Nuclear Explosion In Space: अंतरिक्ष में न्यूक्लियर बम बिल्कुल फट सकता है। न्यूक्लियर बम को फटने के लिए हवा या ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि ये फिशन (परमाणु विखंडन) या फ्यूजन (परमाणु संलयन) की रिएक्शन से काम करता है। ये रिएक्शन बम के अंदर ही होते हैं, इसलिए वैक्यूम (खाली अंतरिक्ष) में भी ये पूरी ताकत से फट सकता है। लेकिन पृथ्वी पर धमाका जैसा हम फिल्मों में देखते हैं—बड़ा गोला, शॉकवेव, मशरूम क्लाउड—वो अंतरिक्ष में बिल्कुल नहीं होता। क्यों? क्योंकि अंतरिक्ष में हवा नहीं है!
पृथ्वी पर न्यूक्लियर बम फटने पर तीन मुख्य चीजें होती हैं:

- फायरबॉल (आग का गोला) जो सब कुछ जला देता है।
- शॉकवेव (दबाव की लहर) जो इमारतें उड़ा देती है।
- मशरूम क्लाउड और रेडियोएक्टिव फॉलआउट।
ये सब हवा की वजह से होते हैं। हवा गर्म होकर फैलती है, दबाव बनाती है और धूल-मिट्टी को ऊपर उठाती है। लेकिन अंतरिक्ष में वैक्यूम है—कोई हवा नहीं। इसलिए कोई शॉकवेव नहीं फैलती, कोई मशरूम क्लाउड नहीं बनता, और फायरबॉल भी बहुत छोटा और छोटे समय का रहता है।
अंतरिक्ष में धमाका कैसा होगा?/Nuclear Explosion In Space
जब न्यूक्लियर बम अंतरिक्ष में फटता है, तो उसकी ज्यादातर एनर्जी (ऊर्जा) इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन के रूप में निकलती है—खासकर X-रे, गामा रे, और न्यूट्रॉन की तेज धारा। ये रेडिएशन बहुत तेजी से फैलती है और दूर तक जाती है, क्योंकि रास्ते में हवा नहीं रोकती।
- फ्लैश और ग्लो: धमाका एक चमकदार फ्लैश की तरह दिखता है, जो सेकंडों में गायब हो जाता है। ये चमक इतनी तेज होती है कि दूर से भी दिखाई देती है, जैसे 1962 में अमेरिका के स्टारफिश प्राइम टेस्ट में हवाई से हजारों किलोमीटर दूर तक नजर आई थी।
- कोई धमाका की आवाज या झटका नहीं: अंतरिक्ष में कोई हवा नहीं, तो कोई ध्वनि या दबाव की लहर नहीं। अगर आप बहुत पास होंगे तो रेडिएशन से जल जाएंगे, लेकिन दूर से कोई ब्लास्ट फील नहीं होगा।
- रेडिएशन का असर: रेडिएशन बहुत दूर तक फैलती है। एक 1 मेगाटन बम का रेडिएशन इंसान को 700-800 किमी दूर तक मार सकता है (अगर कोई शील्डिंग न हो)।
सबसे खतरनाक असर: EMP और रेडिएशन बेल्ट
अंतरिक्ष में न्यूक्लियर धमाका का सबसे बड़ा खतरा EMP (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स) और आर्टिफिशियल रेडिएशन बेल्ट है।
- EMP क्या है? गामा रे हवा के अणुओं से टकराकर इलेक्ट्रॉन्स छोड़ती हैं, जो तेज EMP बनाती हैं। ये EMP बिजली ग्रिड, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर, मोबाइल, सैटेलाइट सब खराब कर सकती है। 1962 के स्टारफिश प्राइम टेस्ट (1.4 मेगाटन, 400 किमी ऊपर) में हवाई में 300 स्ट्रीटलाइट्स जल गईं, बर्गलर अलार्म बज गए, और टेलीफोन लाइनें खराब हो गईं।
- सैटेलाइट्स का नुकसान: आज के समय में हजारों सैटेलाइट्स हैं। एक धमाका से X-रे और रेडिएशन से सैटेलाइट्स के सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स खराब हो सकते हैं। स्टारफिश प्राइम में उस समय के लगभग एक-तिहाई सैटेलाइट्स खराब हो गए थे, जिसमें पहला कम्युनिकेशन सैटेलाइट टेलस्टार भी शामिल था।
- रेडिएशन बेल्ट: धमाका से निकले चार्ज्ड पार्टिकल्स (इलेक्ट्रॉन्स) पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड में फंस जाते हैं और वैन एलन बेल्ट को और मजबूत बना देते हैं। ये बेल्ट सालों तक रह सकती है और सैटेलाइट्स को धीरे-धीरे नष्ट कर सकती है।
पृथ्वी पर धमाके से कितना अलग?
- पृथ्वी पर: ब्लास्ट, हीट, फायर, रेडियोएक्टिव फॉलआउट से लाखों मौतें।
- अंतरिक्ष में: कोई ब्लास्ट या फायर नहीं, लेकिन रेडिएशन और EMP से पूरे इलाके की बिजली-कम्युनिकेशन-नेविगेशन ठप। आज के डिजिटल दुनिया में ये ज्यादा खतरनाक हो सकता है—GPS, बैंकिंग, इंटरनेट सब प्रभावित।
क्यों बैन है अंतरिक्ष में न्यूक्लियर टेस्ट?
1963 में Partial Test Ban Treaty और 1967 में Outer Space Treaty ने अंतरिक्ष में न्यूक्लियर हथियार रखना या टेस्ट करना बैन कर दिया। स्टारफिश प्राइम जैसे टेस्ट्स ने दिखाया कि ये कितना खतरनाक है। हाल में रूस पर आरोप लगे कि वो स्पेस में न्यूक्लियर डिवाइस डेवलप कर रहा है, लेकिन अभी कोई इमिनेंट खतरा नहीं।
निष्कर्ष
अंतरिक्ष में न्यूक्लियर बम फटना पृथ्वी जितना ‘ड्रामेटिक’ नहीं दिखता—कोई बड़ा बादल, कोई जोरदार धमाका नहीं—लेकिन इसका असर ज्यादा व्यापक और लंबे समय तक रहने वाला होता है। ये सैटेलाइट्स, कम्युनिकेशन और हमारी पूरी टेक्नोलॉजी सिस्टम को तबाह कर सकता है। इसलिए दुनिया भर में इसे रोकने के लिए सख्त नियम हैं।










