US Wont Repeat China Mistake With India: ‘भारत के साथ चीन वाली गलती नहीं दोहराएंगे…’ ट्रंप के करीबी क्रिस्टोफर लैंडाउ का बड़ा बयान

US Wont Repeat China Mistake With India: 'हम भारत को चीन जैसा नहीं बनने देंगे' – ट्रंप के डिप्टी सेक्रेटरी का चौंकाने वाला बयान

US Wont Repeat China Mistake With India: नई दिल्ली में चल रहे रायसीना डायलॉग 2026 में अमेरिका के डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्रिस्टोफर लैंडाउ ने भारत-अमेरिका संबंधों पर महत्वपूर्ण बातें कहीं। ट्रंप प्रशासन के करीबी माने जाने वाले लैंडाउ ने साफ कहा कि अमेरिका भारत के साथ वह गलती नहीं दोहराएगा, जो 20 साल पहले चीन के साथ हुई थी। उन्होंने ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को दोहराते हुए जोर दिया कि साझेदारी दोनों देशों के हित में होनी चाहिए, न कि एकतरफा।

रायसीना डायलॉग में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व/US Wont Repeat China Mistake With India

रायसीना डायलॉग दुनिया का प्रमुख भू-राजनीतिक मंच है, जहां विभिन्न देशों के नेता और अधिकारी वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करते हैं। इस साल 2026 के डायलॉग में क्रिस्टोफर लैंडाउ ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। वे 3 से 6 मार्च तक भारत दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने भारतीय अधिकारियों से रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, ड्रग्स रोकथाम और आर्थिक सहयोग जैसे विषयों पर बातचीत की। लैंडाउ ने कहा कि अमेरिका फर्स्ट नीति का मतलब अमेरिका अकेला नहीं है, बल्कि यह दूसरे देशों के साथ संतुलित साझेदारी पर आधारित है।

चीन वाली गलती फिर से नहीं दोहराएंगे

लैंडाउ ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला बयान चीन को लेकर दिया। उन्होंने कहा, “हम भारत के साथ वही गलती नहीं करेंगे जो हमने चीन के साथ 20 साल पहले की थी। हमने बोला था तुम बाजार डेवलप करो और अगले ही पल तुम हमें कई कमर्शियल चीजों में हरा रहे हो। उनका मतलब था कि अमेरिका ने चीन को बाजार खोलकर बड़ा किया, लेकिन बाद में चीन अमेरिकी कंपनियों को टक्कर देने लगा। अब भारत के साथ ट्रेड और आर्थिक संबंधों में अमेरिका सतर्क रहेगा। कोई भी समझौता ‘फेयर’ और ‘रेसिप्रोकल’ (परस्पर लाभकारी) होना चाहिए। लैंडाउ ने जोर दिया कि अमेरिकी सरकार अपने लोगों के प्रति जवाबदेह है, ठीक वैसे ही जैसे भारतीय सरकार अपने नागरिकों के प्रति।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील की चर्चा तेज हो गई है। लैंडाउ ने इसे ‘फिनिश लाइन’ पर बताया, यानी समझौता अब अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा, “हम इस ट्रेड डील को लेकर बहुत एक्साइटेड हैं जो अब फिनिश लाइन पर है।” यह डील दोनों देशों के लिए बड़ी आर्थिक संभावनाएं खोलेगी, लेकिन अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि भारत अमेरिकी बाजार में हावी न हो जाए।

‘अमेरिका फर्स्ट’ का मतलब क्या है?

लैंडाउ ने ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “अमेरिका फर्स्ट का मतलब अमेरिका अकेला नहीं है। जैसे प्रेसिडेंट ट्रंप अमेरिका को फिर महान बनाना चाहते हैं, वैसे ही वे भारत के प्रधानमंत्री या दूसरे लीडर्स से भी उम्मीद करते हैं कि वे अपने देश को महान बनाएं।” उनका कहना था कि साझेदारी चैरिटी या सोशल वर्क के लिए नहीं है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “मैं यहां सोशल वर्क या चैरिटी करने नहीं आया हूं। मैं यहां इसलिए हूं क्योंकि यह हमारे देश के हित में है और हम मानते हैं कि भारत के हित में भी है कि हमारी पार्टनरशिप गहरी हो।

ट्रंप के करीबी होने के नाते लैंडाउ ने ट्रंप की ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ वाली सोच को भारत के संदर्भ में भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी भारत की होगी, क्योंकि भारत में लगभग असीमित संभावनाएं हैं। अमेरिका भारत के उदय को सपोर्ट करना चाहता है, लेकिन संतुलित तरीके से।

ट्रेड डील से क्या फायदे?

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बातें पिछले कुछ समय से चल रही हैं। हाल ही में अंतरिम फ्रेमवर्क पर सहमति बनी, जिसमें टैरिफ कम करने जैसे कदम शामिल हैं। लैंडाउ ने कहा कि यह डील दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाएगी, आर्थिक सहयोग मजबूत करेगी और अमेरिकी कंपनियों को भारत में बेहतर बाजार पहुंच देगी। भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन चुका है और इसकी अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। अमेरिका इसे पार्टनर के रूप में देखना चाहता है, खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में।

ऊर्जा और अन्य मुद्दों पर भी चर्चा

लैंडाउ ने ऊर्जा सहयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के लिए बेहतर ऊर्जा स्रोत बन सकता है, खासकर जब होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे क्षेत्रों में चुनौतियां हैं। ईरान-इजरायल-अमेरिका तनाव के बीच अमेरिका खुद को वैकल्पिक तेल आपूर्तिकर्ता के रूप में पेश कर रहा है। हालांकि, लैंडाउ ने ईरान-इजरायल युद्ध पर सीधे कमेंट नहीं किया, लेकिन वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर बात की।

निष्कर्ष

क्रिस्टोफर लैंडाउ के बयानों से लगता है कि ट्रंप प्रशासन भारत के साथ गहरे संबंध चाहता है, लेकिन ‘अमेरिका फर्स्ट’ के तहत। चीन वाली गलती से सबक लेते हुए अमेरिका सुनिश्चित करेगा कि ट्रेड डील से कोई एक देश दूसरे पर हावी न हो। यह साझेदारी आपसी सम्मान, पारस्परिक लाभ और राष्ट्रीय हितों पर टिकी होगी। रायसीना डायलॉग जैसे मंच पर ऐसे बयान भारत-अमेरिका रिश्तों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। आने वाले दिनों में ट्रेड डील पर मुहर लगने की उम्मीद है, जो दोनों देशों के लिए नई शुरुआत साबित हो सकती है।

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