। मनोज समझाने पर भी भाई की साली अपनी प्रेमिका का साथ छोड़ने का राजी नहीं था।
परेशान होकर आरोपितों ने रची पुजारी की हत्या की साजिश
पुलिस ने खुलासा करते हुए बताया कि बहन से पुजारी मनोज के अफेयर से परेशान होकर आरोपित दोनों सगे भाई विशेष कुमार,नीतेश कुमार और बहनोई हिमांशु के साथ पुजारी मनोज को मौत के घाट उतारने की साजिश रची। साजिश के तहत 16 व 17 की रात्रि तीनों आरोपितों ने पुजारी मनोज शंखधार के साईं मंदिर परिसर में कमरे में जाकर हाथ-पैर बांधकर अंगोछे से गला दबाकर हत्या कर दी। घटना से ध्यान भटकाने के लिए लूटपाट का रूप देने के लिए मृतक पुजारी का मोबाइल और मंदिर से भगवान के चांदी के दो मुकुट, सीसीटीवी का डीवीआर भी निकालकर ले गए।
कैसे दिया वारदात को अंजाम
तीनों आरोपितों ने योजना के तहत नीतेश शाम को साढ़े सात बजे चे आसपास मंदिर परिसर में आकर पुजारी मनोज शंखधार के कमरे में रूक गया और सो गया। बाकी दोनों आरोपी हिमांशु और विशेष कुमार आधी रात के बाद 1.45 बजे के करीब पहुंच गए। जहां नीतेश ने मंदिर का गेट खोल दिया फिर तीनों आरोपितों ने हाथ-पैर बांधकर पुजारी मनोज शंखधार की गला घोंटकर हत्या और लूटपाट की वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद सभी फरार हो गए। लेकिन कहतें है ना कि गुनहगार कितना भी शातिर क्यों ना हो आखिर पकड़ा ही जाता है। पुलिस को तप्दीश के दौरान क्लू मिले और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर घटना का पर्दाफाश कर पुलिस ने जेल की सलाखों के पीछे भेज ही दिया।










