पत्नी ने पति को पीठ पर लादकर बनवाने पहुंची दिव्यांग सर्टिफिकेट, वीडियो वायरल

रायबरेली में योगी सरकार की शख्ती व उनके लाख प्रयासों के बाद भी स्वास्थ्य व्यवस्थाएं दुरुस्त होने का नाम नहीं ले रही है। यहां आए दिन कोई ना कोई वीडियो सरकार की किरकिरी कर रहा है।जबकि डिप्टी सीएम बृजेश पाठक व स्वास्थ्य मंत्री के सक्रिय होने के बाद भी अव्यवस्था फैली हुई है।मामला शहर स्थित सीएमओ ऑफिस का

Mar 04, 2025 - 15:22
Updated: 1 year ago
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रायबरेली में योगी सरकार की शख्ती व उनके लाख प्रयासों के बाद भी स्वास्थ्य व्यवस्थाएं दुरुस्त होने का नाम नहीं ले रही है। यहां आए दिन कोई ना कोई वीडियो सरकार की किरकिरी कर रहा है।जबकि डिप्टी सीएम बृजेश पाठक व स्वास्थ्य मंत्री के सक्रिय होने के बाद भी अव्यवस्था फैली हुई है।

मामला शहर स्थित सीएमओ ऑफिस का एक वीडियो सामने आया जो व्यवस्था की पोल खोलकर रख दे रहा है। यहाँ एक महिला अपने दिव्यांग पति का विकलांग सर्टिफिकेट बनवाने के लिये उसे पीठ पर लादकर इधर उधर भटकती दिख रही है। महिला अपने पति का दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिये सीएमओ ऑफिस आई थी।


यह मामला सोमवार का है। सोमवार को सीएमओ ऑफिस में दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने का साप्ताहिक दिन निर्धारित किया गया है। पहली बार सीएमओ ऑफिस आई महिला को जानकारी नही थी कि उसे पति का दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिये इतनी मुश्किलें झेलनी पड़ेगी। ऑफिस में मेडिकल के लिये उसे इधर से उधर तहलाया गया जिसमें उसे मजबूरन पति को पीठ पर लादकर इधर से उधर भटकना पड़ा। यहाँ व्हील चेयर की व्यवस्था नही थी। यदि होती तो उसे इस प्रकार से परेशान न होना पड़ता।

थाना हरचंदपुर क्षेत्र देदोर की रहने वाली रिंकी ने बताया कि वह सोमवार को पति का दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने के लिये सीएमओ कार्यालय आई हुई थी। व्हील चेयर की कोई व्यवस्था न होने के कारण उसे मजबूरी में पति को पीठ पर लादकर करके इधर से उधर जाना पड़ा। वह चाहती हैं कि सीएमओ ऑफिस में उसके पति का दिव्यांग प्रमाण पत्र बन जाये और यहाँ जो भी अव्यवस्था है उसमें सुधार किया जाए ताकि यहाँ दिव्यांग को सुविधा मिल सके।

https://youtu.be/1SFL8lHF20w

इस मामले में सीएमओ डॉ नवीन चन्द्रा का कहना है।कि सोमवार को एक महिला अपने पति का दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाने के लिए सीएमओ ऑफिस आई थी। सीएमओ ऑफिस में दिव्यांग प्रमाण पत्र कार्यालय के बाहर व्हीलचेयर की सुविधा दी गई है। हो सकता है उस दिन उस महिला को वह व्हिक चेयर दिखाई न दिया हो या उसने किसी से पूछा ना हो। बाकी सोमवार के दिन सभी दिव्यांग यहाँ आते हैं उन सभी को यह जानकारी है कि यहाँ व्हीलचेयर की सुविधा रखी गई है।

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