Uttarakhand BJP MLA Arvind Pandey Land Grab: BJP विधायक अरविंद पांडे पर जमीन कब्जाने का गंभीर आरोप, किसान परिवार ने दी आत्महत्या की धमकी

Uttarakhand BJP MLA Arvind Pandey Land Grab: गरीब किसान की जमीन पर BJP विधायक का कब्जा? उत्तराखंड में हंगामा, आत्महत्या धमकी के बाद सरकार पर दबाव

Uttarakhand BJP MLA Arvind Pandey Land Grab: उत्तराखंड के गदरपुर क्षेत्र से भाजपा विधायक अरविंद पांडे एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। एक गरीब किसान और उसकी मां ने विधायक पर उनकी जमीन जबरन कब्जा करने का आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन कहीं से कोई सुनवाई नहीं हो रही। अगर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने उन्हें न्याय नहीं दिलाया, तो वे आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाएंगे। यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों में गुस्सा फैल रहा है। किसान परिवार की यह दर्दभरी कहानी उत्तराखंड की राजनीति और किसानों की समस्याओं पर सवाल खड़े कर रही है।

पीड़ित किसान की आपबीती: जमीन गई, अब जान पर बन आई/Uttarakhand BJP MLA Arvind Pandey Land Grab

पीड़ित किसान ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि उनकी जमीन गदरपुर इलाके में है, जो सालों से उनके परिवार की आजीविका का स्रोत रही है। उन्होंने कहा, “BJP विधायक अरविंद पांडे ने हमारी जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया है। हम गरीब किसान हैं, क्या करें? न्याय के लिए थाने से लेकर कोर्ट तक भटक रहे हैं, लेकिन कोई सुनता नहीं। अगर धामी सरकार ने हमें इंसाफ नहीं दिलाया, तो हम आत्महत्या कर लेंगे।” किसान का आरोप है कि विधायक ने अपनी पावर का इस्तेमाल करके जमीन हथिया ली और अब उनके परिवार को डराया-धमकाया जा रहा है।

किसान की मां ने भी अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा, “पहले तो विधायक ने जबरन हमारी जमीन कब्जा ली। अब हमारे बेटे को मारने की धमकियां मिल रही हैं। हम कहां जाएं? हमारे पास तो बस यही जमीन थी, जिससे हम गुजारा करते थे। अगर सरकार ने मदद नहीं की, तो हम क्या करेंगे?” मां की आंखों में आंसू थे और उनकी बातें सुनकर हर कोई भावुक हो जाता है। यह परिवार गरीबी रेखा से नीचे है और जमीन उनके लिए सब कुछ है। बिना जमीन के वे बेघर और बेरोजगार हो गए हैं। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में जमीन की कमी पहले से ही एक बड़ी समस्या है, और ऐसे में राजनीतिक लोगों द्वारा कब्जा करना किसानों के लिए दोहरी मार है।

विधायक अरविंद पांडे कौन हैं? उनका राजनीतिक सफर

अरविंद पांडे उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के गदरपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक हैं। वे पहले भी कई बार चुनाव जीत चुके हैं और राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। 2017 से 2022 तक वे उत्तराखंड सरकार में शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। पांडे को भाजपा का मजबूत नेता माना जाता है और वे क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए जाने जाते हैं। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब उन पर आरोप लगे हैं। पहले भी कुछ स्थानीय मुद्दों पर विवाद हुए हैं, हालांकि वे हमेशा खुद को निर्दोष बताते रहे हैं।

इस मामले में विधायक का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। हमने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अगर आरोप सही हैं, तो यह भाजपा के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है, क्योंकि पार्टी किसानों के हितों की बात करती है। उत्तराखंड में भाजपा की सरकार है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी किसान कल्याण योजनाओं पर जोर देते हैं। ऐसे में अगर उनके ही विधायक पर ऐसा आरोप लगा, तो पार्टी की छवि पर असर पड़ सकता है।

उत्तराखंड में जमीन कब्जाने की समस्या: एक बड़ा मुद्दा

उत्तराखंड में जमीन कब्जाने के मामले कोई नई बात नहीं हैं। पहाड़ी इलाकों में सीमित जमीन होने के कारण लोग अक्सर विवादों में फंस जाते हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में हजारों किसान भूमि विवादों से जूझ रहे हैं। कई बार राजनीतिक लोग या अमीर लोग गरीबों की जमीन हथिया लेते हैं। किसान संगठन अक्सर ऐसे मामलों पर आवाज उठाते हैं। उदाहरण के लिए, पिछले सालों में देहरादून और हरिद्वार जैसे जिलों में भी ऐसी शिकायतें आईं हैं।

किसानों के लिए जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी पहचान और जीविका है। भारत में हर साल हजारों किसान आत्महत्या करते हैं, और इसका बड़ा कारण कर्ज, फसल खराब होना या जमीन छिन जाना होता है। उत्तराखंड में भी मौसम की मार से किसान पहले ही परेशान हैं। ऊपर से अगर नेता ही उनकी जमीन छीन लें, तो स्थिति और खराब हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को भूमि सुधार कानूनों को सख्ती से लागू करना चाहिए। रेवेन्यू विभाग को ऐसे मामलों में तुरंत जांच करनी चाहिए।

धामी सरकार की भूमिका: न्याय मिलेगा या सिर्फ वादे?

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हमेशा किसानों के हितों की बात की है। उनकी सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं, जैसे किसान सम्मान निधि, फसल बीमा और सिंचाई सुविधाएं। लेकिन इस मामले में सरकार की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है। पीड़ित परिवार ने कहा है कि वे मुख्यमंत्री से मिलना चाहते हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। अगर सरकार ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला बड़ा रूप ले सकता है। विपक्षी पार्टियां जैसे कांग्रेस और आप इसे मुद्दा बना सकती हैं।

कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि गदरपुर इलाके में विकास के नाम पर कई जमीनें कब्जाई गई हैं। विधायक के समर्थक कहते हैं कि यह राजनीतिक साजिश है, लेकिन पीड़ित परिवार के वीडियो और बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। पुलिस को इसकी जांच करनी चाहिए और अगर धमकियां मिल रही हैं, तो सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए।

निष्कर्ष

यह मामला बताता है कि भारत में किसानों की स्थिति अभी भी कमजोर है। राजनीतिक पावर के आगे आम आदमी की आवाज दब जाती है। पीड़ित परिवार की धमकी से साफ है कि वे हताश हैं। समाज को ऐसे मामलों पर आवाज उठानी चाहिए। एनजीओ और किसान यूनियन को आगे आना चाहिए। अगर न्याय मिला, तो यह एक मिसाल बनेगा। अन्यथा, और भी किसान हताश हो सकते हैं।

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