Sonam Wangchuk Hunger Strike के तहत उन्होंने ऐलान किया है कि वह लद्दाख के लोगों के अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर दोबारा अनशन पर बैठने को मजबूर हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि, “मैं खुश होकर अनशन नहीं कर रहा हूं। यह आसान नहीं है। मैं मर भी सकता हूं, लेकिन पीछे नहीं हटूंगा।”
सोनम वांगचुक का यह बयान ऐसे समय में आया है जब लद्दाख में संवैधानिक सुरक्षा, राज्य का दर्जा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर आंदोलन लगातार जारी है। उनका कहना है कि सरकार के साथ सार्थक संवाद की उम्मीद थी, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें एक बार फिर अनशन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर कर दिया।

क्यों कर रहे हैं सोनम वांगचुक अनशन?
लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लंबे समय से केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लिए विशेष संवैधानिक सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि लद्दाख की सांस्कृतिक पहचान, पर्यावरण और स्थानीय संसाधनों की सुरक्षा के लिए संवैधानिक प्रावधान आवश्यक हैं।
- वांगचुक और उनके समर्थकों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की जाए।
- लद्दाख को राज्य का दर्जा दिया जाए।
- स्थानीय लोगों को अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिले।
- क्षेत्र की पर्यावरणीय और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा की जाए।
“मर जाऊंगा, लेकिन पीछे नहीं हटूंगा”
सोनम वांगचुक ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें फिर से अनशन पर बैठना पड़ेगा। उन्होंने कहा,
“मैं सोच रहा था कि मुझे दोबारा विरोध प्रदर्शन नहीं करना पड़ेगा। मैं दुखी हूं कि मुझे फिर से अनशन करना पड़ रहा है। मैं इसे खुशी से नहीं कर रहा हूं। यह आसान नहीं है। मैं मर भी सकता हूं, लेकिन अपने कदम पीछे नहीं हटाऊंगा।”
उनके इस बयान ने लद्दाख आंदोलन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पर भी उनके समर्थन में बड़ी संख्या में लोग अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
लद्दाख आंदोलन का क्या है पूरा मामला?
साल 2019 में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के बाद लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया था। इसके बाद से ही क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने संवैधानिक सुरक्षा, राज्य का दर्जा और स्थानीय अधिकारों को लेकर आंदोलन शुरू किया।
लद्दाख के लोगों का कहना है कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद उनकी राजनीतिक भागीदारी और स्थानीय अधिकारों को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। इसी मुद्दे को लेकर विभिन्न संगठन लगातार सरकार से बातचीत और समाधान की मांग कर रहे हैं।
सरकार से बातचीत की उम्मीद
सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि सरकार के साथ बातचीत के जरिए कोई सार्थक समाधान निकलेगा, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है तथा इसका उद्देश्य केवल लद्दाख के लोगों की आवाज को देश के सामने रखना है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोनम वांगचुक का यह नया अनशन लद्दाख से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला सकता है।
आंदोलन पर देशभर की नजर
सोनम वांगचुक का आंदोलन केवल लद्दाख तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, क्षेत्रीय अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ गया है। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली बातचीत पर देशभर की नजर बनी रहेगी।
Sonam Wangchuk Hunger Strike: प्रमुख बातें
- सोनम वांगचुक ने दोबारा अनशन शुरू करने का ऐलान किया।
- संवैधानिक सुरक्षा, राज्य का दर्जा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रमुख मांगें।
- वांगचुक ने कहा, “मर भी गया तो पीछे नहीं हटूंगा।”
- लद्दाख आंदोलन लंबे समय से जारी है।
- सरकार से सार्थक संवाद की उम्मीद जताई गई।
- आंदोलन को देशभर में समर्थन मिल रहा है।










