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समाज को दिग्भ्रमित कर बोकारो का औद्योगिक माहौल ख़राब कर रहीं हैं कांग्रेसी विधायक : कुमार अमित

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1.इन्हीं रवैया से बीएसएल का विस्तारीकरण हुआ है स्थगित
2.राज्य में विस्थापन पुनर्वास नीति बनवाने से हीं समाप्त होगी विस्थापितो की समस्याएँ
3.अपनी सरकार रहते जनता से सड़क पर उतरने का आह्वान करना हास्यास्पद

बोकारो की जनता को कांग्रेस की विधायक श्रीमती श्वेता सिंह दिग्भ्रमित कर यहाँ का औद्योगिक माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रही हैं। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति समिति सदस्य कुमार अमित ने बोकारो से बाहर रहने के कारण मिडिया को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही है। उन्होंने ने कहा कि विस्थापित सहित बोकारो का हर वर्ग श्रीमती श्वेता सिंह के क्रिया कलापों से अचम्भित है। बीते 7 अगस्त को जब बोकारो उपायुक्त ने डिपीएलआर के साथ बैठक कर सेल को अपने अधिग्रहीत भूमि को पंजी 2 मे म्यूटेशन कराने और शेष बचे विस्थापित गाँवों को पंचायत का दर्जा देने हेतु आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश जारी किया, तो दूसरे दिन हीं वो स्वंय समाहरणालय जाकर बोकारो उपायुक्त को फूलों का गुलदस्ता देकर बधाई दीं और उपायुक्त के इस कार्य का श्रेय लेते हुए अपनी पीठ भी स्वंय थपथपाईं और भोले भाले विस्थापित जनता से फूलों का गुलदस्ता लेकर इस कार्य के लिए बधाई भी स्वीकार कीं। बोकारो वासी उसी दिन समझ गए थे कि बोकारो उपायुक्त के द्वारा जारी किए गए ये दोनो निर्देश परस्पर विरोधाभासी हैं। बोकारो की जनता अपने जनप्रतिनिधि से कम से कम इतनी समझदारी की अपेक्षा तो करती हीं है। उनके इस कार्य से बोकारो की जनता विशेष कर विस्थापित समाज दिग्भ्रमित हुआ है। बोकारो विधायक के इस हरकत से विस्थापित समाज असमंजस की स्थिति मे आज चौराहे पर खड़ा हो किंकर्तव्यविमूढ़ है। अब बोकारो विधायक उपायुक्त के इस निर्देश का विरोध करने के लिए विस्थापित समाज को महासंग्राम करने का आह्वान कर रहीं है। पहले बोकारो विधायक को स्पष्ट करना चाहिए कि 20 दिनों के अंदर उपायुक्त के इन निर्देशों में ऐसा कौन सा परिवर्तन आ गया जिसके लिए वो उपायुक्त को बधाई और बुके देते देते राज्य में चल रही अपना हीं कॉंग्रेस पार्टी की गठबंधन सरकार में बोकारो समाहरणालय के समक्ष महासंग्राम करने पर आ गयीं। अपनी सरकार रहते लोगों से अधिकार के लिए सड़क पर उतरने का आह्वान करना दुर्भाग्यपूर्ण और हास्यास्पद है। क्या यह सरकार इतनी जनविरोधी हो गई है कि बोकारो के अपनी हीं कॉंग्रेसी विधायक के द्वारा उठाई जा रही बातों को अनसुना कर रही है ? उन्हें इसके साथ विस्थापित समाज को यह भी बताना चाहिए कि बोकारो विधायक उपायुक्त के द्वारा जारी इन निर्देशों के लिए बधाई और बुके देने क्यों गयीं थीं एवं इसका श्रेय उस समय स्वंय क्यों ले रहीं थीं। अगर उनका वो निर्णय ग़लत था तो बोकारो विधायक को जनता से माफ़ी माँगते हुए समाज को अब दिग्भ्रमित करना बंद कर देना चाहिए। अगर बोकारो उपायुक्त के द्वारा जारी निर्देश विस्थापित समाज के हीत में नहीं है तो उन्हें इस विषय को विधानसभा में उठाकर अपनी सरकार से विस्थापन और पुनर्वास नीति बनवा बोकारो के हित के में निर्णय लेने का निर्देश जारी करवाना चाहिए। क्योंकि राज्य में सुदृढ़ विस्थापन एवं पुनर्वास नीति से हीं बोकारो सहित सभी ज़िलों के विस्थापितों की समस्याओं का पूर्णतः समाधान सम्भव है। अब महासंग्राम और महायुद्ध जैसे शब्दों से समाज को गुमराह कर विधि व्यवस्था को चुनौती नहीं दी जा सकती। लोकतंत्र में व्यवस्था क़ानून और नियम से संचालित होती है। नेता का काम समाज को सही दिशा देना होता है, दिग्भ्रमित करना नहीं। ऐसे हरकतों की वजह से हीं बोकारो स्टील प्लांट के विस्तारीकरण और आधुनिकीकरण कार्य स्थगित हुआ है। बोकारो में औद्योगिकरण से हीं यहाँ के विकास को गति और विस्थापित सहित स्थानीय युवाओं को रोज़गार मिलेगा। इसके लिए उपयुक्त वातावरण बनाए रखना सभी बोकारो वासियों का कर्तव्य है। विस्थापित समाज को बिना बोकारो विधायक के बहकावे में आए अपना हित-अहित की चिंता स्वयं करते हुए आगे की रणनीति भी अब खुद हीं तय करना चाहिए।

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