Utpanna Ekadashi 2025 : मार्गशीर्ष मास की पवित्र बेला में आने वाली उत्पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi 2025) इस बार एक विशेष संयोग लेकर आई है — एक ओर व्रत की पावन तिथि, तो दूसरी ओर राहुकाल का साया। यही कारण है कि श्रद्धालु उलझन में हैं कि आखिर व्रत 14 या 15 नवंबर को रखना उचित होगा। हिंदू धर्मग्रंथों में यह एकादशी न केवल ‘व्रतों की जननी’ कही गई है, बल्कि साल की पहली एकादशी के रूप में भी पूजनीय है। इस दिन भगवान विष्णु और देवी एकादशी की आराधना करने से पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
उत्पन्ना एकादशी की पौराणिक कथा

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, मार्गशीर्ष मास (Margashirsha Maas) की शुक्ल पक्ष एकादशी को देवी एकादशी का जन्मदिन माना जाता है। पौराणिक कथा के मुताबिक, एक समय असुर मुर (Demon Mura) ने देवताओं को पराजित कर स्वर्गलोक पर अधिकार कर लिया था। तब भगवान विष्णु (Lord Vishnu) ने उस दानव से युद्ध किया। युद्ध के दौरान भगवान विश्राम में चले गए, तभी उनके शरीर से एक दिव्य तेजस्विनी कन्या उत्पन्न हुई। इस कन्या ने मुर का वध कर ब्रह्मांड को भयमुक्त किया। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर कहा — “तुम एकादशी तिथि पर उत्पन्न हुई हो, इसलिए तुम्हारा नाम ‘एकादशी’ रहेगा। जो तुम्हारा व्रत करेगा, वह सभी पापों से मुक्त होगा।”
व्रत और पूजन विधि से जुड़ी मान्यताएं
उत्पन्ना एकादशी व्रत को हिंदू परंपरा में वर्ष की पहली एकादशी माना गया है। इस दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी (Goddess Lakshmi) और देवी एकादशी की पूजा करने का विधान है। व्रत रखने वाले भक्त दिनभर उपवास करते हैं और रात्रि में भजन-कीर्तन कर जागरण करते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि इस व्रत से जीवन में समृद्धि आती है, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और पापों का नाश होता है। कहा जाता है कि यह व्रत केवल इस जन्म में नहीं, बल्कि अगले जन्मों में भी मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
राहुकाल का साया और शुभ मुहूर्त का महत्व
पंचांग (Panchang) के अनुसार, इस बार उत्पन्ना एकादशी के दिन राहुकाल सुबह 9:25 बजे से 10:45 बजे तक रहेगा। इस दौरान पूजा या यात्रा जैसे शुभ कार्यों से बचना चाहिए क्योंकि राहुकाल को अशुभ काल माना गया है। वहीं, पूजा के लिए सबसे शुभ समय होगा —
अभिजीत मुहूर्त: 11:44 बजे से 12:27 बजे तक
विजय मुहूर्त: 1:53 बजे से 2:36 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:27 बजे से 5:54 बजे तक
इन मुहूर्तों में भगवान विष्णु की आराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
सही तारीख पर व्रत रखने को लेकर भ्रम क्यों?
इस बार पंचांग गणना में तिथियों के संयोग के कारण व्रत की तारीख (Ekadashi Date) को लेकर असमंजस बना हुआ है। कुछ स्थानों पर एकादशी तिथि 14 नवंबर 2025 (शुक्रवार) को मानी जा रही है, जबकि कई पंचांगों में इसे 15 नवंबर 2025 (शनिवार) बताया गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, व्रत उसी दिन रखना चाहिए जब सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान हो। इस प्रकार, जो भक्त नियमपूर्वक व्रत करना चाहते हैं, वे स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि की पुष्टि करें। श्रद्धा और संकल्प के साथ किया गया यह व्रत हर रूप में शुभ फलदायी माना गया है।










