Tu Meri Main Tera Movie Review: मोहब्बत की खुशबू में लिपटी मॉडर्न लव स्टोरी, कार्तिक आर्यन-अनन्या पांडे की फिल्म कितनी असरदार?

Tu Meri Main Tera Movie Review: ‘तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी’ में प्यार, परिवार और फैसलों की परीक्षा, फिल्म देखने लायक या नहीं?

Tu Meri Main Tera Movie Review: बदलते दौर की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में अगर कोई फिल्म ठहरकर प्यार को महसूस करने का मौका देती है, तो वह है ‘तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी’। कार्तिक आर्यन (Kartik Aaryan) और अनन्या पांडे (Ananya Panday) स्टारर यह रोमांटिक कॉमेडी आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म बड़े ड्रामे या चौंकाने वाले ट्विस्ट का दावा नहीं करती, बल्कि रिश्तों की सादगी, भावनाओं की उलझन और प्यार बनाम ज़िम्मेदारी जैसे सवालों को सामने रखती है। निर्देशक समीर विद्वान (Sameer Vidwans) एक बार फिर रिश्तों की संवेदनशील परतों को टटोलते नजर आते हैं। लेकिन क्या यह फिल्म दिल को छू पाती है या फिर जानी-पहचानी कहानी में उलझकर रह जाती है? अभिनय, कहानी और निर्देशन कितना मजबूत है चलिए जानते हैं विस्तार से…

कहानी की बुनियाद और भावनात्मक पृष्ठभूमि/Tu Meri Main Tera Movie Review

फिल्म की कहानी रेहान उर्फ रे (Kartik Aaryan) और रूमी (Ananya Panday) के इर्द-गिर्द घूमती है। रे एक आज़ाद ख्याल इंसान है, जो भविष्य की चिंता किए बिना आज में जीना पसंद करता है, जबकि रूमी भावनात्मक रूप से परिपक्व है और अपने परिवार, खासकर अपने पिता से गहराई से जुड़ी हुई है। एक ट्रिप के दौरान दोनों की मुलाकात होती है और दोस्ती कब प्यार में बदल जाती है, यह उन्हें खुद भी पता नहीं चलता। शुरुआती हिस्से में फिल्म हल्की-फुल्की, मुस्कुराहट बिखेरने वाली और फ्रेश लगती है। कहानी का टोन सादा है, जो आज की पीढ़ी के रिश्तों को बिना भारीपन के दिखाने की कोशिश करता है। यही सादगी फिल्म की ताकत भी बनती है और कुछ जगहों पर इसकी सीमा भी।

कहानी में मोड़ और रिश्तों की टकराहट

फिल्म असली रफ्तार तब पकड़ती है, जब रे रूमी के सामने शादी का प्रस्ताव रखता है। यहीं से कहानी रोमांटिक कॉमेडी से आगे बढ़कर ज़िम्मेदारियों और त्याग की बात करने लगती है। रे की ज़िंदगी अमेरिका (USA) में सेट है, जबकि रूमी अपने पिता को अकेला छोड़ने की कल्पना से ही परेशान है। बहन की शादी और विदेश जाने की तैयारियां उसके मन के द्वंद्व को और गहरा कर देती हैं। प्यार और परिवार के बीच फंसी रूमी का संघर्ष फिल्म का इमोशनल कोर बनता है। हालांकि, यह टकराव भावनात्मक रूप से प्रभावी है, लेकिन कुछ मोड़ पहले से अनुमानित लगते हैं। फिर भी, रिश्तों की यह खींचतान दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।

निर्देशन, संगीत और तकनीकी पक्ष

निर्देशक समीर विद्वान (Sameer Vidwans) ने फिल्म को जानबूझकर सरल रखा है। ह्यूमर, रोमांस और इमोशन के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश साफ दिखती है। हालांकि, दूसरे हाफ में कहानी थोड़ी खिंचती है और कुछ दृश्य गैर-जरूरी लंबे लगते हैं। सिनेमैटोग्राफी रिश्तों की गर्माहट और त्योहारों के रंगों को खूबसूरती से कैद करती है। बैकग्राउंड स्कोर भावनाओं को सपोर्ट करता है, बिना हावी हुए। फिल्म का संगीत इसकी आत्मा कहा जा सकता है- गाने कहानी के साथ बहते हैं और रोमांटिक पलों को असरदार बनाते हैं। एडिटिंग अगर थोड़ी और टाइट होती, तो फिल्म का असर और गहरा हो सकता था।

अभिनय, खामियां और अंतिम फैसला

अभिनय की बात करें तो कार्तिक आर्यन (Kartik Aaryan) अपने चिर-परिचित चार्म के साथ रे के किरदार में फिट बैठते हैं। ह्यूमर और भावनात्मक कमजोरी के बीच उनका संतुलन सराहनीय है। अनन्या पांडे (Ananya Panday) रूमी के रोल में पहले से ज्यादा मैच्योर और कॉन्फिडेंट नजर आती हैं। नीना गुप्ता (Neena Gupta) मां के किरदार में गहराई जोड़ती हैं, जबकि जैकी श्रॉफ (Jackie Shroff) पिता के रूप में कम स्क्रीन टाइम में प्रभाव छोड़ते हैं। खामियों की बात करें तो दूसरा हाफ थोड़ा लंबा लगता है और कुछ सीन दोहराव का अहसास देते हैं। कुल मिलाकर, यह फिल्म सुकून देने वाली रोमांटिक कहानी है—अगर आप हल्की, भावनात्मक और रिलेशनशिप-ड्रिवन फिल्म देखना चाहते हैं, तो यह एक बार जरूर देखी जा सकती है।

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