रांची में झारखंड भर के पंचायतों के सैकड़ों मुखियाओं की ग्राम संसद बैठी, कई स्तरीय सुझाव सरकार को दिए गए

रिपोर्ट : मोहन कुमार

ग्रामीण विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से राजधानी रांची में ग्राम संसद कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। कॉन्क्लेव में झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने बताया कि कैसे सरकार की कई योजनाएं पहली बार आदिवासी ग्रामों तक पहुंच रही है। उन्होंने संसद में भाग लेने वाले मुखियाओं से नए-नए सुझाव भी आमंत्रित किए, जिससे कि आने वाले समय में ग्राम सभाओं को और अधिक सुविधाएं मिलें।

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कार्यक्रम में झारखंड सरकार के वित्त एवं वाणिज्य मंत्री राधामोहन किशोर ने भी अपने वक्तव्य में बताया कि कैसे केंद्र सरकार के कतिपय अवरोधों के बावजूद झारखंड के 4000 से अधिक ग्राम सभाओं को वित्तीय सहायता बढ़ाने की कोशिश कामयब रही। संसद में शामिल कई मुखियाओं ने भी अपने-अपने क्षेत्र की दैनंदिनी समस्याओं का जिक्र करते हुए उनके समाधान भी सुझाए।

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विकेंद्रीकरण विशेषज्ञ, मीडिया कंसल्टेंट, लोकस्वराज्य मंच के, कनार्टक से आए सिद्धार्थ शर्मा ने रोचक कहानी के माध्यम से संसद को बताया कि कैसे ग्रामसभा भारतीय संविधान की सबसे पहली इकाई होने के चलते संसद, विधानसभाओं से भी ज्यादा महत्वपूर्ण इकाई है। पंचायती राज विषय के लेखक सुधीर पाल ने बताया कि किस प्रकार से आने वाले समय में संविधान की सातवीं अनुसूची में केंद्र और राज्य सूची के साथ ग्रामसभा सूची की भी स्वाभाविक मांग उठेगी।

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अन्य विद्वान जैसे राजीव गांधी पंचायती राज संस्था के सुनीत शर्मा, सन्मत संस्था के अमित चौबे, चेंबर ऑफ कॉमर्स के डॉ अमृतांशु प्रसाद एवं विकास सहाय आदि ने भी पंचायत के मुखियाओं की संसद को संबोधित किया। अतिथियों का सम्मान कॉन्क्लेव के संयोजक, इस पूरे ग्राम संसद कार्यक्रम की परिकल्पना, आयोजन एवं उसे हकीकत में उतारने वाले, भारत जोड़ो यात्री, सामाजिक कार्यकर्ता कुंदन सिंह ने किया। कार्यक्रम का सुचारू संचालन दूरदर्शन की सरोज ने तथा धन्यवाद ज्ञापन चंदन ने दिया।

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