Raebareli में TET अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

Raebareli : टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया और उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ के बैनर तले गुरुवार को शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन विकास भवन से शुरू होकर कलेक्ट्रेट तक पहुंचा, जहां जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।

क्या है पूरा मामला?

शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से लागू किया गया था। अधिनियम के अनुसार, प्रभावी तिथि अथवा उसके बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया था। जबकि अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त रखा गया था।

हालांकि, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय के बाद देश के सभी राज्यों में यह व्यवस्था लागू कर दी गई है कि अधिनियम लागू होने की तिथि से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को भी सेवा में बने रहने अथवा पदोन्नति प्राप्त करने के लिए टीईटी (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा।

शिक्षकों ने जताई नाराजगी

प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि यह निर्णय पूर्व में नियुक्त शिक्षकों के साथ अन्याय है। उनका तर्क है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति नियमों के तहत हुई और जिन्होंने वर्षों तक सेवा दी है, उन्हें अब नई शर्तों के अधीन करना उचित नहीं है।

टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों ने कहा कि देशभर के शिक्षक इस निर्णय के विरोध में आंदोलनरत हैं और भारत सरकार से मांग कर रहे हैं कि अध्यादेश लाकर आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से स्थायी रूप से छूट प्रदान की जाए।

लगे जोरदार नारे

प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
“जो सरकार निकम्मी है, वह सरकार बदलनी है”
“हमसे जो टकराएगा, चूर-चूर हो जाएगा”
जैसे नारों से कलेक्ट्रेट परिसर गूंज उठा।

प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

शाम करीब 4 बजे विकास भवन से शुरू हुआ जुलूस कलेक्ट्रेट पहुंचा, जहां जिला प्रशासन को राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मांग की गई है कि पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त रखने के लिए केंद्र सरकार शीघ्र अध्यादेश लाए।

शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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