Shivalik LPG Tanker: देश में पिछले कुछ दिनों से रसोई गैस (LPG) सिलेंडर की कमी की खबरें आ रही हैं। कई शहरों में लोग सिलेंडर भरवाने के लिए लंबी कतारों में लगे हैं। इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में इजराइल-ईरान युद्ध की वजह से हो रही अशांति है। खाड़ी क्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर तनाव बढ़ गया है, जो दुनिया के बड़े तेल और गैस रूट का हिस्सा है। भारत का ज्यादातर LPG इसी रास्ते से आता है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि आज (16 मार्च 2026) एक बड़ा LPG टैंकर जहाज ‘शिवालिक’ मुंद्रा पोर्ट (गुजरात) पहुंच रहा है। यह जहाज करीब 45,000 से 46,000 टन LPG लेकर आ रहा है, जो घरेलू सप्लाई को बड़ी राहत देगा।
शिवालिक जहाज क्या है और यह कितना बड़ा है?/Shivalik LPG Tanker
शिवालिक एक वेरी लार्ज गैस कैरियर (VLGC) है। ऐसे जहाज दुनिया में LPG जैसे तरलीकृत गैस को बड़े पैमाने पर समुद्र पार लेकर जाने के लिए बनाए जाते हैं। ये बहुत बड़े और शक्तिशाली जहाज होते हैं, जिनमें मजबूत इंजन लगे होते हैं। शिवालिक भारत का झंडा लगा जहाज है और यह कतर के रास लफ्फान पोर्ट से निकला था। इसने होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार किया, जहां युद्ध के कारण कई जहाज फंसे हुए थे। भारतीय नौसेना की मदद से यह जहाज सुरक्षित भारत की ओर बढ़ा।

यह जहाज अकेला नहीं है। इसके साथ एक और जहाज ‘नंदा देवी’ भी है, जो कांडला पोर्ट पहुंचेगा। दोनों मिलाकर कुल 92,700 टन LPG लेकर आ रहे हैं। यह मात्रा भारत की रोजाना LPG जरूरत का लगभग 1 से 1.25 दिन जितनी है। भारत में रोजाना करीब 80,000 से 90,000 टन LPG की खपत होती है, और सालाना 33 मिलियन टन से ज्यादा। 60% से ज्यादा LPG आयात होता है, जिसमें से ज्यादातर पश्चिम एशिया से आता है। इसलिए यह जहाजों का आना बहुत महत्वपूर्ण है।
एक घंटे में इतना तेल पीता है शिवालिक?
अब आते हैं मुख्य सवाल पर – शिवालिक जैसे बड़े जहाज एक घंटे में कितना ईंधन (तेल) जलाते हैं? आधिकारिक तौर पर शिवालिक की सटीक खपत बताई नहीं गई है, लेकिन इसी तरह के VLGC जहाजों के आधार पर उद्योग के विशेषज्ञ अनुमान लगाते हैं।
- ऐसे जहाज रोजाना 35 से 50 टन हैवी फ्यूल ऑयल (Heavy Fuel Oil) जलाते हैं। हैवी फ्यूल ऑयल बड़े जहाजों का मुख्य ईंधन होता है, जो सस्ता और ज्यादा पावर देता है।
- अगर रोजाना 35-50 टन को 24 घंटे में बांटें, तो प्रति घंटे 1.5 से 2 टन ईंधन खपत होती है।
- यह मात्रा 1800 से 2400 लीटर तेल के बराबर होती है हर घंटे।
यह खपत जहाज की स्पीड, समुद्र की स्थिति, इंजन का लोड और माल के वजन पर निर्भर करती है। अगर जहाज तेज चल रहा हो या लहरें ज्यादा हों, तो ईंधन ज्यादा लगता है। ऐसे में एक लंबी यात्रा में लाखों लीटर तेल लग जाता है, लेकिन LPG की ढुलाई के लिए यह जरूरी होता है।
इजराइल-ईरान युद्ध का असर क्या है
इजराइल और ईरान (Israel & Iran)के बीच तनाव बढ़ने से दुनियां को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर जहाजों का आवागमन प्रभावित हुआ। ईरान ने कुछ टाइम के लिए रास्ता ब्लॉक किया, जिससे तेल और गैस की सप्लाई रुक गई है। भारत जैसे देशों में LPG की कमी हो गई क्योंकि 90% आयात इसी रास्ते से आता है।
सरकार ने ईरान के साथ बातचीत की और भारतीय जहाजों को सुरक्षित पासेज दिया गया। शिवालिक और नंदा देवी को भारतीय नौसेना की मदद से एस्कॉर्ट किया गया। यह दिखाता है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए कितना गंभीर है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कहा कि जहाजों को केस-बाय-केस आधार पर पास किया जा रहा है।
क्या यह राहत स्थायी होगी?
शिवालिक का आज पहुंचना और नंदा देवी का कल पहुंचना LPG की कमी को काफी हद तक कम कर देगा। 92,700 टन LPG से लाखों सिलेंडर भरे जा सकते हैं। लेकिन समस्या जड़ से खत्म नहीं हुई है। अगर युद्ध लंबा चला तो और जहाज फंस सकते हैं। भारत सरकार अन्य रास्तों और सप्लायर्स से भी बात कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न आए।










