रिपोर्ट : पवन पाटीदार
लद्दाख के लेह में हिमस्खलन की चपेट में आने से शहीद हुए मध्यप्रदेश के राजगढ़ के अग्निवीर हरिओम नागर (22) का अंतिम संस्कार मंगलवार को पैतृक गांव टूटियाहेड़ी में हुआ। शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
शहीद बेटे की पार्थिव शरीर को देख पिता दुर्गा प्रसाद नागर बेसुध हो गए। ग्रामीणों ने उन्हें सहारा देकर बिठाया। वे रोते बिलखते रहे। शहीद हरिओम नागर की पार्थिव शरीर को उनके बड़े भाई बालचंद नागर ने मुखाग्नि दी।

सुबह करीब 9:30 बजे सेना के वाहन से बोड़ा नाका पर पार्थिव शरीर लाया गया था। 21 किलोमीटर लंबी अंतिम यात्रा शुरू हुई। राष्ट्रभक्ति गीतों के साथ यात्रा चली। 6 किलोमीटर लंबे काफिले में स्कूली बच्चों समेत हजारों लोग शामिल हुए। 4 हजार से ज्यादा गाड़ियां चलीं, इनमें करीब 3 हजार बाइक और एक हजार चार पहिया वाहन थे। यात्रा में सांसद रोडमल और राज्यमंत्री गौतम टेटवाल, नगर परिषद अध्यक्ष विकास करोड़िया सहित प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। रविवार को ड्यूटी के दौरान एक बड़े पहाड़ के टूटकर गिरने से अग्निवीर हरिओम नागर की मौके पर ही जान चली गई थी। शहीद की पार्थिव शरीर सोमवार को फ्लाइट से भोपाल लाई गई, जहां से सेना के वाहन से सोमवार रात को ही पचोर लाया गया।
हरिओम के पिता दुर्गाप्रसाद नागर ने बताया कि बेटे को बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था। कभी किसी और करियर की बात नहीं की। वह हमेशा कहता था- मैं फौजी ही बनूंगा। गांव के स्कूल से पढ़ाई कर उज्जैन की यादव एकेडमी तक पहुंचा और एनसीसी जॉइन की। डेढ़ साल पहले अग्निवीर योजना के तहत सेना में भर्ती हुआ था।

पिता बोले- दुख है, पर बेटे पर गर्व है
शहीद जवान के पिता ने कहा- “हमें दुख जरूर है, लेकिन उससे ज्यादा गर्व है कि हमारा बेटा देश के लिए शहीद हुआ। उसका सपना था सेना में जाना और उसने वही किया।”