Padma Shri Farmer Ramsaran Verma : बाराबंकी के दौलतपुर गांव में 12 दिसंबर 2025 को एक खास कार्यक्रम हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पद्मश्री किसान रामसरन वर्मा के फार्म हाउस पर पहुंचे। यहां ‘खेती की बात खेत पर’ नाम के कृषक सम्मेलन में रबी मौसम की किसान पाठशाला का शुभारंभ किया गया। हजारों किसान जुटे थे और माहौल जोश से भरा था। इस मौके पर रामसरन वर्मा ने अपनी जिंदगी की मेहनत की कहानियां सुनाईं, जो हर किसान के लिए प्रेरणा बन गईं।
रामसरन वर्मा का गर्मजोशी भरा स्वागत और मजेदार किस्से

कार्यक्रम की शुरुआत में पद्मश्री रामसरन वर्मा ने सभी किसानों की तरफ से सीएम योगी का दिल से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि योगी जी ने कृषि के क्षेत्र में रामराज्य जैसा माहौल बना दिया है। छोटे और सीमांत किसान प्रदेश की असली ताकत हैं और उनकी आमदनी बढ़ने से ही यूपी विकास की राह पर तेजी से दौड़ रहा है।
रामसरन वर्मा ने सरकार की योजनाओं की तारीफ करते हुए कहा कि समर्थन मूल्य, गन्ने का समय पर भुगतान और तरह-तरह के कृषि अनुदान किसानों की तरक्की का बड़ा आधार बने हैं। फिर उन्होंने अपनी कहानी सुनानी शुरू की। बोले, “1988 में मैंने बैलों से हल चलाकर खेती की शुरुआत की थी। उस समय सिर्फ कुछ एकड़ जमीन थी और मेहनत बहुत। लेकिन आज मैं प्रगतिशील किसान बन चुका हूं। आज मैं सवा लाख रुपये का चश्मा पहनता हूं और ये सब सरकार की नीतियों और अपनी मेहनत की बदौलत Possible है।”
इस बात पर पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा। लोग हंसते-हंसते लोट-पोट हो गए। सीएम योगी भी मुस्कुरा पड़े। रामसरन वर्मा ने आगे कहा कि वे सालाना मजदूरों को 2 करोड़ रुपये की मजदूरी देते हैं और साल में 40-50 हजार हवाई यात्राएं करते हैं। ये सब खेती की सफलता और सरकार के सहयोग से हुआ है।
एक मजेदार वाकया और हुआ। जब प्रगतिशील किसानों के नाम पढ़े जा रहे थे और रामसरन वर्मा का नाम आया, तो वे खुद ही बोल उठे, “ये तो हमारा नाम है!” इस पर फिर हंसी की लहर दौड़ गई और सीएम योगी भी हंस पड़े। ऐसे पल ने पूरे कार्यक्रम को हल्का-फुल्का और यादगार बना दिया।
सीएम योगी का खेत पर दौरा और किसानों को संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रामसरन वर्मा के खेत पर किसान पाठशाला शुरू करने पहुंचे थे। उन्होंने सबसे पहले कृषि क्षेत्र का निरीक्षण किया। विभिन्न फसलों को देखा, जैसे केला, आलू, टमाटर, शिमला मिर्च और मेंथा। गोल लौकी देखकर खास तारीफ की। कृषि स्टालों पर गए और प्रगतिशील किसानों से बात की।
पाठशाला का उद्घाटन करते हुए सीएम ने किसानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कई किसानों जैसे पंकज कुमार, संजय कुमार यादव, अमित मिश्रा आदि को सम्मान मिला। कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख और सतीश चंद्र शर्मा भी मौजूद थे। उन्होंने सीएम का स्वागत किया।
सीएम योगी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि परंपरागत खेती के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली फसलें, सब्जियां, फल और प्राकृतिक खेती अपनाएं। इससे आमदनी कई गुना बढ़ेगी। उन्होंने रामसरन वर्मा का उदाहरण दिया कि सीमित जमीन पर भी वैज्ञानिक तरीकों से शानदार उत्पादन हो सकता है। एक एकड़ में 250 क्विंटल आलू और 2 लाख रुपये का केला उत्पादन इसका जीता-जागता सबूत है।
योगी जी ने बताया कि पहले किसान सुविधाओं के लिए तरसते थे, लेकिन अब सब कुछ उपलब्ध है। सिंचाई, बिजली, सड़क, मंडी और सब्सिडी जैसी योजनाएं चल रही हैं। धरती का स्वास्थ्य बनाए रखें, कम उर्वरक इस्तेमाल करें। प्रदेश में 4000 करोड़ की योजनाएं चल रही हैं। बाराबंकी में केले के टिशू कल्चर की अलग योजना आएगी।
रामसरन वर्मा, एक प्रेरणा की मिसाल
रामसरन वर्मा की कहानी हर किसान को प्रेरित करती है। 1988 में 6 एकड़ से शुरू की खेती आज सहकारी मॉडल पर 275 एकड़ तक पहुंच गई है। वे केला (जी-9 प्रजाति), टमाटर, आलू, तरबूज, खरबूजा, गेहूं आदि उगाते हैं। बहु-फसली तरीके से लागत कम और उत्पादन ज्यादा करते हैं। एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन) के जरिए सहकारी खेती को बढ़ावा देते हैं।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि दौलतपुर में रामसरन वर्मा की वजह से किसानों के घर दौलत बरस रही है। यहां उन्नत खेती हो रही है और आमदनी तीन गुना होने की राह पर है।
यह कार्यक्रम सिर्फ एक सम्मेलन नहीं था, बल्कि किसानों को नई तकनीक, नवाचार और सरकार की योजनाओं से जोड़ने का मंच था। सीएम योगी का खेत पर आना और रामसरन वर्मा जैसे किसान की सफलता देखना सबको उत्साहित कर गया। यूपी में कृषि क्रांति की यह झलक दिखाती है कि मेहनत और सही नीतियां मिलें तो बैल से हल चलाने वाला किसान भी सवा लाख का चश्मा पहन सकता है। ऐसे कार्यक्रम से किसानों का हौसला बढ़ेगा और प्रदेश की कृषि और मजबूत होगी।










