Vitamin K Deficiency Symptoms: शरीर में विटामिन K की कमी एक गंभीर लेकिन अक्सर अनदेखी समस्या है। अगर आपके मसूड़ों से बार-बार खून आता है या हल्की चोट लगने पर भी नीले-काले निशान (ब्रूज) पड़ जाते हैं, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है। विटामिन K खून को जमाने (क्लॉटिंग) में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी से खून ज्यादा बहने लगता है, हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। खासकर नवजात शिशुओं में यह कमी जानलेवा साबित हो सकती है। आइए जानते हैं इस कमी के लक्षण, कारण, खतरे और बचाव के बारे में विस्तार से।
विटामिन K क्या है और क्यों जरूरी है?/Vitamin K Deficiency Symptoms
विटामिन K एक फैट-सॉल्युबल विटामिन है, जो मुख्य रूप से दो रूपों में पाया जाता है – K1 (फाइलोक्विनोन) और K2 (मेनाक्विनोन)। यह शरीर में क्लॉटिंग फैक्टर्स (प्रोटीन) को एक्टिवेट करता है, जिससे खून बहने पर जल्दी जम जाता है। साथ ही, यह हड्डियों में कैल्शियम को बांधने में मदद करता है और धमनियों में कैल्शियम जमा होने से रोकता है, जिससे हार्ट अटैक का रिस्क कम होता है।

इसकी कमी से खून जमने की प्रक्रिया बिगड़ जाती है, जिसे ‘ब्लीडिंग डिसऑर्डर’ कहा जाता है। अमेरिकी नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, कुछ लोग ज्यादा रिस्क में होते हैं, जैसे ब्लड थिनर दवाएं लेने वाले, लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स इस्तेमाल करने वाले या फैट अब्सॉर्ब करने वाली बीमारियों से पीड़ित लोग।
मुख्य लक्षण,मसूड़ों से खून और नीले निशान सबसे बड़ा अलार्म
विटामिन K की कमी के सबसे आम और शुरुआती संकेत हैं:
- मसूड़ों से खून आना (Bleeding gums) – ब्रश करते समय या सख्त चीज खाने पर मसूड़े से खून निकलना।
- आसानी से नीले या काले निशान पड़ना (Easy bruising) – हल्की ठेस लगने पर भी बड़े-बड़े ब्रूज बन जाना, खासकर हाथ-पैर या शरीर पर।
- नाक से खून आना (Nosebleeds)।
- छोटी-मोटी चोट या कट से ज्यादा खून बहना।
- नाखूनों के नीचे छोटे खून के थक्के।
- गंभीर मामलों में पेट या आंतों से ब्लीडिंग, जिससे स्टूल काला हो सकता है।
नवजात बच्चों में यह कमी ‘विटामिन K डेफिशिएंसी ब्लीडिंग’ (VKDB) या हेमोरेजिक डिजीज ऑफ न्यूबॉर्न के रूप में दिखती है। इसमें सिर के आसपास ब्रूज, नाक-नाभि से ब्लीडिंग, पीला पड़ना या यहां तक कि ब्रेन हेमरेज हो सकता है, जो जानलेवा है।
कमी के कारण, ये लोग ज्यादा खतरे में
वयस्कों में विटामिन K की कमी दुर्लभ है, लेकिन ये कारण जिम्मेदार हो सकते हैं:
- कम मात्रा में विटामिन K युक्त भोजन लेना।
- लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल, जो आंत में विटामिन K बनाने वाले बैक्टीरिया को मार देते हैं।
- ब्लड थिनर दवाएं जैसे वारफेरिन।
- ज्यादा विटामिन A या E का सेवन, जो K के प्रभाव को कम कर सकता है।
- फैट अब्सॉर्प्शन की समस्या वाली बीमारियां जैसे सीलिएक, क्रोहन या सिस्टिक फाइब्रोसिस।
- लीवर की बीमारियां, जो क्लॉटिंग फैक्टर्स बनाने में दिक्कत पैदा करती हैं।
नवजात शिशुओं में कमी इसलिए आम है क्योंकि उनके शरीर में स्टोर कम होता है और आंत में बैक्टीरिया नहीं होते जो K बनाते हैं। इसलिए जन्म के तुरंत बाद इंजेक्शन दिया जाता है।
इससे जुड़ी बीमारियां और खतरे
- खून बहने की गड़बड़ी – अनियंत्रित ब्लीडिंग।
- ऑस्टियोपोरोसिस – हड्डियां कमजोर होकर फ्रैक्चर का खतरा।
- हार्ट डिजीज – धमनियों में कैल्शियम जमा होने से।
- लीवर प्रॉब्लम्स का बिगड़ना।
- बच्चों में ब्रेन ब्लीडिंग से मौत तक का खतरा।
जांच और इलाज, डॉक्टर से सलाह जरूरी
कमी की जांच ब्लड टेस्ट से होती है, जिसमें प्रोथ्रोम्बिन टाइम (PT) या INR चेक किया जाता है। इलाज में:
- विटामिन K सप्लीमेंट्स या इंजेक्शन।
- डाइट में बदलाव।
- दवाओं का एडजस्टमेंट।
- गंभीर मामलों में हॉस्पिटलाइजेशन।
बचाव: इन खाद्य पदार्थों से भरपूर लें विटामिन K
विटामिन K की कमी से बचने का सबसे आसान तरीका है संतुलित आहार:
- हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, सरसों का साग, मेथी, ब्रोकोली, केल, कॉलर्ड ग्रीन्स (K1 का मुख्य स्रोत)।
- अन्य सब्जियां: ब्रसेल्स स्प्राउट्स, शतावरी।
- फलियां और तेल: सोयाबीन ऑयल, कैनोला ऑयल।
- K2 के लिए: फर्मेंटेड फूड्स जैसे नट्टो, चीज, अंडे, मीट, लीवर।
रोजाना 90-120 माइक्रोग्राम (महिलाओं/पुरुषों के लिए) पर्याप्त है। अगर दवाएं ले रहे हैं, तो डॉक्टर से डाइट के बारे में पूछें।
निष्कर्ष
मसूड़ों से खून या आसानी से नीले निशान पड़ना सिर्फ छोटी समस्या नहीं, बल्कि शरीर में विटामिन K की कमी का बड़ा अलार्म है। समय पर ध्यान देकर डाइट सुधारें और डॉक्टर से जांच करवाएं। खासकर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और दवाएं लेने वालों को सतर्क रहना चाहिए। याद रखें, स्वस्थ शरीर के लिए विटामिन K उतना ही जरूरी है जितना अन्य विटामिन।










